केरल एडीजीपी अजित कुमार मामले में एसआईटी की संशोधित रिपोर्ट सौंपी, डीजीपी पदोन्नति पर संकट
सारांश
मुख्य बातें
केरल में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) एम.आर. अजित कुमार के खिलाफ अलाप्पुझा बचाव अभियान से जुड़े विवादित मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी संशोधित जांच रिपोर्ट 17 जुलाई 2026 को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में एडीजीपी अजित कुमार का स्पष्ट रूप से नाम लिया गया है और अतिरिक्त साक्ष्यों के आधार पर उनके खिलाफ जांच के निष्कर्षों को और पुख्ता किया गया है। अब राज्य सरकार पर इस मामले में त्वरित निर्णय लेने का दबाव तेज़ हो गया है।
संशोधित रिपोर्ट क्यों तैयार हुई
राज्य पुलिस प्रमुख (एसपीसी) रावाडा चंद्रशेखर ने 23 जून 2026 को सौंपी गई मूल जांच रिपोर्ट में जांच से जुड़े पाँच अहम बिंदुओं पर अधिक स्पष्टीकरण माँगा था। इसके बाद उन्होंने वह रिपोर्ट एसआईटी को वापस भेज दी। एसआईटी ने आगे की जांच कर इन सभी सवालों का जवाब संशोधित रिपोर्ट में दिया और उसे पुनः सौंप दिया।
आगे की प्रक्रिया और समयसीमा
संशोधित रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब राज्य पुलिस प्रमुख के लिए एडीजीपी अजित कुमार से स्पष्टीकरण माँगने का रास्ता खुल गया है। इसके बाद वे अपनी सिफारिशें गृह विभाग को भेज सकेंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी होने की उम्मीद है।
करियर और पदोन्नति पर संकट
यह मामला ऐसे नाज़ुक समय पर सामने आया है जब मौजूदा पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) 31 जुलाई 2026 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। एडीजीपी एम.आर. अजित कुमार डीजीपी पद के लिए सबसे वरिष्ठ दावेदारों में से एक माने जाते हैं। यदि वे संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हो सकती है, जिससे डीजीपी पद पर उनकी पदोन्नति रुक सकती है।
राजनीतिक दबाव और विपक्ष का हमला
यह विवाद मुख्यमंत्री के लिए राजनीतिक रूप से बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। टीवी चैनल वी.डी. सतीसन के पुराने वीडियो बार-बार प्रसारित कर रहे हैं, जिनमें वे विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में तत्कालीन पिनाराई विजयन सरकार पर ऐसे ही मामलों में कार्रवाई में देरी का आरोप लगाते नज़र आते हैं। अब जबकि सतीसन स्वयं सत्ता पक्ष से जुड़े हैं, उनके पुराने बयान सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं।
कांग्रेस सहयोगियों के भीतर से भी सवाल
कांग्रेस के सहयोगी संगठनों ने आरोप लगाया है कि पार्टी का एक धड़ा एडीजीपी अजित कुमार के प्रति अनावश्यक रूप से नरम रुख अपना रहा है, जिसके कारण कार्रवाई में देरी हो रही है। इन आरोपों के बाद सरकार से जल्द निर्णय की माँग और तेज़ हो गई है। आने वाले दिन एडीजीपी अजित कुमार के करियर और राज्य सरकार की पुलिस जवाबदेही के प्रति विश्वसनीयता, दोनों के लिए निर्णायक साबित होंगे।