कोलकाता भगदड़: चोरबागान पंडाल में 19 मौतों के बाद प्रतिमा विसर्जन अधर में, जांच पूरी होने का इंतजार
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में प्रतिमा विसर्जन को लेकर 21 अक्टूबर 2026 को गहरी अनिश्चितता बनी हुई है — यह वही पंडाल है जहाँ 17 अक्टूबर की रात हुई भगदड़ में 19 लोगों की जान चली गई थी। विजयादशमी पर शहर भर में प्रतिमा विसर्जन शुरू हो जाने के बावजूद, प्रशासन के सख्त निर्देशों ने इस पंडाल की मूर्तियों को फिलहाल अछूता रखने का आदेश दिया है।
प्रशासनिक रोक — जांच पूरी होने तक हाथ न लगाएं
प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश हैं कि चोरबागान सर्वजनिन पंडाल के भीतर किसी भी वस्तु — यहाँ तक कि मूर्तियों — को तब तक छुआ या हटाया नहीं जा सकता, जब तक त्रासदी की जांच संपन्न नहीं हो जाती। चूंकि भौतिक विसर्जन के लिए मूर्तियों को हटाना अनिवार्य है, यह अनिश्चित बना हुआ है कि जांच कब पूरी होगी और विसर्जन की प्रक्रिया कब शुरू हो सकेगी।
बुधवार दोपहर देवी दुर्गा के प्रतीक पवित्र कलश का प्रतीकात्मक विसर्जन अवश्य संपन्न हो गया। किंतु मूर्तियों का भौतिक विसर्जन अभी भी अनिश्चितकाल के लिए टला हुआ है।
आयोजन समिति की अनुपस्थिति — कौन करेगा विसर्जन?
चोरबागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा समिति के उपाध्यक्ष शांतनु दुबे और सचिव राज कुमार सेवड़ा (उर्फ राजा) को 18 अक्टूबर की सुबह पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, और वे तब से न्यायिक हिरासत में हैं। इन दोनों प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद से समिति के अन्य वरिष्ठ सदस्य भी पंडाल के आसपास कहीं दिखाई नहीं दिए।
एक स्थानीय निवासी के अनुसार, 'या तो घबराहट के कारण या पश्चाताप के कारण, आयोजन समिति के अन्य प्रमुख चेहरे पूजा के शेष दिनों में कहीं नज़र नहीं आए।' ऐसे में एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा है कि यदि प्रशासन विसर्जन की अनुमति दे भी दे, तो उस प्रक्रिया की जिम्मेदारी कौन उठाएगा।
दोहरी जांच — SIT और न्यायिक आयोग
कोलकाता पुलिस की एक विशेष जांच टीम (SIT) ने 17 अक्टूबर की रात की भगदड़ की जांच पहले ही शुरू कर दी है। इसके समानांतर, कलकत्ता हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र न्यायिक जांच आयोग भी गठित किया गया है, जो इस त्रासदी की अलग जांच करेगा। यह दोहरी जांच प्रक्रिया दर्शाती है कि राज्य सरकार पर जवाबदेही का दबाव कितना गहरा है।
मुआवजा और मुख्यमंत्री का दौरा
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भगदड़ में मारे गए लोगों के परिजनों के लिए ₹25 लाख और घायलों के लिए ₹5 लाख के मुआवजे की घोषणा पहले ही कर दी थी। मंगलवार से मुख्यमंत्री स्वयं मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें मुआवजे के चेक सौंप रहे हैं।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा उत्सव का समापन उत्साह और उमंग के साथ होना था, लेकिन इस साल चोरबागान की त्रासदी ने पूरे उत्सव पर गहरी छाया डाल दी है। गौरतलब है कि यह राज्य में दुर्गा पूजा पंडाल में हुई हाल के वर्षों की सबसे बड़ी भगदड़ है। जब तक SIT और न्यायिक आयोग अपनी जांच पूरी नहीं करते, तब तक चोरबागान सर्वजनिन पंडाल की मूर्तियों का भविष्य अनिश्चित बना रहेगा।