रूस ने यूक्रेन के 12 क्षेत्रों पर दागीं 21 बैलिस्टिक मिसाइलें, 2 की मौत, 34 घायल
सारांश
मुख्य बातें
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने 22 अक्टूबर 2026 को जानकारी दी कि रूस ने बुधवार शाम से कीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों से तीन अलग-अलग चरणों में हमले किए, जिनमें कुल 21 मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। ये हमले यूक्रेन के 12 क्षेत्रों तक फैले रहे, जिनमें 2 लोगों की मौत की पुष्टि हुई और 34 लोग घायल हुए, जिनमें 5 बच्चे भी शामिल हैं।
हमले का दायरा और नुकसान
ज़ेलेंस्की के अनुसार, इस हमले में कीव को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा। कई आम रिहायशी इमारतें, ऊर्जा अवसंरचना, एक रेलवे स्टेशन, मेट्रो सुविधाएँ, शॉपिंग सेंटर, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और एक मठ भी हमले की चपेट में आया। उन्होंने बताया कि आपातकालीन सेवाएँ सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य में तत्परता से जुटी हुई हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन और रूस के बीच बातचीत का एक और दौर हाल ही में पूरा हुआ था। ज़ेलेंस्की ने कहा कि इस हमले का समय रूस के रुख को बेनकाब करता है।
ज़ेलेंस्की का बयान और रूस पर आरोप
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, 'इसका मतलब है कि जो कुछ हो रहा है, उसके प्रति रूस के रवैये में कोई वास्तविक बदलाव नहीं आया है।' उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि बातचीत के जवाब में मिसाइल हमले यह सिद्ध करते हैं कि रूस पर वास्तविक दबाव बनाना अपरिहार्य हो गया है।
गौरतलब है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी राजनयिक प्रयास के तुरंत बाद रूस ने बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हों। विश्लेषकों का कहना है कि यह पैटर्न रूसी रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
यूक्रेन की माँगें
ज़ेलेंस्की ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तीन स्पष्ट माँगें रखीं — यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली को और मज़बूत करना, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट करने में सक्षम हथियारों की त्वरित आपूर्ति, और रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों को बनाए रखना। उन्होंने यूक्रेन के साथ एकजुट खड़े रहने वाले सभी देशों और व्यक्तियों का आभार जताया।
आम नागरिकों पर असर
हमले में कीव और उसके आसपास के इलाकों में 34 लोग घायल हुए, जिनमें 5 बच्चे शामिल हैं। ऊर्जा अवसंरचना और परिवहन सुविधाओं को पहुँची क्षति से आम नागरिकों की दैनिक ज़िंदगी पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। यह ऐसे समय में है जब यूरोप में सर्दी का मौसम दस्तक दे रहा है और ऊर्जा आपूर्ति पहले से ही एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई है।
आगे क्या होगा
अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की नज़र अब इस बात पर है कि पश्चिमी देश — विशेषकर NATO सदस्य — इस ताज़ा हमले के बाद यूक्रेन को हथियार आपूर्ति और प्रतिबंध नीति के मोर्चे पर क्या कदम उठाते हैं। ज़ेलेंस्की के बयान से स्पष्ट है कि यूक्रेन केवल राजनयिक बातचीत पर निर्भर नहीं रहना चाहता — उसे ज़मीन पर ठोस सैन्य समर्थन की दरकार है।