यूपी में महिलाओं को ₹1 लाख तक ब्याजमुक्त ऋण, 'दीदी' को मिलेगी ₹250 प्रोत्साहन राशि
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ₹1 लाख तक ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की प्रस्तावित योजना पर अमल की तैयारी तेज कर दी है। इस योजना के तहत ऋण आवेदन जमा करने से लेकर उसके पूर्ण भुगतान तक सहायता करने वाली 'दीदियों' को कुल ₹250 की प्रोत्साहन राशि देने का प्रस्ताव है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (UPSRLM) की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक पहुँचाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
योजना का ढाँचा और ऋण की संरचना
प्रस्ताव के अनुसार पात्र महिलाओं को नया कारोबार शुरू करने, मौजूदा व्यवसाय के विस्तार अथवा छोटे उद्यम स्थापित करने के लिए तीन चरणों में ₹1 लाख तक का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाएगा। प्रोत्साहन राशि का वितरण इस प्रकार प्रस्तावित है: आवेदन सफलतापूर्वक जमा होने पर ₹50, ऋण स्वीकृत होने पर ₹50, और ऋण का पूर्ण भुगतान होने पर ₹150 — यानी कुल ₹250 प्रति प्रकरण।
इस व्यवस्था का उद्देश्य उन सहयोगी कैडर को प्रेरित करना है जो जमीनी स्तर पर महिलाओं को प्रक्रिया के हर चरण में मार्गदर्शन देती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण महिला उद्यमिता को नीतिगत प्राथमिकता मिल रही है और केंद्र सरकार की लखपति दीदी योजना के तहत देशभर में स्वयं सहायता समूहों को मज़बूत किया जा रहा है।
मौर्य के निर्देश: पंचायत से ज़िले तक समन्वय
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों से कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, ऋण की उपलब्धता और उसके उचित उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाए। उन्होंने ग्राम पंचायत से लेकर विकास खंड और ज़िला स्तर तक समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया ताकि जानकारी के अभाव में कोई भी पात्र महिला योजना के लाभ से वंचित न रहे।
मौर्य ने यह भी स्पष्ट किया कि महिलाओं को केवल ऋण उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सफल उद्यमी बनाने के लिए प्रशिक्षण, व्यवसाय-चयन, उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, विपणन और बाज़ार से जुड़ाव जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान देना होगा।
किन क्षेत्रों में मिलेगा अवसर
बैठक में यह रेखांकित किया गया कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाएँ खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प, दुग्ध उत्पादन, कृषि-आधारित गतिविधियों और घरेलू उत्पादों से जुड़े कारोबार में ऋण का उपयोग कर सकती हैं। इससे महिलाओं की व्यक्तिगत आमदनी बढ़ने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी व्यापक मज़बूती मिलने की उम्मीद है।
लखपति दीदी लक्ष्य और पारदर्शिता पर जोर
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रदेश में 3 करोड़ दीदियों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने और 1 करोड़ महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाने का लक्ष्य निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने रिवॉल्विंग फंड और सामुदायिक निवेश कोष सहित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने पर बल दिया।
मौर्य ने यह भी निर्देश दिया कि भारत सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट राज्य और केंद्र सरकार के पोर्टलों पर समय से अपलोड की जाए। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी गई। स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का भी प्रस्ताव रखा गया।
यह योजना उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब देखना होगा कि ज़मीनी क्रियान्वयन में यह कितनी तेज़ी और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ती है।