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₹33.60 लाख करोड़ की 1,731 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर केंद्र की नज़र, परिवहन क्षेत्र सबसे आगे

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₹33.60 लाख करोड़ की 1,731 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर केंद्र की नज़र, परिवहन क्षेत्र सबसे आगे

सारांश

₹33.60 लाख करोड़ की 1,731 परियोजनाएँ, जिनमें से आधी राशि खर्च हो चुकी है और 647 परियोजनाएँ 80% से अधिक पूर्ण — सरकार का बुनियादी ढाँचे पर यह दांव देश की कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने का दावा करता है, लेकिन असली परीक्षा समय पर पूर्णता की होगी।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार 1,731 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की निगरानी कर रही है, जिनकी संशोधित कुल लागत ₹33.60 लाख करोड़ है।
अब तक ₹16.33 लाख करोड़ (कुल लागत का 48.59% ) खर्च हो चुका है।
647 परियोजनाएँ 80% से अधिक भौतिक प्रगति पर; 312 परियोजनाएँ वित्तीय रूप से 80% से अधिक पूर्ण।
परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सर्वाधिक 1,191 परियोजनाएँ , लागत ₹16.05 लाख करोड़ ।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत 982 परियोजनाएँ (57%), संशोधित लागत ₹9.52 लाख करोड़ ।
715 मेगा परियोजनाएँ (प्रत्येक ₹1,000 करोड़+) और 1,016 प्रमुख परियोजनाएँ (₹150–₹1,000 करोड़) शामिल।

केंद्र सरकार इस समय देशभर में 1,731 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की सक्रिय निगरानी कर रही है, जिनकी संशोधित कुल लागत ₹33.60 लाख करोड़ है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक ये परियोजनाएँ 17 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के तहत संचालित हो रही हैं। इनमें परिवहन से लेकर ऊर्जा तक के क्षेत्र शामिल हैं, और सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट रूप से कनेक्टिविटी-आधारित विकास पर टिकी है।

अब तक कितना खर्च हुआ

मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं पर अब तक ₹16.33 लाख करोड़ का व्यय हो चुका है, जो कुल संशोधित परियोजना लागत का लगभग 48.59 प्रतिशत है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि देश की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में ठोस प्रगति जारी है।

भौतिक प्रगति की दृष्टि से देखें तो 647 परियोजनाएँ 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति हासिल कर चुकी हैं, जबकि 312 परियोजनाएँ वित्तीय रूप से 80 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो गई हैं। मंत्रालय का कहना है कि परियोजनाएँ शुरुआती और अंतिम दोनों चरणों में संतुलित रूप से मौजूद हैं — एक ओर नई परियोजनाएँ प्रारंभ हो रही हैं, दूसरी ओर कई पूर्णता की कगार पर हैं।

PAIMANA प्लेटफॉर्म से हो रही है निगरानी

सरकार ने बताया कि केंद्रीय अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के लिए पैमाना (PAIMANA) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। इस डिजिटल प्रणाली से विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, समयबद्ध समीक्षा और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिल रही है। गौरतलब है कि इस तरह की केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली परियोजनाओं की देरी और लागत वृद्धि जैसी पुरानी समस्याओं से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

परिवहन क्षेत्र को सर्वाधिक प्राथमिकता

क्षेत्रवार आँकड़ों पर नज़र डालें तो परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सर्वाधिक 1,191 परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनकी संशोधित अनुमानित लागत ₹16.05 लाख करोड़ है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार की प्राथमिकता कनेक्टिविटी और भौतिक अवसंरचना के विस्तार पर केंद्रित है।

मंत्रालयवार आँकड़ों में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सबसे आगे है — इसके अंतर्गत 982 परियोजनाएँ (कुल का लगभग 57 प्रतिशत) चल रही हैं, जिनकी संशोधित लागत ₹9.52 लाख करोड़ (कुल लागत का लगभग 28 प्रतिशत) है। इससे राष्ट्रीय अवसंरचना विकास में सड़क क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका स्पष्ट होती है।

रेल मंत्रालय के अंतर्गत 147 परियोजनाएँ (लगभग 8 प्रतिशत) हैं, जिनकी कुल संशोधित लागत ₹3.14 लाख करोड़ है। वहीं कोयला मंत्रालय के तहत 122 परियोजनाएँ (लगभग 7 प्रतिशत) संचालित हैं, जिनकी लागत ₹2.22 लाख करोड़ है।

मेगा और प्रमुख परियोजनाओं का वर्गीकरण

कुल 1,731 परियोजनाओं में से 715 मेगा परियोजनाएँ हैं, जिनमें प्रत्येक की लागत ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक है और इनका मूल लागत मूल्य ₹25.89 लाख करोड़ है। शेष 1,016 प्रमुख परियोजनाएँ ₹150 करोड़ से ₹1,000 करोड़ के बीच की लागत वाली हैं, जिनकी संयुक्त लागत ₹4.83 लाख करोड़ है।

मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती चरण में वित्तीय व्यय अपेक्षाकृत अधिक दिखता है क्योंकि प्रारंभिक निवेश बड़ा होता है, जबकि अंतिम चरण में भौतिक प्रगति वित्तीय प्रगति से आगे निकल जाती है — जो निर्माण कार्यों के समापन का संकेत है। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं की पूर्णता दर और लागत-अनुशासन ही यह तय करेगा कि बुनियादी ढाँचे में यह विशाल निवेश अर्थव्यवस्था पर कितना असर डालता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल लागत और समय-वृद्धि का है — भारत में बड़ी परियोजनाओं की यह पुरानी बीमारी है। MoSPI के आँकड़े यह नहीं बताते कि कितनी परियोजनाएँ मूल समयसीमा से पीछे चल रही हैं या मूल बजट से कितनी फीसद महँगी हो चुकी हैं। PAIMANA जैसे डिजिटल निगरानी उपकरण निस्संदेह पारदर्शिता बढ़ाते हैं, परंतु जब तक देरी और लागत-वृद्धि के लिए जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ये प्लेटफॉर्म रिपोर्टिंग तंत्र बने रहेंगे, सुधार का माध्यम नहीं।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केंद्र सरकार कितनी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की निगरानी कर रही है?
MoSPI के अनुसार, केंद्र सरकार अगस्त 2026 तक देशभर में ₹33.60 लाख करोड़ की संशोधित लागत वाली 1,731 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की निगरानी कर रही है। ये परियोजनाएँ 17 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के तहत संचालित हो रही हैं।
इन परियोजनाओं पर अब तक कितनी राशि खर्च हो चुकी है?
मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, इन परियोजनाओं पर अब तक ₹16.33 लाख करोड़ खर्च हो चुका है, जो कुल संशोधित लागत का लगभग 48.59 प्रतिशत है।
कौन-से क्षेत्र में सबसे अधिक परियोजनाएँ चल रही हैं?
परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सर्वाधिक 1,191 परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनकी संशोधित अनुमानित लागत ₹16.05 लाख करोड़ है। इस क्षेत्र में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 982 परियोजनाएँ अकेले कुल परियोजनाओं का 57 प्रतिशत हिस्सा बनाती हैं।
PAIMANA प्लेटफॉर्म क्या है और इसका क्या उपयोग है?
PAIMANA (पैमाना) केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के लिए सरकार द्वारा उपयोग किया जाने वाला डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इससे विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय, समयबद्ध समीक्षा और डेटा-आधारित निर्णय लेने में मदद मिलती है।
मेगा और प्रमुख परियोजनाओं में क्या अंतर है?
मेगा परियोजनाएँ वे हैं जिनकी प्रत्येक की लागत ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक है — कुल 715 ऐसी परियोजनाएँ हैं जिनका मूल लागत मूल्य ₹25.89 लाख करोड़ है। प्रमुख परियोजनाएँ ₹150 करोड़ से ₹1,000 करोड़ के बीच की लागत वाली होती हैं और इनकी संख्या 1,016 है, जिनकी कुल लागत ₹4.83 लाख करोड़ है।
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