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पीएमएफएमई योजना से शेखपुरा के संजीत वर्णवाल का मशरूम कारोबार, 10 से अधिक को दे रहे रोज़गार

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पीएमएफएमई योजना से शेखपुरा के संजीत वर्णवाल का मशरूम कारोबार, 10 से अधिक को दे रहे रोज़गार

सारांश

दिल्ली की नौकरी छोड़, शेखपुरा लौटे संजीत वर्णवाल ने पीएमएफएमई योजना से ₹10 लाख का बिना-गिरवी लोन लेकर मशरूम कारोबार खड़ा किया। आज उनकी सप्लाई पश्चिम बंगाल तक पहुँचती है और 10 से अधिक लोगों को रोज़गार मिला है — एक छोटे ज़िले से आत्मनिर्भरता की ज़िंदा मिसाल।

मुख्य बातें

संजीत वर्णवाल ( शेखपुरा ) ने पीएमएफएमई योजना के तहत लोन लेकर मशरूम उत्पादन का कारोबार शुरू किया।
योजना के अंतर्गत बिना किसी संपत्ति गिरवी रखे ₹10 लाख तक का ऋण उपलब्ध है।
मशरूम की आपूर्ति शेखपुरा , लखीसराय , नवादा , जमुई और पश्चिम बंगाल तक होती है।
कारोबार से 10 से अधिक स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार मिला है।
लाभार्थी ने समय-पूर्व लोन चुकाने और अधिक राशि के ऋण की सुविधा देने का सुझाव दिया।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (पीएमएफएमई) शेखपुरा के युवाओं के लिए स्वरोज़गार का एक नया द्वार खोल रही है। कभी बेरोज़गारी से जूझने वाले संजीत वर्णवाल आज इसी योजना के सहारे मशरूम उत्पादन का सफल व्यवसाय संचालित कर रहे हैं और 10 से अधिक स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोज़गार मुहैया करा रहे हैं। यह कहानी केंद्र सरकार की सूक्ष्म उद्यम योजनाओं के ज़मीनी असर का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।

दिल्ली की नौकरी से शेखपुरा के उद्यमी तक का सफर

संजीत वर्णवाल ने दिल्ली से स्नातक करने के बाद एक निजी कंपनी में करीब एक वर्ष तक नौकरी की। नौकरी में संतुष्टि न मिलने पर वह शेखपुरा लौट आए और अनाज — विशेष रूप से धान — का कारोबार शुरू किया, परंतु इससे अपेक्षित आमदनी नहीं हो सकी।

इसी दौरान एक मित्र के साथ उद्योग विभाग कार्यालय जाने पर उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी मिली। योजना के तहत आवेदन स्वीकृत होने के बाद संजीत ने मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया और आज उनका व्यवसाय तेज़ी से विस्तार पा रहा है।

मशरूम की सप्लाई लखीसराय, नवादा, जमुई से पश्चिम बंगाल तक

संजीत के यहाँ उत्पादित मशरूम की पैकिंग कर शेखपुरा शहर के अलावा लखीसराय, नवादा, जमुई और पश्चिम बंगाल तक आपूर्ति की जाती है। कारोबार की भौगोलिक पहुँच बताती है कि स्थानीय स्तर पर शुरू किया गया यह उद्यम अब राज्य की सीमाएँ लाँघ चुका है।

उनके यहाँ काम करने वाले 10 से अधिक लोग इस व्यवसाय से सीधे जुड़े हैं, जो उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और आपूर्ति तक की प्रक्रिया में भागीदार हैं।

योजना की मुख्य विशेषता: बिना गिरवी ₹10 लाख तक का लोन

संजीत ने बताया कि पीएमएफएमई योजना के तहत सरकार बिना किसी संपत्ति गिरवी रखे ₹10 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा, 'यह योजना हम जैसे छोटे कारोबारियों और बेरोज़गार युवाओं की मदद कर रही है, जिससे हमें आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है। पहले मैं धान के कारोबार में था, लेकिन मैं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आना चाहता था। तभी मुझे मशरूम की खेती के बारे में पता चला और मैंने पीएमएफएमई योजना के तहत लोन लिया।'

गौरतलब है कि पीएमएफएमई योजना केंद्र सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसका उद्देश्य ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक ढाँचे में लाना और उन्हें वित्तीय व तकनीकी सहायता देना है।

लाभार्थी का सुझाव: समय-पूर्व लोन चुकाने और बड़े ऋण की सुविधा हो

संजीत ने यह भी सुझाव दिया कि यदि कारोबार अच्छा चलने लगे तो लोन को निर्धारित समय से पहले चुकाने की सुविधा मिलनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने कहा कि बड़ा व्यवसाय खड़ा करने के इच्छुक उद्यमियों के लिए अधिक राशि का ऋण भी उपलब्ध होना चाहिए।

यह सुझाव उन बाधाओं की ओर इशारा करता है जिनका सामना तेज़ी से बढ़ते सूक्ष्म उद्यम करते हैं — यानी एक चरण के बाद पूंजी की उपलब्धता सीमित हो जाती है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक कदम

संजीत का मानना है कि पीएमएफएमई जैसी योजनाएँ युवाओं को 'नौकरी माँगने वाले' से 'नौकरी देने वाले' में बदल सकती हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश के युवा अपनी मेहनत और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनेंगे और बेरोज़गारी की समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

शेखपुरा जैसे छोटे ज़िले से उभरी यह सफलता की कहानी बताती है कि सरकारी योजनाओं की पहुँच और ज़मीनी क्रियान्वयन जब मेल खाते हैं, तो स्थानीय स्तर पर रोज़गार का एक टिकाऊ तंत्र विकसित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन एक व्यक्तिगत सफलता पूरी योजना की समीक्षा का आधार नहीं बन सकती। असली प्रश्न यह है कि बिहार जैसे राज्यों में इस योजना की 'रीच' और 'ड्रॉपआउट रेट' क्या है — यानी कितने आवेदक लोन पाने के बाद भी कारोबार को टिकाऊ बनाने में असफल रहे। संजीत का यह सुझाव कि प्री-पेमेंट और बड़े ऋण की सुविधा मिले, उस 'स्केलिंग गैप' की ओर इशारा करता है जिसे सूक्ष्म उद्यम योजनाएँ अभी तक नहीं पाट पाई हैं। जब तक ऋण की सीमा और लचीलापन नहीं बढ़ता, तब तक सफल लाभार्थी एक निश्चित स्तर के बाद अनौपचारिक पूंजी बाज़ार की ओर लौटने को मजबूर होंगे।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमएफएमई योजना क्या है और इसका लाभ कैसे मिलता है?
पीएमएफएमई यानी प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना केंद्र सरकार की एक पहल है जो सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण व्यवसायों को बिना संपत्ति गिरवी रखे ₹10 लाख तक का ऋण और तकनीकी सहायता देती है। इच्छुक उद्यमी ज़िले के उद्योग विभाग कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं।
संजीत वर्णवाल ने पीएमएफएमई योजना के तहत क्या हासिल किया?
शेखपुरा के संजीत वर्णवाल ने पीएमएफएमई योजना के तहत लोन लेकर मशरूम उत्पादन का कारोबार शुरू किया। आज उनकी सप्लाई शेखपुरा, लखीसराय, नवादा, जमुई और पश्चिम बंगाल तक पहुँचती है और 10 से अधिक लोगों को रोज़गार मिला है।
पीएमएफएमई योजना में ₹10 लाख का लोन बिना गिरवी कैसे मिलता है?
योजना के प्रावधानों के अनुसार, पात्र लाभार्थियों को कोई संपत्ति गिरवी रखे बिना ₹10 लाख तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। लोन की स्वीकृति उद्यम की व्यवहार्यता और उद्योग विभाग के मूल्यांकन पर निर्भर करती है।
क्या पीएमएफएमई योजना का लाभ बिहार के अन्य ज़िलों के युवाओं को भी मिल सकता है?
हाँ, पीएमएफएमई एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो पूरे देश में लागू है। बिहार के किसी भी ज़िले का युवा अपने स्थानीय उद्योग विभाग कार्यालय से संपर्क कर आवेदन कर सकता है।
मशरूम उत्पादन के अलावा पीएमएफएमई योजना किन व्यवसायों के लिए उपयोगी है?
पीएमएफएमई योजना अचार, पापड़, बेकरी, मसाले, फल-सब्ज़ी प्रसंस्करण सहित किसी भी सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय के लिए उपयोगी है। योजना का उद्देश्य खाद्य क्षेत्र के असंगठित उद्यमों को औपचारिक और प्रतिस्पर्धी बनाना है।
राष्ट्र प्रेस
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