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पीएमएफएमई योजना से बदली किस्मत: कपड़े बेचने वाले संजीत कुमार ने खड़ा किया बेकरी उद्योग, 10 लोगों को दिया रोजगार

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पीएमएफएमई योजना से बदली किस्मत: कपड़े बेचने वाले संजीत कुमार ने खड़ा किया बेकरी उद्योग, 10 लोगों को दिया रोजगार

सारांश

कपड़े की दुकान से बेकरी तक — बिहार के शेखपुरा के संजीत कुमार की कहानी पीएमएफएमई योजना की ज़मीनी ताकत बताती है। एक ग्राहक की सलाह, सरकारी सहायता और खुद की मेहनत से आज वे 10 लोगों को रोजगार दे रहे हैं और तीन जिलों में बेकरी उत्पाद पहुँचा रहे हैं।

मुख्य बातें

संजीत कुमार (भदौली गाँव, शेखपुरा, बिहार) ने पीएमएफएमई योजना के तहत सहायता पाकर बेकरी उद्योग स्थापित किया।
बेकरी में कुल 10 लोग कार्यरत — 6 कारीगर झारखंड से और 4 स्थानीय मजदूर ।
उत्पादों की आपूर्ति शेखपुरा, नवादा और लखीसराय जिलों तक।
बेकरी में बर्गर, बिस्किट, टोस्ट और ब्रेड सहित विविध खाद्य उत्पाद तैयार।
झारखंड के याशिक अंसारी ने पटना की कम-वेतन नौकरी छोड़कर यहाँ 3 महीने से काम शुरू किया।

बिहार के शेखपुरा जिले के शेखोपुरसराय प्रखंड स्थित भदौली गाँव के संजीत कुमार आज आत्मनिर्भरता की जीती-जागती मिसाल हैं। कभी गाँव के चौक पर एक छोटी-सी कपड़े की दुकान से परिवार का गुज़ारा करने वाले संजीत ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना का लाभ उठाकर एक सफल बेकरी उद्योग स्थापित किया है। आज वे 10 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दे रहे हैं और शेखपुरा, नवादा तथा लखीसराय जिलों तक अपने उत्पाद पहुँचा रहे हैं।

संघर्ष के दिन और बदलाव की शुरुआत

संजीत कुमार ने बताया कि गाँव की कपड़े की दुकान से होने वाली आमदनी इतनी नहीं थी कि बच्चों की पढ़ाई, भरण-पोषण और घर की अन्य जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें। आर्थिक तंगी के उन दिनों में एक ग्राहक ने उनकी दुकान पर आकर पीएमएफएमई योजना की जानकारी दी और बताया कि इस सरकारी योजना के जरिये बेकरी उद्योग शुरू किया जा सकता है।

उस ग्राहक की बात ने संजीत के जीवन की दिशा बदल दी। वे तुरंत शेखपुरा मुख्यालय स्थित उद्योग विभाग के कार्यालय पहुँचे, जहाँ विभागीय कर्मियों ने उन्हें योजना की पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और मिलने वाले लाभ के बारे में विस्तार से समझाया।

योजना का लाभ और उद्योग की नींव

आवेदन के कुछ समय बाद संजीत को पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत स्वीकृति मिली। इस सहायता से उन्होंने बेकरी की मशीनें खरीदीं और उत्पादन शुरू किया। धीरे-धीरे मेहनत और लगन से उनका कारोबार विस्तार पाता गया। आज उनकी बेकरी में बर्गर, बिस्किट, टोस्ट और ब्रेड सहित कई खाद्य उत्पाद बड़े पैमाने पर तैयार होते हैं।

रोजगार सृजन: खुद के साथ दूसरों का भी सहारा

संजीत कुमार के अनुसार उनकी बेकरी में कुल 10 कर्मचारी कार्यरत हैं — जिनमें 6 कारीगर झारखंड के मूल निवासी हैं और 4 स्थानीय मजदूर हैं। झारखंड के निवासी याशिक अंसारी ने बताया कि वे पहले पटना में काम करते थे, लेकिन कम वेतन के कारण वहाँ की नौकरी छोड़कर यहाँ आए और पिछले तीन महीनों से संजीत की बेकरी में काम कर रहे हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि छोटे उद्यम न केवल स्थानीय बल्कि अंतर-राज्यीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।

बाज़ार का विस्तार और आपूर्ति श्रृंखला

संजीत की बेकरी के उत्पाद अब केवल शेखपुरा जिले तक सीमित नहीं हैं। इनकी आपूर्ति नवादा और लखीसराय जिलों तक भी हो रही है, जो एक लघु उद्यम के लिए उल्लेखनीय बाज़ार विस्तार है। गौरतलब है कि पीएमएफएमई योजना का लक्ष्य देशभर में ऐसे ही सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक और प्रतिस्पर्धी बनाना है।

युवाओं को संजीत का संदेश

संजीत कुमार ने रोजगार की तलाश में भटक रहे युवाओं से अपील की है कि वे निराश न हों। उन्होंने कहा कि युवा अपने जिले के उद्योग विभाग कार्यालय में जाकर सरकारी योजनाओं की जानकारी लें और उनका लाभ उठाकर स्वरोजगार की राह चुनें। उन्होंने पीएमएफएमई योजना के लिए सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएँ बेरोजगार युवाओं के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने में सक्षम हैं। आने वाले समय में संजीत के उद्यम का और विस्तार होने की संभावना है, जिससे और अधिक लोगों को रोजगार मिल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल की ओर भी इशारा करती है — पीएमएफएमई जैसी योजनाएँ कितने लाभार्थियों तक वास्तव में पहुँच पा रही हैं और उनमें से कितने टिकाऊ उद्यम खड़े कर पाते हैं? यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में ग्रामीण बेरोजगारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है और अंतर-राज्यीय पलायन जारी है। झारखंड के कारीगरों का शेखपुरा की एक छोटी बेकरी में काम करना दर्शाता है कि स्थानीय उद्यम क्षेत्रीय श्रम गतिशीलता को भी प्रभावित कर सकते हैं। असली कसौटी यह है कि सरकार ऐसी सफलता की कहानियों को अपवाद से नियम बनाने के लिए योजना की पहुँच और जागरूकता को कितना विस्तार देती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमएफएमई योजना क्या है और इसका लाभ कैसे मिलता है?
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना केंद्र सरकार की एक पहल है, जिसका उद्देश्य देशभर के सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को वित्तीय और तकनीकी सहायता देकर उन्हें औपचारिक और प्रतिस्पर्धी बनाना है। इच्छुक उद्यमी अपने जिले के उद्योग विभाग कार्यालय में जाकर आवेदन कर सकते हैं।
संजीत कुमार ने पीएमएफएमई योजना से क्या हासिल किया?
बिहार के शेखपुरा जिले के संजीत कुमार ने पीएमएफएमई योजना की सहायता से बेकरी मशीनें खरीदीं और उद्योग शुरू किया। आज वे बर्गर, बिस्किट, टोस्ट और ब्रेड जैसे उत्पाद तैयार कर 10 लोगों को रोजगार दे रहे हैं और तीन जिलों में आपूर्ति कर रहे हैं।
संजीत की बेकरी में कहाँ-कहाँ से कर्मचारी काम करते हैं?
संजीत की बेकरी में कुल 10 कर्मचारी हैं — 6 कारीगर झारखंड के मूल निवासी हैं और 4 स्थानीय मजदूर हैं। झारखंड के याशिक अंसारी पटना में कम वेतन के कारण वहाँ की नौकरी छोड़कर पिछले तीन महीनों से यहाँ काम कर रहे हैं।
संजीत की बेकरी के उत्पाद कहाँ-कहाँ बिकते हैं?
संजीत कुमार की बेकरी के उत्पादों की आपूर्ति शेखपुरा जिले के अलावा नवादा और लखीसराय जिलों तक होती है। उनकी बेकरी में बर्गर, बिस्किट, टोस्ट और ब्रेड सहित कई प्रकार के खाद्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
रोजगार की तलाश में युवा पीएमएफएमई योजना का लाभ कैसे उठा सकते हैं?
संजीत कुमार के अनुसार, युवा अपने जिले के उद्योग विभाग कार्यालय में जाकर पीएमएफएमई सहित अन्य सरकारी योजनाओं की जानकारी ले सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया विभागीय कर्मी समझाते हैं और स्वीकृति मिलने पर वित्तीय सहायता से स्वरोजगार शुरू किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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