नोएडा रायपुर अग्निकांड: साहिल शर्मा के पिता ने उठाए अग्नि सुरक्षा पर सवाल, कैफे संचालक-ठेकेदार की जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के सेक्टर-126 थाना क्षेत्र के रायपुर गाँव में 24 अक्टूबर 2024 को एक कैफे के फूड स्टॉल पर भड़की आग में 24 वर्षीय साहिल शर्मा की मौत का मामला अब जाँच के दायरे में आ गया है। मृतक के पिता दिलीप चंद ने पुलिस को दी गई शिकायत में कैफे में सुरक्षा इंतजामों की कथित अनदेखी का आरोप लगाया है, जिसके आधार पर 25 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।
हादसे का पूरा घटनाक्रम
24 अक्टूबर को एमिटी कॉलेज के पास स्थित रायपुर गाँव में एक कैफे के फूड स्टॉल पर अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटों ने आसपास की चार अन्य अस्थायी दुकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया। घटना के दौरान छह छोटे गैस सिलेंडर फटने से घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुँचीं और दमकल की छह गाड़ियों की मदद से करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
इसके बाद घटनास्थल पर करीब एक घंटे तक बचाव अभियान चला। इसी दौरान पुलिस को साहिल शर्मा बेहोशी की हालत में मिला। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हादसे में कुल पाँच अस्थायी दुकानें आग से प्रभावित हुईं।
परिवार की शिकायत और आरोप
मृतक के पिता दिलीप चंद ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनका बेटा साहिल शर्मा उस कैफे में निर्माण, फिनिशिंग और बिजली फिटिंग से संबंधित कार्य कर रहा था। उनका आरोप है कि काम के दौरान आवश्यक अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया, जो इस हादसे का कारण बन सकती है। हालाँकि, अधिकारियों के अनुसार आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि जाँच पूरी होने के बाद ही होगी।
दिलीप चंद ने सवाल उठाया है कि यदि कार्यस्थल पर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था, तो इस प्रकार का हादसा कैसे हुआ। उन्होंने माँग की है कि कैफे संचालक, ठेकेदार और निर्माण कार्य से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जाँच की जाए।
पुलिस की कार्रवाई
सेक्टर-126 थाना पुलिस ने 25 अक्टूबर को दर्ज शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। जाँच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कैफे में किस प्रकार का निर्माण कार्य चल रहा था, वहाँ अग्नि सुरक्षा के क्या इंतजाम थे और आग लगने की परिस्थितियाँ क्या थीं। यह भी देखा जाएगा कि क्या कार्यस्थल पर श्रमिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ।
आम जनता और मज़दूर सुरक्षा पर असर
यह हादसा ऐसे समय में सामने आया है जब निर्माण और अस्थायी ढाँचों में कार्यरत मज़दूरों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि कैफे और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फिनिशिंग व बिजली फिटिंग के दौरान अग्नि सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य माना जाता है, लेकिन अक्सर इसकी अनदेखी की जाती है। जाँच के नतीजे न केवल इस मामले में न्याय के लिए बल्कि भविष्य में ऐसे हादसों की रोकथाम के लिए भी अहम साबित होंगे।