कोलकाता भगदड़: चश्मदीद प्रेम गुप्ता बोले — पहले से थी आशंका, प्रशासन ने नहीं सुनी बात
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता के चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल के निकट 18 अक्टूबर 2026 को दुर्गा पूजा के दौरान मची भगदड़ में एक व्यक्ति की जान चली गई और कई अन्य घायल हुए। घटनास्थल के पास रहने वाले प्रत्यक्षदर्शी प्रेम गुप्ता ने खुलासा किया कि उन्हें इस हादसे की आशंका दो दिन पहले ही हो गई थी और उन्होंने पूजा कमेटी को आगाह भी किया था, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
घटनाक्रम: कैसे मची भगदड़
प्रेम गुप्ता के अनुसार, उस रात बारिश हो रही थी। बाहर खड़ी भीड़ भीगने से बचने के लिए एक साथ पंडाल के अंदर घुसने लगी, जबकि अंदर पहले से ही भारी भीड़ मौजूद थी। उन्होंने बताया, 'उस समय बारिश भी हो रही थी। बाहर खड़ी भीड़ एक ही जगह पर इकट्ठा हो गई थी। सभी लोग सज-संवरकर आए थे — किसी का मेकअप खराब न हो, किसी के कपड़े न भीगें, इसका ध्यान रख रहे थे।'
अंदर से लोग बाहर निकलना चाहते थे, मगर बाहर से धक्का-मुक्की करते हुए घुसती भीड़ के कारण उन्हें रास्ता नहीं मिला। इस आमने-सामने के टकराव ने भगदड़ को जन्म दिया। पंडाल के लाउडस्पीकरों पर लगातार घोषणाएँ हो रही थीं कि लोग बाहर निकलें, लेकिन तब तक हादसा हो चुका था।
पहले से दी थी चेतावनी
प्रेम गुप्ता ने बताया कि यह समस्या पिछले तीन दिनों से चली आ रही थी। उन्होंने कहा, 'मुझे परसों ही आशंका हो गई थी। मैंने पूजा कमेटी के सभी लोगों से कहा था कि आप लोग मिलकर बैठक करो। प्रशासन को बुलाओ, लोकल लड़कों और वालंटियर्स को बुलाओ और सब मिलकर चर्चा करो कि इस भीड़ को कैसे संभालना है।' उन्होंने स्थानीय निवासी के रूप में खुद भी लोगों को समझाने की कोशिश की — 'भैया आराम से जाइए, डेढ़-दो सौ लोग जब तक बाहर नहीं निकलेंगे, तब तक आप अंदर नहीं जा सकते — लेकिन कोई सुनने को तैयार ही नहीं था।'
प्रशासन और जनता — दोनों पर उठे सवाल
गुप्ता ने भीड़ नियंत्रण की विफलता के लिए जनता और प्रशासन दोनों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि लोग पुलिस के बैरिकेड हटा रहे थे, रस्सियाँ तोड़ रहे थे और जबरदस्ती अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे। उनके शब्दों में, 'प्रशासन अगर तत्पर रहता तो यह घटना नहीं घटती। सभी लोग अपनी नौकरी और अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलने को तैयार नहीं थे। किसी ने ध्यान नहीं दिया।'
उन्होंने श्रद्धालुओं की लापरवाही पर भी चिंता जताई — 'जब आप इतनी बड़ी पूजा देखने आ रहे हैं और जानते हैं कि वहां भारी भीड़ है, तो आपको थोड़ा संयम दिखाना चाहिए। लोग बच्चों को, अपनी पत्नी को और अपनी माँ को लेकर आ जाते हैं — इतनी भीड़ में उन्हें इस तरह नहीं आना चाहिए।'
पीड़ित परिवार की माँग — पूजा समिति पर हो कार्रवाई
भगदड़ में जान गँवाने वाले एक व्यक्ति के परिजन ने बताया कि उन्हें घटना की सूचना वहाँ मौजूद एक पुलिस अधिकारी ने अपने फोन से कॉल करके दी। परिजन ने कहा, 'वहाँ जाकर करीब से देखने पर मैंने देखा कि शव को ढकने वाली चादर हटी हुई थी और मैंने अपने बड़े भाई को उनके पैरों से पहचाना।' उन्होंने माँग की कि पूजा आयोजन समिति के सदस्यों को गिरफ्तार किया जाए। परिजन ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री बयान दे रहे हैं, लेकिन यदि स्थिति को अधिक सावधानी से संभाला जाता और कड़े कदम उठाए जाते तो यह हादसा टाला जा सकता था।
आगे क्या
घटना के बाद प्रशासनिक जाँच की माँग तेज हो गई है। पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए आवाज उठाई है और पूजा समिति की जवाबदेही तय करने की अपील की है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बड़े सार्वजनिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन की खामियाँ बार-बार सामने आती हैं। अब सवाल यह है कि क्या इस हादसे के बाद पश्चिम बंगाल सरकार भविष्य के पूजा पंडालों के लिए सख्त भीड़ नियंत्रण दिशानिर्देश लागू करेगी।