26 सितंबर 2026
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जयशंकर ने न्यूयॉर्क में एआई की ताकत और जोखिमों पर दिया जोर, ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' का किया उल्लेख

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जयशंकर ने न्यूयॉर्क में एआई की ताकत और जोखिमों पर दिया जोर, ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' का किया उल्लेख

सारांश

न्यूयॉर्क में एक उच्चस्तरीय सत्र की सह-अध्यक्षता करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने एआई की ताकत और उसके जोखिमों दोनों को रेखांकित किया। ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' का हवाला देते हुए उन्होंने समावेशी पहुँच, पारदर्शिता और अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप एआई विकास की वकालत की।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में एआई संभावनाओं और जोखिमों पर उच्चस्तरीय सत्र की सह-अध्यक्षता की।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में एआई की लोकतांत्रिक पहुँच और सुरक्षित प्रणाली विकास पर जोर दिया गया।
एआई से मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस , बचाव अभियान और बंदरगाह सुरक्षा को बल मिल सकता है, लेकिन साइबर खतरे भी बढ़ सकते हैं।
जयशंकर ने यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप एआई विकास की जरूरत बताई।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में एआई और समुद्री सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता घोषित किया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 26 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की संभावनाओं का अधिकतम लाभ उठाने और इससे जुड़े जोखिमों को समय रहते कम करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इनोवेशन को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ सुरक्षा-संबंधी पहलुओं की अनदेखी नहीं की जा सकती।

सत्र की पृष्ठभूमि

विदेश मंत्री जयशंकर ने ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिटिस के साथ मिलकर 'अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के संदर्भ में एआई, समुद्री सुरक्षा पर विशेष ध्यान' विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय सत्र की सह-अध्यक्षता की। यह सत्र संयुक्त राष्ट्र की बैठकों के क्रम में आयोजित किया गया, जहाँ एआई और वैश्विक सुरक्षा के परस्पर संबंध पर गंभीर विमर्श हुआ।

नई दिल्ली घोषणापत्र का संदर्भ

जयशंकर ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए 'नई दिल्ली घोषणापत्र' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस घोषणापत्र में एआई संसाधनों तक लोकतांत्रिक और समावेशी पहुँच सुनिश्चित करने, सुरक्षित एवं भरोसेमंद प्रणालियाँ विकसित करने, मानवीय क्षमताओं में निवेश बढ़ाने तथा आर्थिक विकास व सामाजिक कल्याण के लिए एआई के उपयोग पर बल दिया गया है। गौरतलब है कि यह घोषणापत्र भारत की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन की एक प्रमुख उपलब्धि है।

समुद्री सुरक्षा में एआई की भूमिका

समुद्री क्षेत्र में एआई की संभावनाओं पर चर्चा करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह तकनीक मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस, खोज और बचाव अभियानों, आपदा-प्रतिक्रिया, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तथा बंदरगाहों एवं महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा को सशक्त बना सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यही तकनीक जहाजों, संचार नेटवर्क और समुद्र के नीचे के बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाने वाले उन्नत टोही अभियानों और साइबर ऑपरेशन्स को भी संभव बना सकती है।

जवाबदेही और अंतर्राष्ट्रीय कानून

जयशंकर ने एक्स पर साझा की गई अपनी पोस्ट में लिखा, 'समुद्री सिस्टम में बढ़ती स्वायत्तता से जिम्मेदारी तय करने, जवाबदेही और तनाव बढ़ने जैसे सवाल उठते हैं, साथ ही फैसला लेने का समय भी कम हो जाता है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि समुद्री क्षेत्र में यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय कानून — जिसमें समुद्र का कानून भी शामिल है — देशों के व्यवहार को नियंत्रित करने वाले आवश्यक आधार बने हुए हैं। उन्होंने पारदर्शिता, विश्वास-निर्माण उपायों, क्षमता विकास, तकनीकी सहयोग और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को अनिवार्य बताया।

भारत की प्राथमिकताएँ

विदेश मंत्री ने दोहराया कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के लिए एआई और समुद्री सुरक्षा अहम प्राथमिकताएँ बनी हुई हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एआई शासन के लिए एक साझा रूपरेखा तैयार करने की माँग तेज हो रही है। भारत की यह सक्रिय भूमिका ग्लोबल साउथ की आवाज़ को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मज़बूती से रखने की उसकी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

घोषणापत्र की भाषा व्यावहारिक प्रभाव से ज़्यादा आकांक्षाओं का दस्तावेज़ बनकर रह सकती है।
RashtraPress
26 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विदेश मंत्री जयशंकर ने न्यूयॉर्क में एआई पर क्या कहा?
जयशंकर ने एआई की संभावनाओं का लाभ उठाने और उससे जुड़े जोखिमों को कम करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इनोवेशन को प्रोत्साहन देते हुए सुरक्षा-संबंधी पहलुओं का भी ध्यान रखना आवश्यक है।
ब्रिक्स 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में एआई को लेकर क्या कहा गया है?
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए इस घोषणापत्र में एआई संसाधनों तक लोकतांत्रिक पहुँच, सुरक्षित और भरोसेमंद प्रणालियाँ बनाने, मानवीय क्षमताओं में निवेश और आर्थिक-सामाजिक कल्याण के लिए एआई के उपयोग पर जोर दिया गया है। यह घोषणापत्र भारत की अध्यक्षता में अपनाया गया।
समुद्री सुरक्षा में एआई किस तरह उपयोगी और खतरनाक दोनों हो सकता है?
एआई मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस, खोज-बचाव, आपदा प्रतिक्रिया और बंदरगाह सुरक्षा को सशक्त बना सकता है। दूसरी ओर, यही तकनीक जहाजों, संचार नेटवर्क और समुद्र के नीचे के बुनियादी ढाँचे पर साइबर हमलों और टोही अभियानों को भी संभव बना सकती है।
एआई और समुद्री सुरक्षा पर जवाबदेही के लिए क्या ढाँचा सुझाया गया?
जयशंकर ने यूएन चार्टर और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून के अनुरूप एआई विकास की जरूरत बताई। उन्होंने पारदर्शिता, विश्वास-निर्माण उपायों, क्षमता विकास और सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान को आवश्यक बताया।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की एआई नीति की प्राथमिकता क्या है?
विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के लिए एआई और समुद्री सुरक्षा दोनों शीर्ष प्राथमिकताएँ हैं। भारत ग्लोबल साउथ की आवाज़ को एआई शासन की वैश्विक रूपरेखा में समाहित कराने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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