दूध संजीवनी योजना अब गुजरात के सभी आदिजाति ICDS ब्लॉकों में लागू, ₹38 करोड़ का प्रावधान
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात सरकार ने 17 जुलाई 2026 को एक अहम फैसले में दूध संजीवनी योजना को राज्य के सभी आदिजाति ICDS ब्लॉकों तक विस्तारित कर दिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग ने शेष 53 ICDS ब्लॉकों में योजना लागू करने की मंजूरी दी है, जिससे आदिवासी क्षेत्रों के हजारों बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पोषणयुक्त दूध मिलना सुनिश्चित होगा। इस विस्तार के लिए राज्य सरकार ने लगभग ₹37.709 करोड़ तथा हाई-फैट पायलट प्रोजेक्ट के लिए अतिरिक्त ₹0.3035 करोड़ का प्रावधान किया है।
योजना का इतिहास और विस्तार
दूध संजीवनी योजना की शुरुआत 24 दिसंबर 2009 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल 6 आदिजाति जिलों में प्रायोगिक तौर पर की थी। इसके अंतर्गत आँगनबाड़ी लाभार्थियों को 200 मिलीलीटर फोर्टिफाइड फ्लेवर्ड दूध दिया जाता है। योजना के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए 2014 में इसे अतिरिक्त 14 आदिजाति जिलों के 106 ICDS घटकों और 20 विकासशील तालुकाओं तक बढ़ाया गया। इस प्रकार पाँच वर्षों में योजना 6 से 20 जिलों तक पहुँच गई।
2016 से योजना में सहकारी डेयरी क्षेत्र को भी जोड़ा गया। बनास, अमूल, सुमुल और माही सहित राज्य की विभिन्न सहकारी डेयरियों ने फोर्टिफाइड दूध का उत्पादन और आपूर्ति शुरू की, जिससे योजना और अधिक व्यवस्थित एवं प्रभावी बनी।
किन जिलों में थी योजना और क्या था अंतर
वर्तमान में यह योजना बनासकांठा, साबरकांठा, अरवल्ली, महीसागर, पंचमहाल, दाहोद, छोटा उदेपुर, नर्मदा, भरूच, सूरत, तापी, नवसारी, वलसाड और डांग सहित 20 आदिजाति बहुल जिलों के अलावा कच्छ, देवभूमि द्वारका, पाटण, खेडा, जामनगर और बोटाद के चयनित क्षेत्रों में लागू थी। हालाँकि, 53 ICDS ब्लॉक अब तक इस योजना के दायरे से बाहर थे। नए फैसले के साथ यह कमी दूर हो गई है।
हाई-फैट दूध का पायलट प्रोजेक्ट
इस विस्तार के साथ-साथ पहली बार हाई-फैट फोर्टिफाइड दूध का पायलट प्रोजेक्ट भी मंजूर किया गया है। अब तक दिए जाने वाले दूध में केवल 1.5 प्रतिशत फैट था। नई व्यवस्था के अंतर्गत नर्मदा, दाहोद और डांग जिलों में 3 प्रतिशत फैट वाला दूध दिया जाएगा, जबकि वलसाड और साबरकांठा जिलों में 4.5 प्रतिशत फैट वाला दूध उपलब्ध कराया जाएगा। यह अतिरिक्त वसा बच्चों के शारीरिक विकास, ऊर्जा और पोषण आवश्यकताओं को बेहतर तरीके से पूरा करने में सहायक होगी।
पारदर्शिता और क्रियान्वयन व्यवस्था
योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रक्रियाएँ ऑनलाइन की जाएंगी। आवश्यक खरीद GeM पोर्टल के माध्यम से होगी, वित्तीय सहायता DBT पद्धति से दी जाएगी तथा सोशल ऑडिट और थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन भी अनिवार्य रहेगा। यह पूरा व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब आदिवासी क्षेत्रों में बाल कुपोषण की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है। 53 नए ICDS ब्लॉकों के समावेश और हाई-फैट पायलट के साथ योजना एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है। अब यह देखना होगा कि जमीनी स्तर पर लाभार्थियों तक दूध की नियमित और गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति किस हद तक सुनिश्चित हो पाती है।