18 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बनास डेयरी: प्रतिदिन ₹40 करोड़ सीधे पशुपालकों के खाते में, गुजरात से उठ रही भारत की दुग्ध क्रांति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बनास डेयरी: प्रतिदिन ₹40 करोड़ सीधे पशुपालकों के खाते में, गुजरात से उठ रही भारत की दुग्ध क्रांति

सारांश

बनासकांठा की बनास डेयरी हर दिन ₹40 करोड़ से ज़्यादा सीधे पशुपालकों के खातों में डालती है — यह सिर्फ दूध का कारोबार नहीं, ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की कहानी है। विश्व दुग्ध दिवस पर यह सहकारी मॉडल पूरे देश के लिए एक व्यावहारिक मिसाल बनकर उभरा है।

मुख्य बातें

बनास डेयरी प्रतिदिन ₹40 करोड़ से अधिक की राशि दुग्ध उत्पादकों के बैंक खातों में सीधे हस्तांतरित करती है।
पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड , पशु बीमा योजना और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की सुविधा मिल रही है।
गोबर गैस और जैविक खाद के उपयोग से रासायनिक खाद पर निर्भरता घट रही है और किसानों की अतिरिक्त आय बढ़ रही है।
चेयरमैन शंकर चौधरी के अनुसार भारत विश्व का सबसे बड़ा डेयरी देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
महिला स्वयं सहायता समूह डेयरी से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति मज़बूत कर रहे हैं।

बनासकांठा स्थित बनास डेयरी आज भारत के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक सहकारी संगठनों में अग्रणी स्थान रखती है और प्रतिदिन ₹40 करोड़ से अधिक की राशि सीधे दुग्ध उत्पादक महिलाओं और पशुपालकों के बैंक खातों में हस्तांतरित करती है। 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर संगठन के पशुपालकों में विशेष उत्साह देखा गया, जो किसान क्रेडिट कार्ड, पशु बीमा और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी सुविधाओं के बल पर आत्मनिर्भरता की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।

बनास डेयरी का विस्तार और योगदान

बनासकांठा की यह सहकारी संस्था अब केवल गुजरात तक सीमित नहीं रही — यह पूरे देश में दूध उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है। यहाँ के पशुपालक दूध बेचकर अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं। इसके साथ ही गोबर गैस और जैविक खाद के उपयोग से रासायनिक खाद पर निर्भरता घट रही है, और किसान जैविक खेती के ज़रिए अतिरिक्त आमदनी अर्जित कर रहे हैं।

संस्था पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य दिलाने के साथ-साथ आधुनिक पशुपालन प्रशिक्षण, उन्नत नस्लों की उपलब्धता, चारे की बेहतर व्यवस्था और विपणन सुविधा भी मुहैया करा रही है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और अनेक महिला स्वयं सहायता समूह डेयरी से जुड़कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

पशुपालकों की आवाज़: ज़मीनी बदलाव

महिला पशुपालक नयनाबेन चौधरी ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'सरकार ने पशुपालकों को भी किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी है। पहले नया पशु खरीदने या चारे के लिए ऊँचे ब्याज पर कर्ज़ लेना पड़ता था। अब आसानी से लोन मिल जाता है।'

उन्होंने आगे बताया, 'पहले दूध का पैसा मिलने में हफ्तों लग जाते थे, लेकिन अब डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर से पैसा सीधे खाते में आ जाता है। बनास डेयरी से बोनस भी मिलता है। पशु बीमा योजना के तहत अगर कोई नुकसान होता है तो मुआवज़ा भी तुरंत मिल जाता है।' यह बयान उस व्यापक बदलाव की तस्वीर पेश करता है जो ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक जीवन में आया है।

चेयरमैन शंकर चौधरी का दृष्टिकोण

बनास डेयरी के चेयरमैन शंकर चौधरी ने विश्व दुग्ध दिवस पर कहा, 'भारत विश्व का सबसे बड़ा डेयरी देश बनने जा रहा है। दुनिया में सबसे ज़्यादा गाय-भैंस भारत में हैं। केंद्र सरकार का डेयरी क्षेत्र पर पूरा फोकस है, जिसकी वजह से यह उद्योग तेज़ी से आगे बढ़ रही है।'

उन्होंने यह भी कहा कि बनास डेयरी द्वारा प्रतिदिन ₹40 करोड़ से अधिक की राशि सीधे पशुपालकों के खातों में भेजना राज्य और केंद्र सरकार की सकारात्मक नीतियों और सहकारिता के सही दृष्टिकोण का परिणाम है। चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सहकारिता मंत्री अमित शाह का विशेष आभार व्यक्त किया।

आम जनता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

बनास डेयरी का प्रभाव केवल दूध उत्पादन तक सीमित नहीं है। यह संस्था अब पशुपालन-आधारित समग्र विकास का प्रतीक बन गई है। गोबर गैस संयंत्रों से ऊर्जा की उपलब्धता और जैविक खाद से मिट्टी की उर्वरता में सुधार — ये दोनों पहलू किसानों की लागत घटा रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देश में दूध उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और ग्रामीण महिलाओं को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। बनास डेयरी इस दिशा में एक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत कर रही है जिसे देश के अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है।

आगे की राह

बनास डेयरी के पशुपालकों ने 1 जून को विश्व दुग्ध दिवस पर संगठन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और देश को विश्व का अग्रणी डेयरी राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया। चेयरमैन चौधरी के अनुसार आने वाले समय में इस क्षेत्र में और बड़ी संभावनाएँ हैं, और सरकारी नीतियों के निरंतर समर्थन से यह उद्योग नई ऊँचाइयाँ छूने की स्थिति में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह लाभ बनासकांठा से आगे उन ज़िलों तक भी पहुँच रहा है जहाँ सहकारी ढाँचा कमज़ोर है। गोबर गैस और जैविक खाद जैसी पहलें टिकाऊ कृषि की दिशा में सही कदम हैं, पर इनका पैमाना और सत्यापन अभी भी स्पष्ट नहीं है। सहकारी डेयरी मॉडल की सफलता तभी पूरी होगी जब इसे देश के पूर्वी और मध्य भारत के पिछड़े पशुपालन क्षेत्रों में भी दोहराया जा सके — जहाँ ऋण, बीमा और बाज़ार तक पहुँच आज भी एक चुनौती बनी हुई है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बनास डेयरी क्या है और यह कहाँ स्थित है?
बनास डेयरी गुजरात के बनासकांठा ज़िले में स्थित भारत के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक सहकारी संगठनों में से एक है। यह संस्था पशुपालकों और किसानों को दूध का उचित मूल्य, प्रशिक्षण और वित्तीय सुविधाएँ प्रदान करती है।
बनास डेयरी प्रतिदिन पशुपालकों को कितनी राशि देती है?
बनास डेयरी प्रतिदिन ₹40 करोड़ से अधिक की राशि सीधे दुग्ध उत्पादक महिलाओं और पशुपालकों के बैंक खातों में डायरेक्ट ट्रांसफर के माध्यम से भेजती है। यह आँकड़ा चेयरमैन शंकर चौधरी ने विश्व दुग्ध दिवस के अवसर पर साझा किया।
पशुपालकों को किसान क्रेडिट कार्ड से क्या फायदा हुआ है?
किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा मिलने से पशुपालकों को नया पशु खरीदने या चारे के लिए अब ऊँचे ब्याज पर कर्ज़ नहीं लेना पड़ता। महिला पशुपालक नयनाबेन चौधरी के अनुसार इससे ऋण प्रक्रिया सरल हुई है और आर्थिक बोझ काफी कम हुआ है।
बनास डेयरी पर्यावरण के लिहाज़ से क्या कदम उठा रही है?
बनास डेयरी के माध्यम से पशुपालक गोबर से गोबर गैस और जैविक खाद तैयार कर रहे हैं, जिससे रासायनिक खाद पर निर्भरता घट रही है। इससे किसान जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं और अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर रहे हैं।
विश्व दुग्ध दिवस पर बनास डेयरी का क्या संदेश रहा?
1 जून को विश्व दुग्ध दिवस पर चेयरमैन शंकर चौधरी ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा डेयरी देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में और बड़ी संभावनाएँ हैं। पशुपालकों ने भी इस अवसर पर डेयरी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले