सिएट शेयर 9% से अधिक टूटा, Q1 FY27 में मुनाफा 96% गिरकर ₹4 करोड़ पर
सारांश
मुख्य बातें
टायर निर्माता कंपनी सिएट के शेयर शुक्रवार, 17 जुलाई को सुबह के कारोबारी सत्र में 9.3 प्रतिशत तक लुढ़क गए, जब कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में उच्च परिचालन लागत के चलते समेकित शुद्ध लाभ में 96 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की। यह गिरावट निवेशकों के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि कच्चे माल की बढ़ती लागत ने कंपनी की लाभप्रदता पर गहरा असर डाला है।
शेयर में कितनी गिरावट आई
बाज़ार खुलते ही सिएट का शेयर पिछली क्लोजिंग ₹3,829.60 के मुकाबले गिरकर ₹3,471.10 पर पहुँच गया — यानी एकल सत्र में 9.3 प्रतिशत की गिरावट। सुबह 10:47 बजे IST पर यह 7.33 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ ₹3,548 पर कारोबार कर रहा था। पिछले एक वर्ष में सिएट के शेयर करीब 8 प्रतिशत टूट चुके हैं, जो व्यापक बाज़ार के प्रदर्शन से कमज़ोर रहा है। पिछले छह महीनों में भी शेयर 8 प्रतिशत से अधिक और इस वर्ष अब तक करीब 6 प्रतिशत नीचे है।
तिमाही नतीजे: राजस्व बढ़ा, मुनाफा धराशायी
कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ Q1 FY27 में घटकर मात्र ₹4 करोड़ रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह ₹112 करोड़ था — सालाना आधार पर 96 प्रतिशत की गिरावट। हालाँकि, परिचालन से राजस्व 22.4 प्रतिशत बढ़कर ₹4,318 करोड़ हो गया, जो एक वर्ष पहले ₹3,529 करोड़ था — यह विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों में मज़बूत माँग को दर्शाता है।
परिचालन प्रदर्शन भी दबाव में रहा। EBITDA सालाना आधार पर 5.7 प्रतिशत घटकर ₹365 करोड़ रह गया, जो एक साल पहले ₹387 करोड़ था। EBITDA मार्जिन भी सिकुड़कर 8.5 प्रतिशत पर आ गया, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 11 प्रतिशत था।
कच्चे माल की लागत बनी मुख्य चुनौती
कंपनी के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे माल की लागत में उछाल आया, जिसने मुनाफे पर सीधा दबाव बनाया। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखलाएँ पहले से ही भू-राजनीतिक तनाव के कारण अस्थिर हैं। गौरतलब है कि टायर उद्योग में प्राकृतिक रबर, कार्बन ब्लैक और क्रूड-आधारित रसायन प्रमुख इनपुट हैं, जिनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से सीधे प्रभावित होती हैं।
प्रबंधन का रुख
कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अर्नब बनर्जी ने कहा कि इनपुट लागत में बढ़ोतरी के असर को आंशिक रूप से कम करने के लिए कंपनी ने चरणबद्ध तरीके से टायरों की कीमतें बढ़ाईं, जबकि माँग और बाज़ार हिस्सेदारी को भी बनाए रखा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के दौरान भी कच्चे माल की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी रहने की संभावना है, जो निकट भविष्य में मार्जिन दबाव जारी रहने का इशारा करता है।
आगे क्या होगा
विश्लेषकों की नज़र अब इस बात पर होगी कि क्या सिएट की चरणबद्ध मूल्य वृद्धि की रणनीति Q2 FY27 में मार्जिन को स्थिर कर पाती है। राजस्व में 22 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि यह संकेत देती है कि माँग पक्ष मज़बूत है; असली परीक्षा लागत प्रबंधन की होगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है और कच्चे माल की कीमतें नरम पड़ती हैं, तो कंपनी के लिए दूसरी छमाही में सुधार की गुंजाइश बन सकती है।