बनास डेयरी: प्रतिदिन ₹40 करोड़ सीधे पशुपालकों के खाते में, गुजरात से उठ रही भारत की दुग्ध क्रांति
सारांश
मुख्य बातें
बनासकांठा स्थित बनास डेयरी आज भारत के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक सहकारी संगठनों में अग्रणी स्थान रखती है और प्रतिदिन ₹40 करोड़ से अधिक की राशि सीधे दुग्ध उत्पादक महिलाओं और पशुपालकों के बैंक खातों में हस्तांतरित करती है। 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर संगठन के पशुपालकों में विशेष उत्साह देखा गया, जो किसान क्रेडिट कार्ड, पशु बीमा और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी सुविधाओं के बल पर आत्मनिर्भरता की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
बनास डेयरी का विस्तार और योगदान
बनासकांठा की यह सहकारी संस्था अब केवल गुजरात तक सीमित नहीं रही — यह पूरे देश में दूध उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है। यहाँ के पशुपालक दूध बेचकर अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं। इसके साथ ही गोबर गैस और जैविक खाद के उपयोग से रासायनिक खाद पर निर्भरता घट रही है, और किसान जैविक खेती के ज़रिए अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं।
संस्था पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ आधुनिक पशुपालन प्रशिक्षण, उन्नत नस्लों की उपलब्धता, चारे की बेहतर व्यवस्था और विपणन सुविधा भी मुहैया करा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और अनेक महिला स्वयं सहायता समूह डेयरी से जुड़कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।
पशुपालकों की आवाज़: ज़मीनी बदलाव
महिला पशुपालक नयनाबेन चौधरी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'सरकार ने पशुपालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी है। पहले नया पशु खरीदने या चारे के लिए ऊँचे ब्याज पर कर्ज़ लेना पड़ता था। अब आसानी से लोन मिल जाता है।'
उन्होंने आगे बताया, 'पहले दूध का पैसा मिलने में हफ्तों लग जाते थे, लेकिन अब डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर से पैसा सीधे खाते में आ जाता है। बनास डेयरी से बोनस भी मिलता है। पशु बीमा योजना के तहत अगर कोई नुकसान होता है तो मुआवज़ा भी तुरंत मिल जाता है।' यह बयान उस व्यापक बदलाव की तस्वीर पेश करता है जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक जीवन में आया है।
चेयरमैन शंकर चौधरी का दृष्टिकोण
बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी ने विश्व दुग्ध दिवस पर कहा, 'भारत विश्व का सबसे बड़ा डेयरी देश बनने जा रहा है। दुनिया में सबसे ज़्यादा गाय-भैंस भारत में हैं। केंद्र सरकार का डेयरी क्षेत्र पर पूरा फोकस है, जिसकी वजह से यह उद्योग तेज़ी से आगे बढ़ रही है।'
उन्होंने यह भी कहा कि बनास डेयरी द्वारा प्रतिदिन ₹40 करोड़ से अधिक की राशि सीधे पशुपालकों के खातों में भेजना राज्य और केंद्र सरकार की सकारात्मक नीतियों और सहकारिता के सही दृष्टिकोण का परिणाम है। चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सहकारिता मंत्री अमित शाह का विशेष आभार व्यक्त किया।
आम जनता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
बनास डेयरी का प्रभाव केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह संस्था अब पशुपालन-आधारित समग्र विकास का प्रतीक बन गई है। गोबर गैस संयंत्रों से ऊर्जा की उपलब्धता और जैविक खाद से मिट्टी की उर्वरता में सुधार — ये दोनों पहलू किसानों की लागत घटा रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब देश में दूध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और ग्रामीण महिलाओं को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। बनास डेयरी इस दिशा में एक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत कर रही है जिसे देश के अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।
आगे की राह
बनास डेयरी के पशुपालकों ने 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस पर संगठन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और देश को विश्व का अग्रणी डेयरी राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। चेयरमैन चौधरी के अनुसार आने वाले समय में इस क्षेत्र में और बड़ी संभावनाएँ हैं, और सरकारी नीतियों के निरंतर समर्थन से यह उद्योग नई ऊँचाइयाँ छूने की स्थिति में है।