31 अगस्त 2026
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जींद से रवाना होगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी; ₹14,700 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

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जींद से रवाना होगी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी; ₹14,700 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

सारांश

जींद से भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन रवाना — यह महज एक ट्रेन नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे की हरित क्रांति का पहला ठोस कदम है। 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' परियोजना के तहत जींद-सोनीपत रेलखंड पर शुरू यह पहल भारत को जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों की श्रेणी में खड़ा करती है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को जींद रेलवे स्टेशन से भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।
यह ट्रेन 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' परियोजना के तहत जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलाई गई; किराया मात्र ₹25 ।
भारत इस कदम से हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक अपनाने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हुआ।
जींद के एकलव्य स्टेडियम में ₹14,700 करोड़ की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई।
चंडीगढ़ में ₹4,700 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला भी इसी दौरे का हिस्सा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद-सोनीपत रेलखंड पर शुरू हुई यह ट्रेन 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' परियोजना का हिस्सा है। इस ऐतिहासिक कदम के साथ भारत हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक अपनाने वाले दुनिया के चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है।

क्या है 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' परियोजना

'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' भारतीय रेलवे की एक महत्वाकांक्षी हरित परिवहन पहल है, जिसके तहत पारंपरिक डीजल इंजनों की जगह हाइड्रोजन ईंधन-सेल आधारित ट्रेनें चलाई जाएंगी। जींद-सोनीपत रेलखंड को इस पायलट परियोजना के लिए चुना गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस ट्रेन का किराया मात्र ₹25 रखा गया है, जो सामान्य यात्रियों की पहुँच में है। यह ट्रेन पर्यावरण के अनुकूल है क्योंकि हाइड्रोजन दहन से केवल जलवाष्प उत्सर्जित होती है, कार्बन नहीं।

स्थानीय जनता में उत्साह

जींद के निवासियों ने इस पहल का खुले दिल से स्वागत किया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'हद से ज्यादा खुशी है। हमारी ट्रेन चलेगी, लोगों की परेशानी खत्म होगी और समय बचेगा।' उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि जींद में एक मेडिकल कॉलेज की स्थापना भी हो। एक अन्य नागरिक ने कहा, 'हमारे जींद में हाइड्रोजन ट्रेन का अनावरण होगा — यह पर्यावरण के हिसाब से बनाई गई है।' एक तीसरे निवासी ने इसे ऐतिहासिक बताते हुए कहा, 'इसे इतिहास में लिखा जाएगा।'

₹14,700 करोड़ की विकास परियोजनाओं की आधारशिला

हाइड्रोजन ट्रेन के अतिरिक्त, प्रधानमंत्री मोदी ने जींद के एकलव्य स्टेडियम में लगभग ₹14,700 करोड़ की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने सभा को भी संबोधित किया। स्थानीय लोगों ने पीजीआई (स्नातकोत्तर चिकित्सा संस्थान) के उद्घाटन का भी उल्लेख किया, जो इसी दौरे का हिस्सा बताया जा रहा है।

चंडीगढ़ और पंजाब दौरा भी एजेंडे में

जींद के बाद प्रधानमंत्री चंडीगढ़ रवाना हुए, जहाँ दोपहर करीब 1:45 बजे उन्होंने ₹4,700 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और आधारशिला रखी। 17 जुलाई 2026 का यह दौरा हरियाणा, चंडीगढ़ और पंजाब तीनों क्षेत्रों को समाहित करता है, जो इसे राजनीतिक और विकास दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण बनाता है।

भारत की हरित रेल यात्रा में नया अध्याय

गौरतलब है कि यूरोप में जर्मनी और फ्रांस पहले ही हाइड्रोजन ट्रेनों का परिचालन शुरू कर चुके हैं। भारत का यह कदम ऐसे समय में आया है जब रेलवे 2030 तक नेट-ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य लेकर चल रहा है। 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' पायलट की सफलता यह तय करेगी कि इस तकनीक को देश के अन्य हेरिटेज और नॉन-इलेक्ट्रिफाइड रेलखंडों पर कितनी तेज़ी से विस्तारित किया जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इस पायलट के व्यावसायिक और तकनीकी विस्तार में होगी। जर्मनी में हाइड्रोजन ट्रेनों की परिचालन लागत डीजल से अधिक रही है, और भारत में हाइड्रोजन उत्पादन अभी बड़े पैमाने पर हरित नहीं है। एकल रेलखंड पर पायलट से नेट-ज़ीरो रेलवे का लक्ष्य पाने के बीच की दूरी बहुत लंबी है। बिना पारदर्शी लागत-लाभ विश्लेषण और स्केलेबिलिटी रोडमैप के, यह पहल ऐतिहासिक उपलब्धि से अधिक एक महँगा प्रदर्शन बनने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन कहाँ से शुरू हुई और यह किस रूट पर चलेगी?
भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 17 जुलाई 2026 को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से रवाना हुई और यह जींद-सोनीपत रेलखंड पर चलेगी। इसका किराया मात्र ₹25 रखा गया है।
'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' परियोजना क्या है?
'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' भारतीय रेलवे की हरित परिवहन पहल है, जिसके तहत पारंपरिक डीजल इंजनों की जगह हाइड्रोजन ईंधन-सेल आधारित ट्रेनें चलाई जाएंगी। इसका उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन घटाना और गैर-विद्युतीकृत रेलखंडों को हरित बनाना है।
हाइड्रोजन ट्रेन पर्यावरण के लिए किस तरह फायदेमंद है?
हाइड्रोजन ट्रेन ईंधन-सेल तकनीक पर चलती है, जिसमें दहन के दौरान केवल जलवाष्प उत्सर्जित होती है — कार्बन डाइऑक्साइड या अन्य प्रदूषक नहीं। यह डीजल ट्रेनों की तुलना में वायु प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन दोनों को काफी हद तक कम करती है।
PM मोदी के जींद दौरे में और क्या शामिल था?
हाइड्रोजन ट्रेन के अलावा, PM मोदी ने जींद के एकलव्य स्टेडियम में ₹14,700 करोड़ की विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी और उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया। इसके बाद वे चंडीगढ़ गए, जहाँ ₹4,700 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन किया।
भारत हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक अपनाने वाला कौन-से नंबर का देश बना?
भारत इस कदम के साथ हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक अपनाने वाले चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है। इससे पहले जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय देश इस तकनीक का व्यावसायिक परिचालन शुरू कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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