17 जुलाई 2026
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भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी

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भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन जींद-सोनीपत रूट पर, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी

सारांश

भारत ने 17 जुलाई को इतिहास रचा — PM मोदी ने जींद-सोनीपत रूट पर देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। 1,200 किलोवाट फ्यूल सेल, 2,600 यात्री क्षमता और शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ भारत अब हाइड्रोजन रेल परिवहन में अग्रणी देशों की सूची में शामिल हो गया है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को जींद-सोनीपत रूट पर हरी झंडी दिखाई।
ट्रेन में 10 कोच हैं, प्रत्येक पावर कार 1,200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करती है; अधिकतम गति 110 किमी प्रति घंटा ।
यह एक साथ लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है और उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प छोड़ती है।
जींद में देश का पहला इंटीग्रेटेड रेलवे हाइड्रोजन इकोसिस्टम स्थापित किया गया है।
यह प्रणाली PESO मानकों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों के अनुरूप है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने इसे देश की ग्रीन मोबिलिटी यात्रा का 'ऐतिहासिक क्षण' बताया।

भारतीय रेलवे ने 17 जुलाई 2026 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन को जींद-सोनीपत रूट पर हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन 1,200 किलोवाट के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से चलती है और उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प छोड़ती है, जो इसे पर्यावरण की दृष्टि से शून्य-उत्सर्जन वाहन बनाती है।

ट्रेन की तकनीकी विशेषताएँ

यह 10-कोच वाली ट्रेनसेट में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार और आठ ट्रेलर कोच हैं। प्रत्येक पावर कार 1,200 किलोवाट बिजली उत्पन्न करती है। यह ट्रेन एक साथ लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है और अधिकतम 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती है। इसे दुनिया भर में अब तक विकसित सबसे बड़े हाइड्रोजन-संचालित पैसेंजर ट्रेनसेट में से एक माना जा रहा है।

यह ट्रेन पूरी तरह भारत में ही डिज़ाइन, इंजीनियर और एकीकृत की गई है, जो उन्नत रेलवे प्रौद्योगिकी में देश की बढ़ती आत्मनिर्भरता को रेखांकित करती है।

जींद में बना देश का पहला हाइड्रोजन इकोसिस्टम

इस परियोजना को संचालन योग्य बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने जींद में देश का पहला इंटीग्रेटेड रेलवे हाइड्रोजन इकोसिस्टम स्थापित किया है। यहाँ इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के ज़रिए हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है, भंडारण के लिए उसे संपीड़ित किया जाता है और एक विशेष रीफ्यूलिंग प्रणाली के माध्यम से ट्रेन को आपूर्ति की जाती है। यह ढाँचा भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा करता है जिनके पास परिचालन में हाइड्रोजन ट्रेनें हैं।

सुरक्षा मानक और अनुपालन

इस परियोजना में व्यापक सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं — जिनमें हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम, हीट और स्मोक सेंसर, निरंतर वेंटिलेशन प्रणाली और स्वचालित शटडाउन व्यवस्था शामिल हैं। रेल मंत्रालय के अनुसार, यह प्रणाली पेट्रोलियम व विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) के मानकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का भी पूरी तरह पालन करती है।

पीयूष गोयल की प्रतिक्रिया

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस उपलब्धि को 'भारत के ग्रीन मोबिलिटी भविष्य के लिए सचमुच एक ऐतिहासिक क्षण' करार दिया। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री मोदी के 'इनोवेशन-आधारित, नेट-जीरो ग्रोथ के विजन' से प्रेरित होकर और जींद में विकसित स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज व रीफ्यूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के सहयोग से भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जो टिकाऊ रेल परिवहन में नए मानक स्थापित कर रहे हैं।

आगे की राह

फिलहाल यह ट्रेन नॉर्दर्न रेलवे के 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत सेक्शन पर परिचालन शुरू करेगी। यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के अपने राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है और रेलवे क्षेत्र में डीकार्बनाइज़ेशन की गति तेज़ करने का दबाव बढ़ रहा है। इस सफल पायलट के बाद हाइड्रोजन ट्रेन नेटवर्क के विस्तार की दिशा में नीतिगत निर्णयों की प्रतीक्षा रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा 89 किलोमीटर के पायलट रूट से आगे के विस्तार में होगी। जींद में इलेक्ट्रोलिसिस-आधारित हाइड्रोजन उत्पादन की परिचालन लागत और ग्रीन हाइड्रोजन की उपलब्धता दो ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर अभी बाकी है। जर्मनी और चीन जैसे देशों के अनुभव बताते हैं कि हाइड्रोजन ट्रेनें विद्युतीकृत नेटवर्क पर आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी नहीं हो पातीं — और भारत के 90% से अधिक ब्रॉड-गेज नेटवर्क पर विद्युतीकरण पहले से हो चुका है। इसलिए यह तकनीक संभवतः उन गैर-विद्युतीकृत, दूरदराज़ मार्गों के लिए अधिक प्रासंगिक होगी जहाँ ओवरहेड लाइन बिछाना व्यावहारिक नहीं है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन कहाँ चलेगी और इसकी विशेषताएँ क्या हैं?
यह ट्रेन नॉर्दर्न रेलवे के 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत सेक्शन पर चलेगी। इसमें 10 कोच हैं, यह 2,600 यात्रियों को ले जा सकती है, अधिकतम 110 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती है और 1,200 किलोवाट के हाइड्रोजन फ्यूल सेल प्रोपल्शन सिस्टम से संचालित होती है।
हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के लिए किस तरह फायदेमंद है?
यह ट्रेन परिचालन के दौरान उत्सर्जन के रूप में केवल जलवाष्प छोड़ती है, जिससे यह शून्य-उत्सर्जन वाहन बनती है। यह भारत के 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में रेलवे क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण कदम है।
जींद में हाइड्रोजन इकोसिस्टम क्या है?
भारतीय रेलवे ने जींद में देश का पहला इंटीग्रेटेड रेलवे हाइड्रोजन इकोसिस्टम स्थापित किया है। यहाँ इलेक्ट्रोलिसिस के ज़रिए हाइड्रोजन का उत्पादन, भंडारण के लिए संपीड़न और विशेष रीफ्यूलिंग प्रणाली के माध्यम से ट्रेन को आपूर्ति की जाती है।
इस हाइड्रोजन ट्रेन में सुरक्षा के क्या इंतज़ाम हैं?
ट्रेन में हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर, फ्लेम, हीट और स्मोक सेंसर, निरंतर वेंटिलेशन और स्वचालित शटडाउन प्रणाली लगाई गई है। रेल मंत्रालय के अनुसार यह प्रणाली PESO मानकों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नियमों का पालन करती है।
पीयूष गोयल ने इस ट्रेन के बारे में क्या कहा?
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत के ग्रीन मोबिलिटी भविष्य के लिए 'ऐतिहासिक क्षण' बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री मोदी के इनोवेशन-आधारित, नेट-जीरो ग्रोथ के विजन की दिशा में एक बड़ा कदम है और भारत को टिकाऊ रेल परिवहन में नए मानक स्थापित करने वाले देशों की श्रेणी में ला खड़ा करता है।
राष्ट्र प्रेस
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