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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: अमरोहा जिले की 4 सीटों पर 2022 में भाजपा-सपा में 2-2 की बराबरी, अब किसका पलड़ा भारी?

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यूपी विधानसभा चुनाव 2027: अमरोहा जिले की 4 सीटों पर 2022 में भाजपा-सपा में 2-2 की बराबरी, अब किसका पलड़ा भारी?

सारांश

2022 में अमरोहा जिले की 4 सीटों पर भाजपा और सपा ने 2-2 की बराबरी की थी — लेकिन अमरोहा सीट पर 71,000 से अधिक वोटों का अंतर और हसनपुर में 22,000 का फासला बताता है कि ज़मीनी ताकत एक समान नहीं है। 2027 में यही असमान समीकरण तय करेगा कि बाज़ी किसके हाथ जाती है।

मुख्य बातें

अमरोहा जिले में 4 विधानसभा सीटें हैं — अमरोहा, हसनपुर, धनौरा और नौगावां सादात।
2022 में भाजपा ने धनौरा और हसनपुर, तथा सपा ने नौगावां सादात और अमरोहा जीतकर 2-2 की बराबरी की।
अमरोहा सीट पर सपा के महबूब अली ने 71,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की — जिले की सबसे बड़ी जीत।
हसनपुर में भाजपा के महेंद्र सिंह खड़गवंशी ने 22,000 से अधिक वोटों से सपा को हराया।
धनौरा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है; यहाँ भाजपा के राजीव तरारा विजयी रहे।
जिले का गठन 15 अप्रैल 1997 को मुरादाबाद से अलग करके हुआ था; पहले इसे ज्योतिबा फुले नगर कहा जाता था।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियाँ अभी से रफ्तार पकड़ने लगी हैं। जिले की 4 विधानसभा सीटों — अमरोहा, हसनपुर, धनौरा और नौगावां सादात — पर 2022 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने दो-दो सीटें जीतकर मुकाबले को बराबरी पर छोड़ा था। अब 2027 में यह तस्वीर किस करवट बैठेगी, यह सवाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

अमरोहा जिले की पृष्ठभूमि

15 अप्रैल 1997 को मुरादाबाद जिले से अलग करके अमरोहा जिले का गठन किया गया था। जिले को पहले ज्योतिबा फुले नगर के नाम से जाना जाता था। स्थापना के समय अमरोहा, धनौरा और हसनपुर — तीन तहसीलें बनाई गई थीं। बाद में नौगावां सादात तहसील जोड़े जाने के बाद जिले में अब 4 तहसीलें और 4 विधानसभा क्षेत्र हैं।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाता है जब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट, मुस्लिम, गुर्जर और अनुसूचित जाति समुदायों का मतदान रुझान हर चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता रहा है।

2022 के नतीजे: सीट दर सीट विश्लेषण

धनौरा विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। यहाँ 2022 में भाजपा के राजीव तरारा ने सपा के विवेक सिंह को 11,000 से अधिक वोटों से पराजित किया। तरारा को 1,03,054 मत मिले, जबकि विवेक सिंह 91,629 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के हरपाल सिंह 43,974 मतों के साथ तीसरे और कांग्रेस के समरपाल सिंह महज 1,385 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहे।

नौगावां सादात विधानसभा सीट पर सपा के समरपाल सिंह ने भाजपा के देवेंद्र नागपात को साढ़े छह हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया। समरपाल सिंह को 1,08,497 वोट मिले, जबकि देवेंद्र नागपात 1,01,957 वोट पाकर पीछे रहे। इस सीट पर कुल 12 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें बसपा के शादाब खान तीसरे और कांग्रेस की रेखा रानी चौथे स्थान पर रहीं।

हसनपुर विधानसभा सीट पर भाजपा के महेंद्र सिंह खड़गवंशी ने सपा के मुख्य गुर्जर को 22,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से मात दी। खड़गवंशी के पक्ष में 1,20,135 मत आए, जबकि सपा प्रत्याशी को 97,753 वोट मिले। बसपा के फिरेराम 36,150 मतों के साथ तीसरे रहे। इस सीट पर कुल 14 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।

अमरोहा विधानसभा सीट पर सपा का दबदबा साफ दिखा। सपा के महबूब अली ने 71,000 से अधिक वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें 1,28,735 मत मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी राम सिंह महज 57,699 वोटों तक सिमट गए। बसपा के मोहम्मद नावेद अयाज को 34,585 लोगों ने वोट दिया। इस सीट पर कुल 10 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे।

वर्तमान विधायक और राजनीतिक समीकरण

फिलहाल धनौरा से भाजपा के राजीव तरारा, हसनपुर से भाजपा के महेंद्र सिंह खड़गवंशी, नौगावां सादात से सपा के समरपाल सिंह और अमरोहा से सपा के महबूब अली विधायक के रूप में कार्यरत हैं। गौरतलब है कि अमरोहा में मुस्लिम मतदाताओं की उल्लेखनीय संख्या सपा के लिए पारंपरिक रूप से मज़बूत आधार रही है।

2027 में क्या होगा आगे

2022 के नतीजों को देखें तो हसनपुर और अमरोहा में जीत के अंतर स्पष्ट संकेत देते हैं — भाजपा हसनपुर में मज़बूत है, वहीं अमरोहा सीट पर सपा की पकड़ असाधारण रूप से गहरी है। नौगावां सादात की कड़ी टक्कर और धनौरा की मध्यम जीत के साथ दोनों दल 2027 में इन सीमांत क्षेत्रों को साधने की कोशिश करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जातीय समीकरणों के साथ-साथ स्थानीय विकास का मुद्दा और उम्मीदवार का चेहरा इस बार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 वोटों का अंतर और हसनपुर में 22,000 का फासला दिखाता है कि दोनों दलों की ताकत सीटों में नहीं, मतों में बहुत असमान है। सपा के लिए असली चुनौती यह है कि क्या वह अमरोहा शहर की मुस्लिम बहुल सीट की जीत को बाकी तीन सीटों तक विस्तार दे सकती है। भाजपा के लिए अमरोहा सीट पर 71,000 के घाटे को पाटना लगभग असंभव लक्ष्य है जब तक उम्मीदवार या समीकरण न बदलें। 2027 का असली युद्धक्षेत्र नौगावां सादात होगा जहाँ 2022 में जीत का अंतर मात्र 6,500 वोटों का था।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमरोहा जिले में कितनी विधानसभा सीटें हैं और कौन-कौन सी हैं?
अमरोहा जिले में कुल 4 विधानसभा सीटें हैं — अमरोहा, हसनपुर, धनौरा और नौगावां सादात। धनौरा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है।
2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में अमरोहा जिले का परिणाम क्या रहा?
2022 में भाजपा ने धनौरा और हसनपुर सीटें जीतीं, जबकि सपा ने नौगावां सादात और अमरोहा सीट अपने नाम की। इस तरह दोनों दलों के बीच 2-2 की बराबरी रही।
अमरोहा जिले की किस सीट पर सबसे बड़े अंतर से जीत हुई थी?
अमरोहा सीट पर सपा के महबूब अली ने 71,000 से अधिक वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो जिले की सबसे बड़ी जीत थी। उन्हें 1,28,735 मत मिले जबकि भाजपा के राम सिंह 57,699 वोटों पर रुक गए।
अमरोहा जिले का गठन कब और कैसे हुआ?
अमरोहा जिले का गठन 15 अप्रैल 1997 को मुरादाबाद जिले को विभाजित करके किया गया था। इसे पहले ज्योतिबा फुले नगर के नाम से जाना जाता था और शुरुआत में इसमें तीन तहसीलें थीं।
2027 के यूपी चुनाव में अमरोहा की कौन-सी सीट सबसे निर्णायक होगी?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार नौगावां सादात सीट सबसे प्रतिस्पर्धी रह सकती है, जहाँ 2022 में सपा ने भाजपा को केवल साढ़े छह हजार वोटों से हराया था। यह न्यूनतम अंतर 2027 में इस सीट को दोनों दलों की प्राथमिकता बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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