क्या मध्य प्रदेश के नीमच में पीएमईजीपी से ग्रामीण आत्मनिर्भर हो रहे हैं?

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क्या मध्य प्रदेश के नीमच में पीएमईजीपी से ग्रामीण आत्मनिर्भर हो रहे हैं?

सारांश

मध्य प्रदेश के नीमच में पीएमईजीपी के लाभार्थियों ने न केवल पारंपरिक शिल्पों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता को भी नया जीवन दिया है। जानें कैसे इस योजना ने गांवों में बदलाव लाया है।

Key Takeaways

  • पीएमईजीपी ने ग्रामीण उद्यमिता को सशक्त बनाया है।
  • पारंपरिक शिल्पों को पुनर्जीवित किया जा रहा है।
  • आर्थिक सहायता से व्यवसाय में वृद्धि हुई है।
  • ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।
  • सरकारी योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन आवश्यक है।

भोपाल, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के नीमच में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) के लाभार्थियों ने ग्रामीण उद्यमियों को सशक्त बनाने और विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे पारंपरिक शिल्पों को पुनर्जीवित करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की है।

इस योजना ने न केवल ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि वैश्विक बाजारों के द्वार भी खोले हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण नीमच जिले के तारापुर, उम्मेदपुरा गांव की निवासी किरण जरिया हैं, जिन्हें अपने उद्यम, गीता हैंडप्रिंट्स, का विस्तार करने के लिए पीएमईजीपी के तहत 14 लाख रुपए का ऋण प्राप्त हुआ।

किरण ने अपने परिवार की 400 साल पुरानी नंदना प्रिंट, दाबू और इंडिगो हैंड ब्लॉक प्रिंट की विरासत को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सफलता पूर्वक पहुँचाया है। आज, उनके हस्तनिर्मित कपड़े भारत और विदेशों में ऑनलाइन बेचे जा रहे हैं।

किरण ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नंदना, दाबू और नील जैसे हमारे हाथ से बने ब्लॉक प्रिंट अब विदेशों में पहचान पा रहे हैं। यह हमारी सदियों पुरानी विरासत है, जो लगभग लुप्त हो रही थी। लेकिन, केंद्र सरकार की योजना के कारण यह फिर से फल-फूल रही है। पीएमईजीपी ने हमें वित्तीय सहायता और विस्तार का आत्मविश्वास दिया है। हमारा व्यवसाय बढ़ा है, हमारा परिवार खुशहाल है और हमारे उत्पाद अब दुनिया भर में बिक रहे हैं। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री का तहे दिल से धन्यवाद करती हूं।

एक अन्य लाभार्थी वनबारी जरिया ने भी अपनी आजीविका में आए बदलाव का श्रेय पीएमईजीपी को दिया। उन्होंने कहा कि हमने 2019-20 में इस योजना के तहत सब्सिडी के साथ ऋण लिया था। तब से, हमारे काम में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह योजना हम जैसे छोटे उद्यमियों के लिए एक वरदान है। हमारे हाथ से बने कपड़े 100 प्रतिशत प्राकृतिक रंगों से बने हैं और उन्हें कई विदेशी ऑर्डर मिल रहे हैं। इस काम की वजह से गांव के और लोगों को भी रोजगार मिल रहा है। हम इस दूरदर्शी कार्यक्रम के लिए केंद्र सरकार का आभार जताते हैं।

Point of View

यह स्पष्ट है कि पीएमईजीपी जैसी योजनाएँ ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह न केवल रोजगार सृजन कर रही हैं, बल्कि पारंपरिक शिल्पों को भी पुनर्जीवित कर रही हैं, जिससे हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया जा रहा है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

पीएमईजीपी क्या है?
पीएमईजीपी, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, एक सरकारी योजना है जो ग्रामीण उद्यमियों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
इस योजना का लाभ किसे मिलता है?
यह योजना उन ग्रामीण उद्यमियों को लाभ देती है जो अपने व्यवसाय को स्थापित या विस्तारित करना चाहते हैं।
क्या पीएमईजीपी से पारंपरिक शिल्पों को लाभ हुआ है?
हाँ, पीएमईजीपी ने पारंपरिक शिल्पों को पुनर्जीवित करने और उन्हें बाजार में लाने में मदद की है।