सेंसेक्स 353 अंक गिरकर 73,246 पर बंद; IT और ऑयल-गैस में बिकवाली, मिडकैप-स्मॉलकैप में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को 352.64 अंक यानी 0.48 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,246.03 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 50.90 अंक या 0.22 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,698.85 पर थमा। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल और आईटी शेयरों में भारी बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को दबाव में रखा।
मुख्य घटनाक्रम
गिरावट मुख्य रूप से लार्जकैप शेयरों तक सीमित रही। इसके विपरीत, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 244.80 अंक या 0.43 प्रतिशत की बढ़त के साथ 57,274.70 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 166.20 अंक या 0.90 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,634.90 पर बंद हुआ, जो यह संकेत देता है कि व्यापक बाजार में खरीदारी का रुझान बना रहा।
सेक्टर-वार प्रदर्शन
सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी ऑटो (1.45 प्रतिशत), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (1.41 प्रतिशत), निफ्टी मीडिया (1.38 प्रतिशत), निफ्टी हेल्थकेयर (1.15 प्रतिशत) और निफ्टी फार्मा (1.04 प्रतिशत) शीर्ष लाभ में रहे। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी प्राइवेट बैंक में भी क्रमशः 0.47 प्रतिशत और 0.35 प्रतिशत की तेजी आई।
वहीं दूसरी ओर, निफ्टी ऑयल एंड गैस (-2.27 प्रतिशत) और निफ्टी आईटी (-1.98 प्रतिशत) सबसे बड़े नुकसान में रहे। निफ्टी कमोडिटीज (-0.95 प्रतिशत), निफ्टी एनर्जी (-0.89 प्रतिशत) और निफ्टी रियल्टी (-0.89 प्रतिशत) भी दबाव में बंद हुए।
प्रमुख शेयरों का हाल
सेंसेक्स पैक में एलएंडटी, ट्रेंट, SBI, एक्सिस बैंक, इंडिगो, HDFC बैंक, मारुति सुजुकी, बजाज फाइनेंस और M&M लाभ में बंद हुए। दूसरी तरफ रिलायंस इंडस्ट्रीज, इन्फोसिस, टेक महिंद्रा, TCS, भारती एयरटेल, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, Eternal, BEL, HCL Tech, ICICI बैंक, कोटक महिंद्रा, टाइटन, ITC और HUL गिरावट में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी रहा। कच्चे तेल की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल और आईटी शेयरों में भारी बिकवाली ने निवेशकों की भावनाओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि बाजार अमेरिकी मध्यावधि चुनावों पर करीबी नजर बनाए हुए है, ताकि भू-राजनीतिक परिदृश्य को लेकर अधिक स्पष्टता मिल सके।
गौरतलब है कि मजबूत तिमाही नतीजों, बैंकिंग, ऑटो और फार्मा क्षेत्र के लचीलेपन तथा निचले स्तरों पर हुई खरीदारी के चलते सूचकांकों ने अपनी शुरुआती गिरावट का एक बड़ा हिस्सा पाट लिया।
आगे क्या
अब निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति संबंधी मार्गदर्शन पर टिकी हैं, जो बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में भी अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।