उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र को मिली नई उड़ान, सरकारी योजनाओं से युवाओं को मिल रहा स्थायी रोजगार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में डेयरी और पशुपालन क्षेत्र सरकारी योजनाओं, सरल ऋण प्रक्रियाओं और तकनीकी नवाचारों की बदौलत तेज़ी से बदल रहा है। 1 जून 2026 को सामने आई ज़मीनी रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षेत्र न केवल पशुपालकों को आर्थिक स्थिरता दे रहा है, बल्कि बड़ी संख्या में युवाओं के लिए एक स्थायी और सम्मानजनक आजीविका का विकल्प भी बन गया है।
पशुपालक की आपबीती: 26 साल की विरासत, अब आधुनिक रूप
बस्ती के पशुपालक हर्ष पटेल का परिवार पिछले 26 वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़ा है। व्यवसाय की नींव उनके पिता ने रखी थी, और अब हर्ष इसे आधुनिक तकनीकों तथा सरकारी योजनाओं के सहयोग से आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं का लाभ उन्हें पहले ही मिल चुका है, जबकि कुछ अन्य योजनाओं के लिए वे प्रयासरत हैं।
हर्ष पटेल के अनुसार, पहले पशुपालन के लिए ऋण लेना बेहद जटिल प्रक्रिया थी — कई तरह की जाँचें, दस्तावेज़ और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताएँ आड़े आती थीं। अब इस प्रक्रिया में उल्लेखनीय सरलता आई है। उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का विशेष उल्लेख किया, जो पहले केवल फसल उत्पादन तक सीमित था, लेकिन अब पशुपालन क्षेत्र को भी वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
भुगतान में पारदर्शिता: 40 दिन से घटकर साप्ताहिक
हर्ष पटेल ने बताया कि सरकारी निगरानी में चलने वाली डेयरी समितियों से जुड़ने का सीधा फायदा पशुपालकों को मिल रहा है। पहले दूध बिक्री का भुगतान लगभग 40 दिनों बाद मिलता था, जो नकदी प्रवाह की गंभीर समस्या पैदा करता था। अब यह भुगतान साप्ताहिक आधार पर सीधे खातों में पहुँच रहा है, जिससे पशुपालकों की वित्तीय स्थिति में सुधार आया है।
उन्होंने दुग्ध उत्पादकों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करने की भी माँग रखी। उनका तर्क है कि जिस तरह फसलों के लिए MSP तय होता है, उसी तर्ज़ पर दूध के लिए भी उचित मूल्य की गारंटी होनी चाहिए।
बीमा योजनाएँ: लाभ भी, शिकायत भी
पशुधन बीमा के मोर्चे पर हर्ष पटेल ने मिली-जुली तस्वीर पेश की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पशुधन बीमा योजनाओं का लाभ पशुपालकों को मिल रहा है। हालाँकि, निजी बीमा कंपनियों द्वारा क्लेम निपटान में अक्सर अनावश्यक बाधाएँ खड़ी की जाती हैं। उनका कहना है कि चूँकि बीमा प्रीमियम सरकार भरती है, इसलिए बीमा कंपनियों को दावों के निपटारे में सख्ती बरती जानी चाहिए और सरकार को इस दिशा में हस्तक्षेप करना चाहिए।
ज़िले में डेयरी क्षेत्र का ताज़ा आँकड़ा
डेयरी अधिकारी सुधाकर प्रसाद के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए कई प्रभावी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि बस्ती जिले में वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 20,000 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है।
जिले में 270 डेयरी समितियाँ सक्रिय हैं, जिनसे लगभग 7,250 सदस्य जुड़े हैं। इनमें 1,200 महिलाएँ सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। समितियों के कंप्यूटरीकरण और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था लागू होने से भुगतान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनी है।
युवाओं का रुझान और आगे की राह
हर्ष पटेल ने कहा कि एक समय पशुपालन को समाज में हीन दृष्टि से देखा जाता था, लेकिन आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रबंधन ने इस धारणा को बदल दिया है। अब यह एक सम्मानजनक और लाभदायक व्यवसाय के रूप में स्थापित हो रहा है और बड़ी संख्या में युवा इसे स्थायी आजीविका के रूप में अपना रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण बेरोज़गारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दूध उत्पादक राज्य है, और इस क्षेत्र में नीतिगत सुधारों की दिशा में यह ज़मीनी बदलाव आने वाले वर्षों में और व्यापक असर दिखा सकता है।