16 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

गुजरात का दूध उत्पादन दो दशकों में 1.25 करोड़ टन बढ़ा, देश का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बना

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
गुजरात का दूध उत्पादन दो दशकों में 1.25 करोड़ टन बढ़ा, देश का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बना

सारांश

दो दशकों में 9.3 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर के साथ गुजरात ने 'श्वेत क्रांति 2.0' को साकार किया है। 1.9 करोड़ टन से अधिक उत्पादन और 730 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की उपलब्धता के साथ राज्य देश का चौथा सबसे बड़ा दूध उत्पादक बन गया है — और अमूल AI जैसी तकनीक से अगला अध्याय लिखने की तैयारी है।

मुख्य बातें

गुजरात ने पिछले दो दशकों में वार्षिक दूध उत्पादन में 1.25 करोड़ टन की वृद्धि दर्ज की; राज्य अब देश का चौथा सबसे बड़ा दूध उत्पादक है।
राज्य का कुल वार्षिक उत्पादन 1.9 करोड़ टन से अधिक — राष्ट्रीय उत्पादन का 7.78 प्रतिशत ।
प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 730 ग्राम/दिन , राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम/दिन से काफी अधिक।
भारत 1998 से विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक; वार्षिक उत्पादन लगभग 24.7 करोड़ टन , वैश्विक हिस्सेदारी 25 प्रतिशत ।
अमूल ने फरवरी 2026 में 'अमूल AI' प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जो 36 लाख से अधिक किसानों को AI सहायता देता है।
लिंग-निर्धारित वीर्य तकनीक की सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक ; IVF अपनाने वाले किसानों को सब्सिडी।

गुजरात ने पिछले दो दशकों में वार्षिक दूध उत्पादन में 1.25 करोड़ टन की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जिससे यह राज्य देश का चौथा सबसे बड़ा दूध उत्पादक बन गया है। अधिकारियों ने इस उपलब्धि को 'श्वेत क्रांति 2.0' की संज्ञा दी है। ये आँकड़े 1 जून को मनाए जाने वाले विश्व दुग्ध दिवस से पहले जारी किए गए।

गुजरात का दूध उत्पादन: मुख्य आँकड़े

राज्य का वार्षिक दूध उत्पादन अब 1.9 करोड़ टन से अधिक हो गया है, जो राष्ट्रीय कुल उत्पादन का 7.78 प्रतिशत है। पिछले 20 वर्षों में गुजरात की औसत वार्षिक वृद्धि दर 9.3 प्रतिशत रही है — जो राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता के मामले में भी राज्य आगे है: पिछले एक दशक में यह 48 प्रतिशत बढ़कर 730 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जबकि राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम प्रतिदिन है।

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: भारत की डेयरी ताकत

भारत 1998 से लगातार विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है। देश में अब प्रतिवर्ष लगभग 24.7 करोड़ टन दूध का उत्पादन होता है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है। आँकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में राष्ट्रीय दूध उत्पादन में 69 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह 5.5 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। डेयरी क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 5 प्रतिशत का योगदान देता है। यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को लेकर नीतिगत बहस तेज़ है।

पशु चिकित्सा अवसंरचना और सरकारी निवेश

राज्य सरकार के अनुसार, पशु स्वास्थ्य देखभाल, प्रजनन कार्यक्रमों और डेयरी अवसंरचना में निरंतर निवेश इस विकास की नींव रहा है। गुजरात में लगभग 2.75 करोड़ पशुधन की सेवा के लिए 1,137 पशु चिकित्सालय, 564 प्राथमिक पशु उपचार केंद्र और 587 मोबाइल पशु चिकित्सा क्लीनिक कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त 34 बहुउद्देशीय पशु चिकित्सा अस्पताल और 21 पशु रोग जाँच इकाइयाँ भी स्थापित हैं। राज्य भर में 4,710 पंजीकृत पशुचिकित्सक स्वास्थ्य देखभाल और रोग प्रबंधन सेवाएँ दे रहे हैं।

प्रजनन तकनीक: नस्ल सुधार की नई राह

सरकार ने नस्ल और उत्पादकता सुधार के लिए उन्नत प्रजनन तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा दिया है। पशुपालकों को लिंग-निर्धारित वीर्य की खुराकें अत्यधिक रियायती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक की सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक है, जिससे अधिकांश सफल प्रसवों में मादा बछड़े पैदा होते हैं — जो दीर्घकालिक उत्पादन के लिए निर्णायक है। इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक अपनाने वाले किसानों को भी सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

अमूल AI और डिजिटल बदलाव

गौरतलब है कि इसी वर्ष फरवरी में अमूल ने अपना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म 'अमूल AI' लॉन्च किया, जिसमें 'सरलाबेन' नामक AI-आधारित डिजिटल असिस्टेंट को पेश किया गया। यह प्लेटफॉर्म 36 लाख से अधिक किसान दुग्ध उत्पादकों को चौबीसों घंटे पशु स्वास्थ्य, संतुलित पोषण, नस्ल सुधार और सरकारी कल्याण योजनाओं पर मार्गदर्शन देता है। यह कदम डेयरी क्षेत्र में तकनीकी परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में इस प्लेटफॉर्म के विस्तार से ग्रामीण डेयरी किसानों की उत्पादकता में और सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह वृद्धि छोटे और सीमांत पशुपालकों तक पहुँच रही है या केवल बड़े सहकारी ढाँचे को मज़बूत कर रही है। अमूल AI जैसी पहल तकनीकी समावेश का संकेत देती है, पर डिजिटल साक्षरता की खाई को पाटे बिना 36 लाख किसानों तक इसकी पहुँच सीमित रह सकती है। डेयरी GDP योगदान 5 प्रतिशत पर स्थिर है — उत्पादन बढ़ने के बावजूद मूल्य-संवर्धन और प्रसंस्करण क्षमता में निवेश की कमी इस क्षेत्र की दीर्घकालिक सीमा बन सकती है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में दूध उत्पादन में कितनी वृद्धि हुई है?
गुजरात ने पिछले दो दशकों में वार्षिक दूध उत्पादन में 1.25 करोड़ टन की वृद्धि दर्ज की है और राज्य का कुल उत्पादन अब 1.9 करोड़ टन से अधिक हो गया है। राज्य की औसत वार्षिक वृद्धि दर 9.3 प्रतिशत रही है।
गुजरात की प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता राष्ट्रीय औसत से कितनी अधिक है?
गुजरात में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता 730 ग्राम प्रतिदिन है, जबकि राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम प्रतिदिन है। पिछले एक दशक में राज्य में यह उपलब्धता 48 प्रतिशत बढ़ी है।
अमूल AI प्लेटफॉर्म 'सरलाबेन' क्या है और यह किसानों की कैसे मदद करता है?
अमूल ने फरवरी 2026 में 'अमूल AI' प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसमें 'सरलाबेन' नामक AI-आधारित डिजिटल असिस्टेंट है। यह 36 लाख से अधिक किसान दुग्ध उत्पादकों को चौबीसों घंटे पशु स्वास्थ्य, पोषण, नस्ल सुधार और सरकारी योजनाओं पर मार्गदर्शन देता है।
भारत विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश कब से है?
भारत 1998 से लगातार विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना हुआ है। देश अब प्रतिवर्ष लगभग 24.7 करोड़ टन दूध का उत्पादन करता है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत है।
गुजरात में पशुपालन को बेहतर बनाने के लिए कौन-सी प्रजनन तकनीकें अपनाई जा रही हैं?
राज्य सरकार पशुपालकों को रियायती दरों पर लिंग-निर्धारित वीर्य उपलब्ध करा रही है, जिसकी सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक अपनाने वाले किसानों को भी सब्सिडी दी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले