कोलकाता भगदड़: पीड़ित परिवारों को ₹25 लाख मुआवजा, एसआईटी जांच का ऐलान; 12 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 18 अक्टूबर 2026 को उत्तर कोलकाता के चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में जान गंवाने वाले प्रत्येक पीड़ित के परिवार को ₹25 लाख मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देने की घोषणा की। इस दुखद हादसे में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम 25 घायल राज्य के विभिन्न अस्पतालों में उपचाराधीन हैं।
मुआवजा और राहत की घोषणाएँ
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता मेडिकल कॉलेज में मृतकों और घायलों के परिजनों से मुलाकात के बाद शनिवार रात लगभग 1 बजे घटनास्थल मुक्तारामबाबू स्ट्रीट का निरीक्षण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक घायल को ₹5 लाख की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी और उनकी पसंद के किसी भी अस्पताल में इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।
इसके अलावा, राज्य सरकार ने हेल्पलाइन नंबर 1800 345 5678 जारी किया है, जिस पर पीड़ित परिवार संपर्क कर सकते हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और पुलिस कमिश्नर मिलकर स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं।
एसआईटी जांच और जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने घटना की निष्पक्ष जाँच के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित करने की घोषणा की। उन्होंने बताया, 'एसआईटी में एसटीएफ, सीआईडी और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।' यह ऐसे समय में आया है जब पुलिस ने आयोजकों और स्वयंसेवकों समेत 12 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
रविवार को फॉरेंसिक टीम ने मुक्तारामबाबू स्ट्रीट स्थित चोरबगान सार्वजनीन दुर्गा पूजा पंडाल का मुआयना किया। जाँचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि भगदड़ किन परिस्थितियों में शुरू हुई।
केंद्र की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगदड़ में जान गंवाने वाले प्रत्येक परिवार को ₹2 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की और एक्स पर शोकसंतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी दुख प्रकट करते हुए इस घटना को 'दिल दहला देने वाली' बताया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के संपर्क में हैं। गौरतलब है कि यह हादसा दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान हुआ, जो पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा सार्वजनिक आयोजन माना जाता है।
आम जनता पर असर
इस हादसे ने पूरे राज्य में पूजा पंडालों की भीड़-प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर वर्ष कोलकाता में लाखों श्रद्धालु दुर्गा पूजा पंडालों में उमड़ते हैं और आलोचकों का कहना है कि भीड़-नियंत्रण के उचित इंतज़ाम अक्सर नदारद रहते हैं।
यह पश्चिम बंगाल में हाल के वर्षों में पूजा पंडाल से जुड़ी सबसे घातक दुर्घटना बताई जा रही है। राज्य सरकार पर दबाव है कि वह न केवल मुआवजा सुनिश्चित करे, बल्कि आने वाले वर्षों में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस प्रणाली भी विकसित करे।
क्या होगा आगे
एसआईटी की गठन प्रक्रिया शुरू हो गई है और जाँच रिपोर्ट आने के बाद आयोजकों की कानूनी जवाबदेही तय की जाएगी। 12 हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि बड़े पूजा पंडालों के लिए अनुमति और भीड़-प्रबंधन नियमों की समीक्षा की जाएगी।