राजनाथ सिंह का वडोदरा में ऐलान: रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ पर, क्षेत्रीय उद्योग 'विकसित भारत' की रीढ़
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 30 जून 2026 को वडोदरा में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में क्षेत्रीय उद्योगों की भागीदारी अपरिहार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'विकसित भारत' महज आर्थिक प्रगति का नारा नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती, तकनीकी सक्षमता और सामाजिक सशक्तिकरण के त्रिस्तंभीय संकल्प का नाम है।
मुख्य घटनाक्रम
इस सम्मेलन में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह और गुजरात सरकार की महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में उद्योगपति, उद्यमी, युवा इनोवेटर्स और शिक्षाविद शामिल हुए। राजनाथ सिंह ने डिफेंस और एयरोस्पेस उद्योग के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया और निजी उद्योगों, एमएसएमई तथा स्टार्टअप्स की भूमिका की सराहना की।
रक्षा उत्पादन और निर्यात में ऐतिहासिक उछाल
राजनाथ सिंह ने बताया कि देश का रक्षा उत्पादन वर्ष 2014 में लगभग ₹46,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर रिकॉर्ड ₹1.78 लाख करोड़ तक पहुँच गया है। इसी तरह रक्षा निर्यात ₹1,000 करोड़ से कम के स्तर से उछलकर ₹38,424 करोड़ के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच चुका है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी प्लेटफॉर्म, निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी और स्टार्टअप्स के योगदान ने देश में एक सशक्त रक्षा इकोसिस्टम तैयार किया है।
गुजरात की औद्योगिक भूमिका
रक्षा मंत्री ने गुजरात की औद्योगिक क्षमता की विशेष सराहना करते हुए कहा कि राज्य रक्षा उत्पादन और तकनीकी विकास का बड़ा केंद्र बनने की पूरी क्षमता रखता है। उन्होंने वडोदरा में टाटा-एयरबस के सी-295 परिवहन विमान निर्माण केंद्र और गुजरात में तैयार हो रही के-9 वज्र स्वचालित तोप प्रणाली का उल्लेख किया। उनके अनुसार, गुजरात का रसायन, पेट्रोकेमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, बंदरगाह और जहाज निर्माण क्षेत्र रक्षा उद्योग को नई दिशा दे सकता है।
सेमीकंडक्टर और भविष्य की तकनीक
राजनाथ सिंह ने कहा कि साणंद और धोलेरा में विकसित हो रहा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की नींव बनेगा। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्रों में गुजरात की केंद्रीय भूमिका की बात की। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
आत्मनिर्भरता और वैश्विक साझेदारी
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का अर्थ वैश्विक अलगाव नहीं है — इसका मतलब है कि भारत अपनी क्षमताओं के बल पर वैश्विक साझेदारों के साथ बराबरी के स्तर पर सहयोग करे। उन्होंने बताया कि सरकार विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी हस्तांतरण, संयुक्त उपक्रम और सहयोग को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है। गौरतलब है कि मेक इन इंडिया, आईडेक्स, सृजन पोर्टल और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड जैसी पहलों के जरिए एमएसएमई और स्टार्टअप्स को पहले से ही प्रोत्साहित किया जा रहा है।
गौरतलब है कि वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट की शुरुआत 2003 में हुई थी और आज यह व्यापार, निवेश, ज्ञान साझेदारी और सतत विकास के वैश्विक मंचों में प्रमुख स्थान रखता है। इसी मॉडल के तहत गुजरात सरकार क्षेत्रीय सम्मेलनों का आयोजन कर रही है, जिनका उद्देश्य स्थानीय क्षमताओं को विकसित भारत 2047 और विकसित गुजरात 2047 के लक्ष्य से जोड़ना है। आने वाले वर्षों में गुजरात के युवा और उद्यमी इस राष्ट्रीय संकल्प में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।