18 अक्टूबर 2026
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कोलकाता भगदड़: चोरबागान पंडाल में 19 की मौत, परिजनों ने पूजा कमेटी पर लगाया लापरवाही का आरोप

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कोलकाता भगदड़: चोरबागान पंडाल में 19 की मौत, परिजनों ने पूजा कमेटी पर लगाया लापरवाही का आरोप

सारांश

दुर्गा पूजा के उत्सव का उल्लास मातम में बदल गया — कोलकाता के चोरबागान पंडाल में भगदड़ ने 19 जिंदगियाँ छीन लीं। निकास द्वार ढहा, भीड़ बेकाबू हुई और परिजन अस्पताल में सफेद चादर उठाते रहे। SIT जाँच शुरू, लेकिन सवाल वही है — त्योहारी भीड़ में सुरक्षा किसकी जिम्मेदारी है?

मुख्य बातें

कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गापूजा पंडाल में शनिवार शाम मची भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत हो गई।
पंडाल का निकास द्वार का एक हिस्सा गिरने के बाद भीड़ में अफरा-तफरी मची।
मृतकों में उत्तर हावड़ा के 64 वर्षीय विकास भट्टाचार्य भी शामिल हैं; 25 से अधिक घायल अस्पताल में भर्ती।
पुलिस ने आयोजकों-स्वयंसेवकों सहित 12 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रत्येक मृतक परिवार को ₹25 लाख मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देने की घोषणा की।
घटना की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (SIT) गठित; फोरेंसिक टीम ने मुक्तरमबाबू स्ट्रीट पर निरीक्षण किया।

उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गापूजा पंडाल में शनिवार शाम मची भगदड़ में 19 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 25 से अधिक लोग घायल हो गए। निकास द्वार का एक हिस्सा ढहने के बाद मची अफरा-तफरी के बाद यह हादसा हुआ, जिसमें मृतकों में उत्तर हावड़ा के सलकिया निवासी 64 वर्षीय विकास भट्टाचार्य भी शामिल हैं। रविवार, 18 अक्टूबर 2026 तक मृतकों की कुल संख्या 19 हो गई।

हादसे का घटनाक्रम

शनिवार दोपहर साढ़े तीन बजे विकास भट्टाचार्य अकेले अपने घर से उत्तर कोलकाता के पंडालों के दर्शन के लिए निकले थे। परिजनों के अनुसार उन्हें हर साल इस तरह अकेले दुर्गा पूजा के पंडाल घूमने का शौक था। शाम को पुलिस ने उनके भाई तापस भट्टाचार्य को तबीयत खराब होने की सूचना दी। तापस जब कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुँचे, तो उन्हें अपने भाई का निर्जीव शरीर सफेद चादर में लिपटा मिला।

पंडाल के निकास द्वार का एक हिस्सा गिरने के बाद श्रद्धालुओं में भगदड़ मच गई। घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल तथा दो अन्य सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अस्पताल में लगभग 17 लोगों को मृत घोषित किया गया, जबकि एक घायल की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।

परिजनों के आरोप और कथित लापरवाही

तापस भट्टाचार्य ने पूजा कमेटी पर कथित लापरवाही का सीधा आरोप लगाया है। उनके अनुसार, बारिश के दौरान पंडाल में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। उन्होंने बताया कि प्रवेश और निकास के रास्ते बेहद संकरे थे और पंडाल के अंदर पर्याप्त रोशनी की भी व्यवस्था नहीं थी। तापस ने माँग की कि घटना की निष्पक्ष जाँच हो और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।

गौरतलब है कि भीड़-भाड़ वाले धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा उपायों की अनदेखी का यह कोई पहला मामला नहीं है। यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब दुर्गा पूजा के उत्सव अपने चरम पर थे और पंडालों में लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ रहे थे।

पुलिस कार्रवाई और जाँच

पुलिस ने इस मामले में आयोजकों, स्वयंसेवकों और अन्य व्यक्तियों सहित 12 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। रविवार को एक फोरेंसिक टीम उत्तरी कोलकाता की मुक्तरमबाबू स्ट्रीट पर पहुँची, जहाँ यह दर्दनाक हादसा हुआ था। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि राज्य सरकार प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹25 लाख मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देगी। उन्होंने पूरे मामले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) गठित करने की भी घोषणा की है।

आगे क्या होगा

SIT की जाँच में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भीड़ प्रबंधन में कहाँ चूक हुई और किन अधिकारियों की जवाबदेही बनती है। फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर पूजा कमेटी के विरुद्ध औपचारिक मामला दर्ज किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस हादसे ने एक बार फिर बड़े सार्वजनिक धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की माँग को तेज़ कर दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि व्यवस्थागत लापरवाही की कहानी सुनाती हैं — संकरे निकास मार्ग, अपर्याप्त रोशनी और बारिश के बावजूद अनियंत्रित भीड़। यह पहली बार नहीं है जब धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की विफलता ने जानें ली हों। ₹25 लाख मुआवजा और SIT की घोषणा राजनीतिक दृष्टि से ज़रूरी कदम है, लेकिन असली सवाल यह है कि आयोजन से पहले सुरक्षा ऑडिट क्यों नहीं हुआ। जब तक पंडाल अनुमति और भीड़ सीमा पर कड़ा नियामक ढाँचा नहीं बनता, ऐसी त्रासदियाँ हर उत्सव पर एक अनकहा खतरा बनी रहेंगी।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता के चोरबागान पंडाल में भगदड़ कैसे हुई?
बारिश के दौरान पंडाल में दर्शनार्थियों की भारी भीड़ जमा थी और निकास द्वार का एक हिस्सा गिर गया, जिससे श्रद्धालुओं में अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ हो गई। संकरे प्रवेश-निकास मार्ग और अपर्याप्त रोशनी को भी हादसे का कारण बताया जा रहा है।
कोलकाता भगदड़ में कितने लोगों की मौत हुई?
रविवार 18 अक्टूबर 2026 तक इस भगदड़ में मृतकों की संख्या 19 हो गई। कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में लगभग 17 लोगों को मृत घोषित किया गया था, और 25 से अधिक घायलों को तीन सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने आयोजकों, स्वयंसेवकों और अन्य व्यक्तियों सहित 12 लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। रविवार को एक फोरेंसिक टीम ने मुक्तरमबाबू स्ट्रीट पर घटनास्थल का निरीक्षण भी किया।
मृतकों के परिवारों को क्या मुआवजा मिलेगा?
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि राज्य सरकार प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹25 लाख मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देगी। इसके साथ ही पूरे मामले की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) भी गठित किया गया है।
परिजनों ने पूजा कमेटी पर क्या आरोप लगाए हैं?
मृतक विकास भट्टाचार्य के भाई तापस भट्टाचार्य ने पूजा कमेटी पर कथित लापरवाही का आरोप लगाते हुए माँग की है कि निष्पक्ष जाँच हो और जिम्मेदार लोगों को सजा मिले। उनका कहना है कि संकरे निकास मार्ग, भारी भीड़ और अपर्याप्त रोशनी इस हादसे के मुख्य कारण थे।
राष्ट्र प्रेस
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