भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 17 जुलाई को हरियाणा के जींद से होगी रवाना, PM मोदी दिखाएंगे हरी झंडी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रेलवे के इतिहास में 17 जुलाई 2025 को एक ऐतिहासिक पड़ाव जुड़ने जा रहा है — देश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन को हरियाणा के जींद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। शून्य-उत्सर्जन तकनीक पर आधारित यह ट्रेन स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यावहारिक कदम मानी जा रही है।
परियोजना की पृष्ठभूमि
यह ट्रेन भारतीय रेलवे की 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' पहल के अंतर्गत तैयार की गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विरासत और ग्रामीण रेल मार्गों पर दशकों पुराने डीजल इंजनों की जगह पर्यावरण-अनुकूल विकल्प स्थापित करना है। रेलवे के अनुसार, भविष्य में 35 और हाइड्रोजन ट्रेनें इसी योजना के तहत संचालित की जाएंगी। गौरतलब है कि यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत ने 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया हुआ है और रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण कई दूरस्थ मार्गों पर अभी भी अधूरा है।
ट्रेन की तकनीकी विशेषताएँ
इस ट्रेन को 10 कोच वाले हाइड्रोजन-चालित डीईएमयू (DEMU) सेट के रूप में विकसित किया गया है। इसमें 682 सीटें हैं और यह एक साथ 2,600 यात्रियों को ले जाने में सक्षम है। परीक्षण के दौरान ट्रेन ने इससे अधिक गति हासिल की थी, परंतु नियमित संचालन के लिए अधिकतम गति 75 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। चूँकि यह अभी एक पायलट परियोजना है, इसे नियंत्रित और सावधानीपूर्वक तरीके से शुरू किया जा रहा है।
हाइड्रोजन ट्रेन कैसे काम करती है
रिपोर्टों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेनें चलते-फिरते बिजलीघर की तरह काम करती हैं। इनमें संग्रहीत हाइड्रोजन गैस और वातावरण से ली गई ऑक्सीजन को फ्यूल सेल में मिलाया जाता है, जिससे रासायनिक प्रक्रिया द्वारा बिजली उत्पन्न होती है। यह बिजली ट्रेन के इलेक्ट्रिक मोटरों को चलाती है। इस पूरी प्रक्रिया में कोई हानिकारक धुआं नहीं निकलता — केवल जलवाष्प और ऊष्मा उत्पन्न होती है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन ट्रेनें उन मार्गों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं जहाँ ओवरहेड बिजली लाइनें बिछाना तकनीकी रूप से कठिन या आर्थिक रूप से महंगा है। ये ट्रेनें बिना व्यापक बुनियादी ढाँचे के इलेक्ट्रिक ट्रेनों जैसे पर्यावरणीय लाभ देती हैं और डीजल ट्रेनों की तरह कुछ ही मिनटों में पुनः ईंधन भरकर चलाई जा सकती हैं।
आगे क्या
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर हाइड्रोजन ट्रेन की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'भारत की पहली हाइड्रोजन-पावर्ड ट्रेन हरियाणा से शुरू होने जा रही है।' इस पोस्ट के बाद परियोजना को लेकर जनता में उत्साह बढ़ा है। जींद से शुरू होने वाली यह ट्रेन यदि पायलट चरण में सफल रही, तो रेलवे के 35 अतिरिक्त हाइड्रोजन ट्रेनों के विस्तार कार्यक्रम को गति मिलेगी और भारत वैश्विक स्तर पर हाइड्रोजन रेल तकनीक अपनाने वाले अग्रणी देशों की सूची में शामिल हो जाएगा।