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₹37.56 लाख करोड़ के 1,853 इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स: सरकार अब तक ₹17.73 लाख करोड़ कर चुकी है खर्च

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₹37.56 लाख करोड़ के 1,853 इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स: सरकार अब तक ₹17.73 लाख करोड़ कर चुकी है खर्च

सारांश

सरकार के ₹37.56 लाख करोड़ के महाइन्फ्रा अभियान की असली तस्वीर — 1,853 प्रोजेक्ट्स में से आधे से ज़्यादा पैसा खर्च, 654 परियोजनाएँ 80% से अधिक पूर्ण। सड़क मंत्रालय अकेले 53% प्रोजेक्ट्स संभाल रहा है। अब सवाल है — बाकी आधे खर्च में कितनी रफ़्तार बनी रहेगी?

मुख्य बातें

सितंबर 2026 तक 17 मंत्रालयों में 1,853 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुल अनुमानित लागत ₹37.56 लाख करोड़ है।
अब तक ₹17.73 लाख करोड़ (47.21%) खर्च हो चुके हैं।
654 प्रोजेक्ट्स (35%) में 80% से अधिक भौतिक प्रगति और 338 प्रोजेक्ट्स (18%) में 80% से अधिक वित्तीय कार्य पूर्ण।
780 मेगा प्रोजेक्ट्स की लागत ₹1,000 करोड़ या अधिक ; शेष 1,073 प्रोजेक्ट्स उससे कम।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय 974 प्रोजेक्ट्स (₹9.46 लाख करोड़) के साथ सबसे बड़ा क्रियान्वयनकर्ता।
परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में 1,320 प्रोजेक्ट्स (₹20.07 लाख करोड़) सक्रिय।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 तक केंद्र सरकार के 17 मंत्रालयों और विभागों में ₹37.56 लाख करोड़ की नवीनतम अनुमानित लागत वाले 1,853 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की निगरानी की जा रही है। इनमें से अब तक कुल ₹17.73 लाख करोड़ — यानी कुल लागत का लगभग 47.21 प्रतिशत — व्यय किए जा चुके हैं, जो देश में बुनियादी ढाँचे के निर्माण में निरंतर प्रगति का संकेत देता है।

प्रोजेक्ट्स की समग्र स्थिति

मंत्रालय के बयान के अनुसार, कुल 654 प्रोजेक्ट्स (35 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति दर्ज की जा चुकी है, जबकि 338 प्रोजेक्ट्स (18 प्रतिशत) में 80 प्रतिशत से अधिक वित्तीय कार्य पूर्ण हो चुका है। बयान में कहा गया, 'काफी संख्या में प्रोजेक्ट्स अग्रिम चरण में पहुँच गए हैं।'

इन 1,853 जारी प्रोजेक्ट्स में से 780 मेगा प्रोजेक्ट्स हैं, जिनकी प्रत्येक की लागत ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक है। शेष 1,073 प्रमुख प्रोजेक्ट्स की लागत ₹1,000 करोड़ से कम है।

परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र अग्रणी

क्षेत्रवार देखें तो परिवहन और लॉजिस्टिक्स खंड में सर्वाधिक 1,320 प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जिनकी संयुक्त लागत ₹20.07 लाख करोड़ है। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता कनेक्टिविटी आधारित बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करना है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन सबसे अधिक 974 प्रोजेक्ट्स क्रियान्वित हो रहे हैं — यह कुल प्रोजेक्ट्स का 53 प्रतिशत है। इनकी संशोधित लागत ₹9.46 लाख करोड़ है, जो समस्त इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का 25 प्रतिशत बनती है। यह संख्या राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार में मंत्रालय की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करती है।

रेलवे, कोयला और ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति

रेल मंत्रालय के अंतर्गत 284 प्रोजेक्ट्स (15 प्रतिशत) जारी हैं, जिनकी संशोधित लागत ₹7.21 लाख करोड़ है — यह कुल इन्फ्रा लागत का 19 प्रतिशत है। कोयला मंत्रालय के तहत 121 प्रोजेक्ट्स (6 प्रतिशत) क्रियान्वित हैं, जिनकी संशोधित लागत ₹2.22 लाख करोड़ यानी कुल का 6 प्रतिशत है।

इसके अलावा, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय 115 प्रोजेक्ट्स (₹4.30 लाख करोड़), विद्युत मंत्रालय 106 प्रोजेक्ट्स (₹6.40 लाख करोड़), आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय 49 प्रोजेक्ट्स (₹3.41 लाख करोड़) और जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग 35 प्रोजेक्ट्स (₹1.95 लाख करोड़) का संचालन कर रहे हैं।

शेष मंत्रालयों की भागीदारी

बयान के अनुसार, बाकी 169 प्रोजेक्ट्स (9 प्रतिशत) अन्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के अंतर्गत आते हैं, जिनकी संयुक्त लागत ₹2.62 लाख करोड़ है — सभी इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स की कुल लागत का 7 प्रतिशत।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार पूँजीगत व्यय को आर्थिक विकास का प्रमुख चालक मान रही है। 47.21 प्रतिशत खर्च हो जाने के साथ, परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और लागत अनुशासन को बनाए रखना आने वाले महीनों में नीति-निर्माताओं और निवेशकों दोनों के लिए अहम पड़ाव होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि 35% परियोजनाएँ 80% भौतिक प्रगति पर हैं तो बाकी 65% कहाँ हैं — और लागत-अनुशासन का हाल क्या है। ऐतिहासिक रूप से भारत की बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ समय और लागत अतिक्रमण के लिए जानी जाती रही हैं। मेगा प्रोजेक्ट्स (₹1,000 करोड़+) की संख्या 780 है, लेकिन रिपोर्ट में देरी और लागत वृद्धि के आँकड़े नदारद हैं — वही जानकारी जो जवाबदेही के लिए सबसे ज़रूरी है। सड़क मंत्रालय का 53% हिस्सेदारी के साथ एकाधिकार-जैसा प्रभुत्व बताता है कि राजनीतिक प्राथमिकताएँ अभी भी रेल और ऊर्जा से ऊपर सड़कों को रखती हैं।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरकार के 1,853 इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत कितनी है?
सितंबर 2026 तक इन 1,853 प्रोजेक्ट्स की नवीनतम अनुमानित कुल लागत ₹37.56 लाख करोड़ है। इनमें से अब तक ₹17.73 लाख करोड़ यानी 47.21% खर्च हो चुके हैं।
कितने इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स अपने अंतिम चरण में हैं?
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार 654 प्रोजेक्ट्स (35%) में 80% से अधिक भौतिक प्रगति दर्ज है, जबकि 338 प्रोजेक्ट्स (18%) में 80% से अधिक वित्तीय कार्य पूर्ण हो चुका है।
किस मंत्रालय के पास सबसे अधिक इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स हैं?
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पास सर्वाधिक 974 प्रोजेक्ट्स हैं, जो कुल का 53% हैं। इनकी संशोधित लागत ₹9.46 लाख करोड़ है, जो समस्त इन्फ्रा लागत का 25% है।
मेगा इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स किसे माना गया है और इनकी संख्या कितनी है?
₹1,000 करोड़ या उससे अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स को मेगा प्रोजेक्ट की श्रेणी में रखा गया है। इस समय कुल 780 मेगा प्रोजेक्ट्स और 1,073 प्रमुख प्रोजेक्ट्स (₹1,000 करोड़ से कम) क्रियान्वित हो रहे हैं।
परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में कितने प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं?
परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सर्वाधिक 1,320 प्रोजेक्ट्स सक्रिय हैं, जिनकी कुल लागत ₹20.07 लाख करोड़ है। यह आँकड़ा कनेक्टिविटी आधारित बुनियादी ढाँचे को दी जा रही सर्वोच्च प्राथमिकता को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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