21 अक्टूबर 2026
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कोलकाता भगदड़: चोरबागान पंडाल में 19 मौतों के बाद प्रतिमा विसर्जन अधर में, जांच पूरी होने का इंतजार

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कोलकाता भगदड़: चोरबागान पंडाल में 19 मौतों के बाद प्रतिमा विसर्जन अधर में, जांच पूरी होने का इंतजार

सारांश

कोलकाता के चोरबागान पंडाल में 17 अक्टूबर की रात 19 लोगों की जान लेने वाली भगदड़ के बाद विजयादशमी पर भी यहाँ की मूर्तियाँ अधर में हैं — प्रशासनिक रोक, आयोजकों की गिरफ्तारी और दोहरी जांच प्रक्रिया ने उत्सव के इस अंतिम पड़ाव को भी अनिश्चित बना दिया है।

मुख्य बातें

17 अक्टूबर 2026 की रात चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत हुई।
प्रशासन के निर्देश के अनुसार जांच पूरी होने तक पंडाल में मूर्तियों को छूने या हटाने पर रोक , जिससे भौतिक विसर्जन अनिश्चित।
समिति के उपाध्यक्ष शांतनु दुबे और सचिव राज कुमार सेवड़ा को 18 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया; अन्य आयोजक भी पंडाल से गायब।
कोलकाता पुलिस SIT और कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग — दोहरी जांच जारी।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिजनों को ₹25 लाख और घायलों को ₹5 लाख मुआवजे की घोषणा की; स्वयं चेक सौंप रहे।
पवित्र कलश का प्रतीकात्मक विसर्जन बुधवार दोपहर संपन्न; मूर्तियों का भौतिक विसर्जन अभी भी अनिर्धारित।

कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में प्रतिमा विसर्जन को लेकर 21 अक्टूबर 2026 को गहरी अनिश्चितता बनी हुई है — यह वही पंडाल है जहाँ 17 अक्टूबर की रात हुई भगदड़ में 19 लोगों की जान चली गई थी। विजयादशमी पर शहर भर में प्रतिमा विसर्जन शुरू हो जाने के बावजूद, प्रशासन के सख्त निर्देशों ने इस पंडाल की मूर्तियों को फिलहाल अछूता रखने का आदेश दिया है।

प्रशासनिक रोक — जांच पूरी होने तक हाथ न लगाएं

प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि चोरबागान सर्वजनिन पंडाल के भीतर किसी भी वस्तु — यहाँ तक कि मूर्तियों — को तब तक छुआ या हटाया नहीं जा सकता, जब तक त्रासदी की जांच संपन्न नहीं हो जाती। चूंकि भौतिक विसर्जन के लिए मूर्तियों को हटाना अनिवार्य है, यह अनिश्चित बना हुआ है कि जांच कब पूरी होगी और विसर्जन की प्रक्रिया कब शुरू हो सकेगी।

बुधवार दोपहर देवी दुर्गा के प्रतीक पवित्र कलश का प्रतीकात्मक विसर्जन अवश्य संपन्न हो गया। किंतु मूर्तियों का भौतिक विसर्जन अभी भी अनिश्चितकाल के लिए टला हुआ है।

आयोजन समिति की अनुपस्थिति — कौन करेगा विसर्जन?

चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा समिति के उपाध्यक्ष शांतनु दुबे और सचिव राज कुमार सेवड़ा (उर्फ राजा) को 18 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, और वे तब से न्यायिक हिरासत में हैं। इन दोनों प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद से समिति के अन्य वरिष्ठ सदस्य भी पंडाल के आसपास कहीं दिखाई नहीं दिए।

एक स्थानीय निवासी के अनुसार, 'या तो घबराहट के कारण या पश्चाताप के कारण, आयोजन समिति के अन्य प्रमुख चेहरे पूजा के शेष दिनों में कहीं नज़र नहीं आए।' ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा है कि यदि प्रशासन विसर्जन की अनुमति दे भी दे, तो उस प्रक्रिया की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।

दोहरी जांच — SIT और न्यायिक आयोग

कोलकाता पुलिस की एक विशेष जांच टीम (SIT) ने 17 अक्टूबर की रात की भगदड़ की जांच पहले ही शुरू कर दी है। इसके समानांतर, कलकत्ता हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग भी गठित किया गया है, जो इस त्रासदी की अलग जांच करेगा। यह दोहरी जांच प्रक्रिया दर्शाती है कि राज्य सरकार पर जवाबदेही का दबाव कितना गहरा है।

मुआवजा और मुख्यमंत्री का दौरा

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए ₹25 लाख और घायलों के लिए ₹5 लाख के मुआवजे की घोषणा पहले ही कर दी थी। मंगलवार से मुख्यमंत्री स्वयं मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें मुआवजे के चेक सौंप रहे हैं।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा उत्सव का समापन उत्साह और उमंग के साथ होना था, लेकिन इस साल चोरबागान की त्रासदी ने पूरे उत्सव पर गहरी छाया डाल दी है। गौरतलब है कि यह राज्य में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई हाल के वर्षों की सबसे बड़ी भगदड़ है। जब तक SIT और न्यायिक आयोग अपनी जांच पूरी नहीं करते, तब तक चोरबागान सर्वजनिन पंडाल की मूर्तियों का भविष्य अनिश्चित बना रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली जवाबदेही का परीक्षण दो जांचों के निष्कर्षों से होगा। जब आयोजक जेल में हों और बाकी सदस्य गायब हों, तो यह सवाल भी उठता है कि भविष्य में ऐसे बड़े सामुदायिक आयोजनों के लिए लाइसेंसिंग और भीड़-सीमा के नियम कितने सख्त और पारदर्शी होंगे।
RashtraPress
21 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चोरबागान पूजा पंडाल में भगदड़ कब और कैसे हुई?
17 अक्टूबर 2026 की रात कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में भगदड़ हुई, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई। भारी भीड़ के बीच नियंत्रण खोने से यह हादसा हुआ बताया जा रहा है।
चोरबागान पंडाल में प्रतिमा विसर्जन क्यों नहीं हो पा रहा?
प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि भगदड़ की जांच पूरी होने तक पंडाल के अंदर मूर्तियों सहित किसी भी वस्तु को छुआ या हटाया नहीं जा सकता। चूंकि भौतिक विसर्जन के लिए मूर्तियों को हटाना जरूरी है, इसलिए जांच पूरी होने तक विसर्जन संभव नहीं है।
चोरबागान भगदड़ में गिरफ्तार आयोजक कौन हैं?
चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा समिति के उपाध्यक्ष शांतनु दुबे और सचिव राज कुमार सेवड़ा (उर्फ राजा) को 18 अक्टूबर को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। दोनों तब से न्यायिक हिरासत में हैं।
इस मामले में कौन-सी जांच चल रही हैं?
कोलकाता पुलिस की एक विशेष जांच टीम (SIT) मामले की जांच कर रही है। इसके साथ ही कलकत्ता हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग भी अलग से जांच करेगा।
पीड़ितों के परिजनों को कितना मुआवजा मिलेगा?
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने मृतकों के परिजनों के लिए ₹25 लाख और घायलों के लिए ₹5 लाख मुआवजे की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मंगलवार से स्वयं परिजनों से मिलकर मुआवजे के चेक सौंप रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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