₹33.60 लाख करोड़ की 1,731 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर केंद्र की नज़र, परिवहन क्षेत्र सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार इस समय देशभर में 1,731 इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की सक्रिय निगरानी कर रही है, जिनकी संशोधित कुल लागत ₹33.60 लाख करोड़ है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 तक ये परियोजनाएँ 17 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के तहत संचालित हो रही हैं। इनमें परिवहन से लेकर ऊर्जा तक के क्षेत्र शामिल हैं, और सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट रूप से कनेक्टिविटी-आधारित विकास पर टिकी है।
अब तक कितना खर्च हुआ
मंत्रालय के अनुसार, इन परियोजनाओं पर अब तक ₹16.33 लाख करोड़ का व्यय हो चुका है, जो कुल संशोधित परियोजना लागत का लगभग 48.59 प्रतिशत है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि देश की बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में ठोस प्रगति जारी है।
भौतिक प्रगति की दृष्टि से देखें तो 647 परियोजनाएँ 80 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति हासिल कर चुकी हैं, जबकि 312 परियोजनाएँ वित्तीय रूप से 80 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो गई हैं। मंत्रालय का कहना है कि परियोजनाएँ शुरुआती और अंतिम दोनों चरणों में संतुलित रूप से मौजूद हैं — एक ओर नई परियोजनाएँ प्रारंभ हो रही हैं, दूसरी ओर कई पूर्णता की कगार पर हैं।
PAIMANA प्लेटफॉर्म से हो रही है निगरानी
सरकार ने बताया कि केंद्रीय अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के लिए पैमाना (PAIMANA) प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा रहा है। इस डिजिटल प्रणाली से विभिन्न मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय, समयबद्ध समीक्षा और डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिल रही है। गौरतलब है कि इस तरह की केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली परियोजनाओं की देरी और लागत वृद्धि जैसी पुरानी समस्याओं से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
परिवहन क्षेत्र को सर्वाधिक प्राथमिकता
क्षेत्रवार आँकड़ों पर नज़र डालें तो परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सर्वाधिक 1,191 परियोजनाएँ चल रही हैं, जिनकी संशोधित अनुमानित लागत ₹16.05 लाख करोड़ है। यह स्पष्ट करता है कि सरकार की प्राथमिकता कनेक्टिविटी और भौतिक अवसंरचना के विस्तार पर केंद्रित है।
मंत्रालयवार आँकड़ों में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सबसे आगे है — इसके अंतर्गत 982 परियोजनाएँ (कुल का लगभग 57 प्रतिशत) चल रही हैं, जिनकी संशोधित लागत ₹9.52 लाख करोड़ (कुल लागत का लगभग 28 प्रतिशत) है। इससे राष्ट्रीय अवसंरचना विकास में सड़क क्षेत्र की केंद्रीय भूमिका स्पष्ट होती है।
रेल मंत्रालय के अंतर्गत 147 परियोजनाएँ (लगभग 8 प्रतिशत) हैं, जिनकी कुल संशोधित लागत ₹3.14 लाख करोड़ है। वहीं कोयला मंत्रालय के तहत 122 परियोजनाएँ (लगभग 7 प्रतिशत) संचालित हैं, जिनकी लागत ₹2.22 लाख करोड़ है।
मेगा और प्रमुख परियोजनाओं का वर्गीकरण
कुल 1,731 परियोजनाओं में से 715 मेगा परियोजनाएँ हैं, जिनमें प्रत्येक की लागत ₹1,000 करोड़ या उससे अधिक है और इनका मूल लागत मूल्य ₹25.89 लाख करोड़ है। शेष 1,016 प्रमुख परियोजनाएँ ₹150 करोड़ से ₹1,000 करोड़ के बीच की लागत वाली हैं, जिनकी संयुक्त लागत ₹4.83 लाख करोड़ है।
मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती चरण में वित्तीय व्यय अपेक्षाकृत अधिक दिखता है क्योंकि प्रारंभिक निवेश बड़ा होता है, जबकि अंतिम चरण में भौतिक प्रगति वित्तीय प्रगति से आगे निकल जाती है — जो निर्माण कार्यों के समापन का संकेत है। आने वाले महीनों में इन परियोजनाओं की पूर्णता दर और लागत-अनुशासन ही यह तय करेगा कि बुनियादी ढाँचे में यह विशाल निवेश अर्थव्यवस्था पर कितना असर डालता है।