भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से रवाना, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी; ₹14,700 करोड़ की परियोजनाओं का लोकार्पण
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर सोनीपत के लिए रवाना किया। यह ट्रेन दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बताई जा रही है। इस ऐतिहासिक अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी उपस्थित रहे।
हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत
हरी झंडी दिखाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जींद रेलवे स्टेशन पर उपस्थित नागरिकों और छात्र-छात्राओं का अभिनंदन स्वीकार किया। दूसरे प्लेटफॉर्म पर बड़ी संख्या में लोग जमा थे। हाथों में तिरंगा थामे स्कूली बच्चों ने इस 'ग्रीन ट्रांसपोर्ट' की पहली यात्रा का अनुभव किया और उत्साह के साथ इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
₹14,700 करोड़ की विकास परियोजनाएँ
इसके बाद प्रधानमंत्री ने जींद के एकलव्य स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में लगभग ₹14,700 करोड़ की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। मंच पर पहुँचने पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उनका पारंपरिक साफा पहनाकर और उपहार भेंट कर स्वागत किया।
दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण
प्रधानमंत्री ने लगभग ₹9,680 करोड़ की लागत से विकसित 157.92 किलोमीटर लंबे, चार लेन वाले दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे (पैकेज 1 से 5) को राष्ट्र को समर्पित किया। इस एक्सप्रेसवे के चालू होने से दिल्ली-कटरा के बीच यात्रा का समय लगभग 14 घंटे से घटकर 6 घंटे और दिल्ली-अमृतसर का समय लगभग 8 घंटे से घटकर 4 घंटे रह जाएगा। यह परियोजना वैष्णो देवी तीर्थयात्रियों और पंजाब के व्यापारिक वर्ग दोनों के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है।
अन्य प्रमुख राजमार्ग परियोजनाएँ
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-7 और राष्ट्रीय राजमार्ग-344 पर बने 33.81 किलोमीटर लंबे, चार लेन वाले अंबाला-काला अंब राजमार्ग का भी उद्घाटन किया। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग-352ए पर स्थित 40.60 किलोमीटर लंबे जींद-गोहाना ग्रीनफील्ड राजमार्ग का उद्घाटन और हांसी-बरवाला ब्राउनफील्ड राजमार्ग परियोजना की आधारशिला रखी गई।
आगे की राह
हाइड्रोजन ट्रेन की यह शुरुआत भारतीय रेलवे के हरित ऊर्जा की ओर संक्रमण का एक निर्णायक पड़ाव है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। विशेषज्ञों की नज़र अब इस ट्रेन की परिचालन दक्षता, रखरखाव लागत और भविष्य में अन्य रूटों पर विस्तार की संभावनाओं पर टिकी है।