सेंसेक्स 143 अंक फिसलकर 73,709 पर बंद, डिफेंस-मेटल शेयरों में भारी बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को 143.21 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 73,709.69 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 77.60 अंक यानी 0.34 प्रतिशत टूटकर 22,811.35 पर आ गया। कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने दिन की शुरुआती बढ़त को पूरी तरह पलट दिया।
मिडकैप और स्मॉलकैप में गहरी चोट
लार्जकैप की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बिकवाली का दबाव कहीं अधिक रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 922.10 अंक यानी 1.58 प्रतिशत गिरकर 57,565.85 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स और भी तेज़ गिरावट के साथ 448.45 अंक यानी 2.37 प्रतिशत की कमज़ोरी लेकर 18,487.30 पर बंद हुआ। यह व्यापक बाज़ार की कमज़ोरी का स्पष्ट संकेत है।
कौन-से सेक्टर रहे सबसे कमज़ोर
सत्र में सबसे अधिक दबाव डिफेंस, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और मेटल स्टॉक्स पर रहा। निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.49 प्रतिशत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.86 प्रतिशत और निफ्टी मेटल 1.71 प्रतिशत की गिरावट के साथ शीर्ष लूजर्स में रहे। इसके अलावा निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी ऑटो, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी मीडिया, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी पीएसई भी लाल निशान में बंद हुए।
गौरतलब है कि केवल निफ्टी आईटी और निफ्टी सर्विसेज ही हरे निशान में बंद होने में सफल रहे — बेहतर तिमाही कमाई की संभावनाओं और नए निवेशकों की रुचि के चलते आईटी सेक्टर ने बाज़ार में अकेले मज़बूती का झंडा थामे रखा।
गेनर्स और लूजर्स
प्रमुख गेनर्स में HCL टेक, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, TCS, अल्ट्राटेक सीमेंट, भारती एयरटेल, पावर ग्रिड, ITC और ICICI बैंक शामिल रहे। दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस, इटरनल, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, NTPC, मारुति सुजुकी, इंडिगो, कोटक महिंद्रा बैंक, BEL, बजाज फिनसर्व, टाटा स्टील, टाइटन, SBI, M&M, HDFC बैंक और L&T लूजर्स की सूची में रहे।
बाज़ार विशेषज्ञों की राय
बाज़ार के जानकारों के अनुसार, ऑटो, फाइनेंशियल, मेटल और रियल्टी सेक्टर में मुनाफावसूली का तेज़ दौर महंगाई और मार्जिन दबाव को लेकर निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है। यह ऐसे समय में आया है जब दूसरी तिमाही के मज़बूत नतीजे और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) का सहयोग बाज़ार को आंशिक सहारा दे रहा है।
आगे की दिशा
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, निकट भविष्य में बाज़ार की चाल कंपनियों के तिमाही नतीजों, व्यापार वार्ता में प्रगति और विदेशी निवेश के प्रवाह पर निर्भर करेगी। बाज़ार में टिकाऊ स्थिरता के लिए कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और रुपये में उतार-चढ़ाव का कम होना ज़रूरी माना जा रहा है। FII की बिकवाली बंद होने तक सतर्कता बरतने की सलाह विशेषज्ञ दे रहे हैं।