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हाइड्रोजन ट्रेन: स्वदेशी तकनीक, 2,600 यात्रियों की क्षमता — वैष्णव ने बताया मोदी के रेलवे विजन का अहम स्तंभ

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हाइड्रोजन ट्रेन: स्वदेशी तकनीक, 2,600 यात्रियों की क्षमता — वैष्णव ने बताया मोदी के रेलवे विजन का अहम स्तंभ

सारांश

भारत ने 10 कोच और 2,600 यात्री क्षमता वाली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन उतारी — जबकि दुनिया के बाकी देश अभी 2-3 कोच की ट्रेनों पर टिके हैं। IP अधिकार भारत के पास, निर्यात की भी तैयारी। जींद-सोनीपत रेलखंड बनेगा इस तकनीकी छलांग का पहला गवाह।

मुख्य बातें

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 जुलाई 2026 को जींद में हाइड्रोजन ट्रेन को PM मोदी के रेलवे विजन का अहम हिस्सा बताया।
ट्रेन में 2,400 किलोवाट का पूर्णतः स्वदेशी हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है।
प्रारंभिक संचालन उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत रेलखंड पर होगा, जो जींद, गोहाना और सोनीपत को जोड़ेगा।
ट्रेन में 10 कोच हैं और यह लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है — वैश्विक हाइड्रोजन ट्रेनों से कहीं अधिक।
इस तकनीक के IP अधिकार भारत के पास हैं और भविष्य में इसे निर्यात करने की योजना है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 17 जुलाई 2026 को जींद, हरियाणा में कहा कि भारत की हाइड्रोजन ट्रेन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेलवे आधुनिकीकरण के व्यापक विजन का केंद्रीय हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ट्रेन में लगी तकनीक पूरी तरह स्वदेशी है और यह 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का एक ठोस उदाहरण है।

स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम: क्या है खास

वैष्णव के अनुसार, भारतीय रेलवे ने परिवहन क्षेत्र के लिए 2,400 किलोवाट का पूरी तरह स्वदेशी हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम विकसित किया है, जिसे इस ट्रेन में स्थापित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस तकनीक के बौद्धिक संपदा (IP) अधिकार पूरी तरह भारत के पास हैं और भविष्य में इसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में निर्यात किए जाने की भी योजना है।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में हाइड्रोजन को पारंपरिक जीवाश्म ईंधन के विकल्प के रूप में तेज़ी से अपनाया जा रहा है। भारत सरकार ने भी इस दिशा में कई नीतिगत कदम उठाए हैं।

जींद-सोनीपत रेलखंड पर प्रारंभिक संचालन

रेलवे की जानकारी के अनुसार, हाइड्रोजन फ्यूल सेल संचालित इस ट्रेन का प्रारंभिक परिचालन उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत रेलखंड पर किया जाएगा। यह ट्रेन जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ेगी।

मार्ग पर जींद सिटी, पांडू पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हॉल्ट, भंभेवा, इसापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंडराई हॉल्ट, रभराह हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत न्यू जैसे स्टेशनों पर भी सेवा उपलब्ध होगी।

वैश्विक तुलना में भारत की बढ़त

भारत की यह हाइड्रोजन ट्रेन 10 कोचों के यात्री ट्रेनसेट के रूप में तैयार की गई है, जिसकी यात्री क्षमता लगभग 2,600 है। यह आँकड़ा वैश्विक परिदृश्य में उल्लेखनीय है — दुनिया भर में अभी संचालित अधिकांश हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों में केवल दो या तीन कोच होते हैं और उनका उपयोग मुख्यतः छोटी क्षेत्रीय सेवाओं तक सीमित है।

इस प्रकार क्षमता और पैमाने के लिहाज़ से भारत की यह ट्रेन वैश्विक हाइड्रोजन रेल तकनीक में एक नया मानदंड स्थापित करती है।

रेलवे आधुनिकीकरण का व्यापक संदर्भ

वैष्णव ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों से जारी रेलवे आधुनिकीकरण की श्रृंखला का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रेलवे फिलहाल इस तकनीक को और विकसित करने पर काम कर रहा है।

आने वाले समय में इस परियोजना की सफलता यह तय करेगी कि भारत हाइड्रोजन रेल तकनीक में वैश्विक स्तर पर किस भूमिका में उभरता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

600 यात्री क्षमता वाकई वैश्विक मानकों से आगे है, लेकिन असली कसौटी परिचालन विश्वसनीयता और लागत-प्रभावशीलता होगी — न कि केवल क्षमता का आँकड़ा। IP अधिकार भारत के पास होना एक सकारात्मक संकेत है, पर निर्यात की संभावना तभी साकार होगी जब जींद-सोनीपत रेलखंड पर दीर्घकालिक परिचालन सफल साबित हो। यह भी ध्यान देने योग्य है कि हाइड्रोजन उत्पादन की लागत और हरित हाइड्रोजन की उपलब्धता अभी भी भारत में एक बड़ी चुनौती है — बिना इसके समाधान के, यह तकनीक व्यापक पैमाने पर अपनाना मुश्किल रहेगा।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की हाइड्रोजन ट्रेन क्या है और यह कहाँ चलेगी?
यह भारतीय रेलवे द्वारा विकसित हाइड्रोजन फ्यूल सेल संचालित ट्रेन है, जिसका प्रारंभिक संचालन उत्तर रेलवे के जींद-सोनीपत रेलखंड पर होगा। यह जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ेगी।
इस हाइड्रोजन ट्रेन की यात्री क्षमता कितनी है?
ट्रेन को 10 कोचों वाले यात्री ट्रेनसेट के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें लगभग 2,600 यात्रियों को ले जाने की क्षमता है। यह दुनिया में अभी संचालित अधिकांश हाइड्रोजन ट्रेनों (2-3 कोच) से कहीं अधिक है।
क्या इस ट्रेन की तकनीक पूरी तरह भारतीय है?
हाँ, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार 2,400 किलोवाट का हाइड्रोजन प्रोपल्शन सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी है और इसके IP अधिकार भारत के पास हैं। भविष्य में इस तकनीक को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में निर्यात करने की भी योजना है।
हाइड्रोजन ट्रेन रेलवे आधुनिकीकरण से कैसे जुड़ी है?
वैष्णव ने इसे PM मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों से चल रहे रेलवे आधुनिकीकरण का हिस्सा बताया। यह ग्रीन एनर्जी की दिशा में रेलवे का एक अहम कदम है।
जींद-सोनीपत रेलखंड पर हाइड्रोजन ट्रेन किन स्टेशनों पर रुकेगी?
ट्रेन जींद जंक्शन, जींद सिटी, पांडू पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हॉल्ट, भंभेवा, इसापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंडराई हॉल्ट, रभराह हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना, गोहाना जंक्शन, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत न्यू पर सेवा देगी।
राष्ट्र प्रेस
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