सेंसेक्स 19 अंक गिरकर 74,295 पर सपाट बंद, निफ्टी 0.33% चढ़ा; आईटी शेयरों में सबसे ज़्यादा दबाव
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद मामूली 19.63 अंक (0.03%) की गिरावट के साथ 74,294.96 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 ने 75.80 अंक (0.33%) की बढ़त के साथ 23,346.40 का स्तर छुआ। हफ्ते के अंतिम कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाज़ार का समग्र रुख मिला-जुला रहा।
व्यापक बाज़ार का प्रदर्शन
मिडकैप और स्मॉलकैप खंड में उल्लेखनीय तेज़ी देखी गई। निफ्टी मिडकैप सूचकांक 1.24% और निफ्टी स्मॉलकैप 1.74% की वृद्धि के साथ बंद हुआ, जो यह संकेत देता है कि चौड़ाई के मामले में बाज़ार लार्जकैप से बेहतर रही।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ओर से अपेक्षित नीतिगत संकेत मिले, जिससे उभरते बाज़ारों में जोखिम लेने की इच्छाशक्ति मज़बूत हुई।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी मेटल, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी सीमेंट और निफ्टी केमिकल ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसके विपरीत, निफ्टी आईटी सूचकांक में सबसे अधिक गिरावट दर्ज हुई।
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, आईटी शेयरों पर दबाव मुख्यतः प्रॉफिट बुकिंग और इस आशंका से आया कि लंबे समय तक ऊँची ब्याज दरें वैश्विक प्रौद्योगिकी खर्च को प्रभावित कर सकती हैं।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
निफ्टी 50 में अदाणी पोर्ट्स, अदाणी एंटरप्राइजेज, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, पावरग्रिड, अल्ट्राटेक सीमेंट और अपोलो हॉस्पिटल शीर्ष लाभार्थियों में रहे।
वहीं, टीसीएस, एसबीआई लाइफ, कोल इंडिया, मारुति सुजुकी, एनटीपीसी, टाटा कंज्यूमर और सन फार्मा के शेयरों में गिरावट देखी गई।
विशेषज्ञों की राय
एक बाज़ार विशेषज्ञ ने कहा कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता की चिंताओं के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में नरमी ने निवेशकों का जोखिम लेने का हौसला बढ़ाया, जिससे भारतीय इक्विटी बाज़ार में रिकवरी का सिलसिला जारी रहा।
विशेषज्ञ के अनुसार, बड़े केंद्रीय बैंकों द्वारा उम्मीद के अनुरूप नीतिगत कदमों से मिले सकारात्मक वैश्विक संकेतों ने भी निवेशकों के भरोसे को मज़बूत किया।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि बाज़ार की यह रिकवरी वैश्विक व्यापक आर्थिक जोखिमों में और कमी तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से ठोस पूँजी प्रवाह पर निर्भर करेगी। तेल की कीमतों और यील्ड में मौजूदा नरमी अल्पकालिक राहत दे रही है, परंतु दीर्घकालिक दिशा अनिश्चित बनी हुई है।