जयशंकर ने न्यूयॉर्क में एआई की ताकत और जोखिमों पर दिया जोर, ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' का किया उल्लेख
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की संभावनाओं का अधिकतम लाभ उठाने और इससे जुड़े जोखिमों को समय रहते कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इनोवेशन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ सुरक्षा-संबंधी पहलुओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।
सत्र की पृष्ठभूमि
विदेश मंत्री जयशंकर ने ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिटिस के साथ मिलकर 'अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के संदर्भ में एआई, समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान' विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय सत्र की सह-अध्यक्षता की। यह सत्र संयुक्त राष्ट्र की बैठकों के क्रम में आयोजित किया गया, जहाँ एआई और वैश्विक सुरक्षा के परस्पर संबंध पर गंभीर विमर्श हुआ।
नई दिल्ली घोषणापत्र का संदर्भ
जयशंकर ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए 'नई दिल्ली घोषणापत्र' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस घोषणापत्र में एआई संसाधनों तक लोकतांत्रिक और समावेशी पहुँच सुनिश्चित करने, सुरक्षित एवं भरोसेमंद प्रणालियाँ विकसित करने, मानवीय क्षमताओं में निवेश बढ़ाने तथा आर्थिक विकास व सामाजिक कल्याण के लिए एआई के उपयोग पर बल दिया गया है। गौरतलब है कि यह घोषणापत्र भारत की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन की एक प्रमुख उपलब्धि है।
समुद्री सुरक्षा में एआई की भूमिका
समुद्री क्षेत्र में एआई की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह तकनीक मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस, खोज और बचाव अभियानों, आपदा-प्रतिक्रिया, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तथा बंदरगाहों एवं महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा को सशक्त बना सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यही तकनीक जहाजों, संचार नेटवर्क और समुद्र के नीचे के बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने वाले उन्नत टोही अभियानों और साइबर ऑपरेशन्स को भी संभव बना सकती है।
जवाबदेही और अंतर्राष्ट्रीय कानून
जयशंकर ने एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में लिखा, 'समुद्री सिस्टम में बढ़ती स्वायत्तता से जिम्मेदारी तय करने, जवाबदेही और तनाव बढ़ने जैसे सवाल उठते हैं, साथ ही फैसला लेने का समय भी कम हो जाता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री क्षेत्र में यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून — जिसमें समुद्र का कानून भी शामिल है — देशों के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले आवश्यक आधार बने हुए हैं। उन्होंने पारदर्शिता, विश्वास-निर्माण उपायों, क्षमता विकास, तकनीकी सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को अनिवार्य बताया।
भारत की प्राथमिकताएँ
विदेश मंत्री ने दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के लिए एआई और समुद्री सुरक्षा अहम प्राथमिकताएँ बनी हुई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई शासन के लिए एक साझा रूपरेखा तैयार करने की माँग तेज हो रही है। भारत की यह सक्रिय भूमिका ग्लोबल साउथ की आवाज़ को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मज़बूती से रखने की उसकी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।