कल्पना पटवारी: भोजपुरी लोकगीतों को अंतरराष्ट्रीय मंच दिलाने वाली पहली गायिका, जन्मदिन पर जानें उनकी कहानी
सारांश
मुख्य बातें
लोकगायिका कल्पना पटवारी ने भोजपुरी और असमिया लोकगीतों को न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। 27 अक्टूबर 1978 को असम के बरपेटा जिले के सोरभोग में जन्मी कल्पना को भोजपुरी गीतों को वैश्विक मंच पर ले जाने वाली पहली भोजपुरी गायिका माना जाता है। हिंदी, भोजपुरी, असमिया, बंगाली, मराठी, पंजाबी, गुजराती, अवधी और तमिल सहित 30 से अधिक भाषाओं में गायन कल्पना की सबसे बड़ी खासियत है।
संगीत की जड़ें और शुरुआती सफर
कल्पना के पिता बिपिन नाथ पटवारी एक जाने-माने लोकगीत गायक थे और माँ जोयमती पटवारी गृहिणी हैं। संगीत प्रेमी परिवार में जन्मी कल्पना ने महज चार वर्ष की उम्र में सार्वजनिक मंचों पर गायन प्रस्तुति देना शुरू कर दिया था — एक उम्र जब अधिकांश बच्चे अभी खेलना ही सीखते हैं।
उनकी प्रारंभिक संगीत शिक्षा घर पर ही हुई, जहाँ पिता ने उन्हें असम के पारंपरिक लोकगीतों का प्रशिक्षण और अभ्यास दोनों कराए। इसके बाद उन्होंने प्रख्यात शास्त्रीय गायक उस्ताद गुलाम मुस्तफा खान से संगीत की उच्च शिक्षा ली।
शैक्षणिक उपलब्धियाँ
कल्पना ने लखनऊ के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से भारतीय शास्त्रीय संगीत में 'संगीत विशारद' की प्रतिष्ठित डिग्री हासिल की। इसके साथ ही, उन्होंने असम के कॉटन कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई भी की — यह संयोजन उनकी बहुआयामी प्रतिभा को और गहरा बनाता है।
अंतरराष्ट्रीय मंच और रियलिटी शो से मिली पहचान
कल्पना ने भोजपुरी लोकगीतों की विभिन्न विधाओं — पूर्वी, बिरहा, पचरा, कजरी, सोहर और विवाह गीत — को विदेशी दर्शकों के सामने प्रस्तुत कर इन्हें एक नई वैश्विक पहचान दी। उन्हें भोजपुरी गीतों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ले जाने वाली पहली भोजपुरी गायिका का दर्जा प्राप्त है।
हालाँकि वह विभिन्न भाषाओं में गाती रही थीं, लेकिन वर्ष 2008 में एनडीटीवी इमेजिन के रियलिटी शो 'जुनून : कुछ कर दिखाने का' में उनकी प्रस्तुति ने उन्हें घर-घर में एक परिचित नाम बना दिया। यह वह मोड़ था जब उनकी लोकप्रियता राष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊँचाई पर पहुँची।
बॉलीवुड, अभिनय और सम्मान
गायकी के क्षेत्र में खुद को स्थापित करने के बाद कल्पना ने बॉलीवुड और मराठी फिल्मों में भी अपनी आवाज़ दी। इसके अलावा, उन्होंने भोजपुरी फिल्म 'चलत मुसाफिर मोह लियो रे' में दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ के साथ अभिनय की दुनिया में भी कदम रखा।
बिहार के लोकगीतों को लोकप्रिय बनाने और भोजपुरी संगीत एवं कला में दिए गए उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें 2025 में प्रतिष्ठित 'बिहार कला पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
व्यक्तिगत जीवन
कल्पना पटवारी का व्यक्तिगत जीवन भी उनके कलात्मक व्यक्तित्व जितना ही साहसपूर्ण रहा है। उन्होंने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध जाकर परवेज खान से विवाह किया। यह दंपती दो बेटों के माता-पिता हैं। लोकसंगीत की यह साधिका आज भी अपनी परंपरागत जड़ों से जुड़ी रहते हुए नई पीढ़ी को लोकगीतों की विरासत से परिचित कराती रहती हैं।