2 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पीएमईजीपी योजना से बदली शेखपुरा के सुमन कुमार की जिंदगी, फर्नीचर कारोबार से 4 लोगों को दिया रोजगार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पीएमईजीपी योजना से बदली शेखपुरा के सुमन कुमार की जिंदगी, फर्नीचर कारोबार से 4 लोगों को दिया रोजगार

सारांश

मुंबई में 5 साल नौकरी करने के बाद गांव लौटे सुमन कुमार को पीएमईजीपी योजना ने नई राह दिखाई। सब्सिडी-युक्त ऋण से आधुनिक मशीनें खरीदीं, फर्नीचर कारोबार खड़ा किया और आज 4 लोगों को रोजगार दे रहे हैं — शेखपुरा के कोइरीबीघा गांव से आत्मनिर्भरता की असली तस्वीर।

मुख्य बातें

सुमन कुमार , शेखपुरा जिले के कोइरीबीघा गांव के निवासी, पीएमईजीपी योजना के लाभार्थी हैं।
इंटर के बाद रोजगार न मिलने पर मुंबई में 5 वर्षों तक काम किया, फिर गांव लौटे।
शेखपुरा उद्योग विभाग के मार्गदर्शन से पीएमईजीपी के तहत सब्सिडी-सहित ऋण प्राप्त किया।
ऋण से आधुनिक मशीनें खरीदकर बरबीघा बाजार में फर्नीचर व्यवसाय का विस्तार किया।
आज 4 अन्य लोगों को रोजगार दे रहे हैं; परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई सुचारू।

शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखंड के कोइरीबीघा गांव के निवासी सुमन कुमार के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। सब्सिडी-युक्त ऋण की मदद से उन्होंने अपने छोटे से फर्नीचर व्यवसाय को आधुनिक रूप दिया और आज न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि 4 अन्य लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं।

संघर्ष की शुरुआत

इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुमन कुमार को बिहार में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिले। आर्थिक तंगी के चलते उन्हें मुंबई का रुख करना पड़ा, जहाँ उन्होंने करीब 5 वर्षों तक एक निजी कंपनी में काम किया। परिवार और गांव की याद ने उन्हें वापस खींचा और वे बरबीघा बाजार में एक छोटी सी फर्नीचर की दुकान खोलकर जीवनयापन करने लगे। हालांकि, सीमित संसाधनों के कारण परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था।

पीएमईजीपी से मिली राह

इसी दौर में एक मित्र ने उन्हें शेखपुरा उद्योग विभाग कार्यालय जाने की सलाह दी। वहाँ कर्मचारियों ने उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की विस्तृत जानकारी दी। सुमन ने योजना के तहत आवेदन किया और कुछ ही दिनों में सब्सिडी-सहित ऋण स्वीकृत हो गया। इस आर्थिक सहयोग से उन्होंने आधुनिक मशीनें खरीदीं और अपने फर्नीचर व्यवसाय का विस्तार किया।

बदली तस्वीर, बढ़ा कारोबार

आज सुमन कुमार का व्यवसाय अच्छी आमदनी दे रहा है। परिवार का भरण-पोषण बेहतर हो रहा है और बच्चों की पढ़ाई बिना किसी रुकावट के जारी है। उल्लेखनीय यह है कि उन्होंने अपने व्यवसाय के जरिए 4 अन्य व्यक्तियों को भी रोजगार दिया है, जो पीएमईजीपी के रोजगार-सृजन उद्देश्य का व्यावहारिक उदाहरण है।

सुमन कुमार की सलाह

सुमन कुमार का कहना है, 'यह योजना हम जैसे बेरोजगार युवाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। अगर सही जानकारी और मार्गदर्शन मिले, तो युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं और दूसरों को भी रोजगार दे सकते हैं।' उन्होंने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए अन्य युवाओं को भी इस योजना का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

क्या है पीएमईजीपी योजना

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की एक प्रमुख ऋण-आधारित सब्सिडी योजना है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नए उद्यम स्थापित करने के इच्छुक युवाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है। यह योजना सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) के अंतर्गत संचालित होती है। सुमन कुमार जैसे लाभार्थियों की सफलता की कहानियाँ यह दर्शाती हैं कि सही समय पर सही जानकारी किसी की जिंदगी की दिशा बदल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी याद दिलाती है कि योजना की पहुँच तभी सार्थक होती है जब जिला-स्तरीय उद्योग विभाग सक्रिय रूप से जागरूकता फैलाए — सुमन को जानकारी एक मित्र से मिली, सरकारी तंत्र से नहीं। बिहार जैसे राज्य में, जहाँ पलायन अभी भी बड़ी चुनौती है, ऐसी योजनाओं की ज़मीनी पहुँच और सरलीकृत आवेदन प्रक्रिया ही असली परीक्षा है। एक लाभार्थी की सफलता प्रेरणादायक है, पर नीति की सफलता तब मानी जाएगी जब ऐसे हजारों सुमन बिना किसी 'मित्र की सलाह' की प्रतीक्षा किए सीधे योजना तक पहुँच सकें।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमईजीपी योजना क्या है और इसका लाभ कैसे मिलता है?
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) केंद्र सरकार की सब्सिडी-आधारित ऋण योजना है, जो नए उद्यम स्थापित करने के इच्छुक युवाओं को वित्तीय सहायता देती है। इच्छुक आवेदक अपने जिले के उद्योग विभाग कार्यालय या MSME मंत्रालय के पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।
सुमन कुमार ने पीएमईजीपी से कैसे फायदा उठाया?
शेखपुरा के सुमन कुमार ने पीएमईजीपी के तहत आवेदन कर सब्सिडी-सहित ऋण प्राप्त किया, जिससे उन्होंने आधुनिक मशीनें खरीदीं और बरबीघा बाजार में अपने फर्नीचर व्यवसाय का विस्तार किया। आज वे 4 अन्य लोगों को रोजगार दे रहे हैं।
क्या पीएमईजीपी योजना बिहार के ग्रामीण युवाओं के लिए उपलब्ध है?
हाँ, पीएमईजीपी योजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के युवाओं के लिए उपलब्ध है। बिहार के शेखपुरा जैसे जिलों में उद्योग विभाग कार्यालय आवेदन प्रक्रिया में मार्गदर्शन करते हैं।
सुमन कुमार ने मुंबई छोड़कर गांव क्यों लौटने का फैसला किया?
सुमन कुमार ने मुंबई में करीब 5 वर्षों तक काम किया, लेकिन परिवार और गांव से लगाव के कारण वे वापस लौटे। गांव में उन्होंने छोटी फर्नीचर दुकान शुरू की, जो बाद में पीएमईजीपी की मदद से बड़े व्यवसाय में बदल गई।
पीएमईजीपी योजना से युवाओं को क्या संदेश मिलता है?
सुमन कुमार के अनुसार, सही जानकारी और मार्गदर्शन मिले तो कोई भी युवा आत्मनिर्भर बन सकता है और दूसरों को भी रोजगार दे सकता है। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए कारगर है जो स्वरोजगार की राह पर चलना चाहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 3 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले