भारत क्लीन एनर्जी में विश्व अग्रणी: प्रह्लाद जोशी ने लॉन्च किया ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार, 17 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो गया है। इसी अवसर पर उन्होंने 'ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन पोर्टल ऑफ इंडिया' (GHCI) का शुभारंभ किया, जो देश के उभरते ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को पारदर्शी नियामक ढाँचा प्रदान करेगा।
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: लक्ष्य और बजट
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा आयोजित 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मजबूत करना: राज्य की नीतियों, हब और बुनियादी ढाँचे के ज़रिए' विषयक कार्यशाला में जोशी ने बताया कि ₹19,744 करोड़ के बजट के साथ 2023 में शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि यह मिशन देश को टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की ओर ले जाने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है।
गौरतलब है कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विस्तार और ग्रीन हाइड्रोजन विकास दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है, जो वैश्विक ऊर्जा संक्रमण में देश की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।
GHCI पोर्टल: जवाबदेही और पारदर्शिता का नया ढाँचा
कार्यक्रम के दौरान जोशी ने 'ग्रीन हाइड्रोजन सर्टिफिकेशन स्कीम' के अंतर्गत MNRE द्वारा विकसित GHCI पोर्टल को लॉन्च किया। यह पोर्टल ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादकों के लिए सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाएगा तथा नियमों के अनुपालन को सुगम करेगा। अधिकारियों के अनुसार, इससे उभरते ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम में जवाबदेही बढ़ेगी और एक मज़बूत नियामक आधार तैयार होगा।
राज्यों की भागीदारी और घरेलू विनिर्माण
जोशी ने राज्यों से मिशन में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करते हुए बताया कि 6 राज्यों ने पहले ही विशेष ग्रीन हाइड्रोजन नीतियाँ घोषित कर दी हैं, जबकि 7 अन्य राज्यों ने अपनी औद्योगिक और नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों में हाइड्रोजन-संबंधी प्रावधान शामिल किए हैं। 4 और राज्य अभी अपने नीतिगत ढाँचे को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं।
घरेलू विनिर्माण के मोर्चे पर मंत्री ने बताया कि 15 कंपनियों को प्रतिवर्ष 3,000 मेगावाट की इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण क्षमता स्थापित करने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिए गए हैं। इस पहल का मकसद आयातित आपूर्ति शृंखला पर भारत की निर्भरता घटाना और स्थानीय उत्पादन क्षमताओं को सुदृढ़ करना है।
रिफाइनरी क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति
रिफाइनरी क्षेत्र में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) को प्रतिवर्ष 30,000 मीट्रिक टन (MTPA) ग्रीन हाइड्रोजन आपूर्ति के अनुबंध दिए गए हैं। यह कदम पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में एक ठोस नीतिगत हस्तक्षेप है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु प्रतिबद्धताओं को लेकर देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही है। भारत की यह रणनीति आने वाले वर्षों में देश को हरित ऊर्जा निर्यातक के रूप में स्थापित करने की बड़ी महत्वाकांक्षा को दर्शाती है।