शेखपुरा के अशोक कुमार ने पीएमईजीपी के जरिए बदल दी अपनी जिंदगी
सारांश
मुख्य बातें
पटना, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के शेखपुरा जिले के निवासी अशोक कुमार, जो पहले एक छोटी सी दुकान से ही अपने परिवार का गुजारा करते थे, अब प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना (पीएमईजीपी) के माध्यम से अपनी दुकान को सफलतापूर्वक बढ़ा चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे पीएम मोदी के आभारी हैं, जिनकी सरकार ने इस लाभकारी योजना को शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप आज उनका व्यवसाय काफी बढ़ गया है।
शेखपुरा जिले के कसार गांव में रहने वाले अशोक कुमार ने पीएमईजीपी का लाभ उठाकर और अपनी मेहनत से अपने जीवन की दिशा को बदल दिया। शुरूआत में उनकी दुकान बहुत छोटी थी, जिसके कारण उनकी आमदनी भी सीमित थी और परिवार का खर्च चलाना बहुत मुश्किल था। हालांकि, अशोक कुमार ने कभी हार नहीं मानी।
जब उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना (पीएमईजीपी) के बारे में जानकारी मिली, तो उन्होंने तय किया कि वे अपनी दुकान का विस्तार करेंगे और योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन किया। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें योजना का लाभ मिला।
अपना लाभ उठाते हुए उन्होंने अपनी छोटी दुकान को एक बड़े फर्नीचर गोदाम में बदल दिया। अब उनके पास केवल कुर्सी-टेबल ही नहीं, बल्कि अलमारी, सोफा सेट, ऑफिस फर्नीचर जैसे विभिन्न सामान भी बनाए जा रहे हैं। शेखपुरा के आस-पास के क्षेत्रों से लोग बड़ी संख्या में उनके गोदाम पर खरीदारी के लिए आने लगे हैं। गोदाम खुलने के बाद अशोक कुमार की आमदनी में काफी वृद्धि हुई है। पहले जहां वे सीमित आय में जूझ रहे थे, वहीं अब उनकी कमाई में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में अशोक कुमार ने कहा कि अब उनके जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आया है। यह बदलाव सिर्फ प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना (पीएमईजीपी) के कारण संभव हुआ है। अगर यह योजना उनके पास नहीं आई होती, तो वे आज भी अपनी छोटी सी दुकान ही चला रहे होते। पीएम मोदी का आभार, जिन्होंने इस योजना की शुरुआत की। यह योजना हमारे जैसे छोटे दुकानदारों के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रही है, क्योंकि हर किसी के मन में कुछ करने की जिज्ञासा होती है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे कुछ नहीं कर पाते हैं। ऐसे में यह योजना बहुत सहायक साबित हुई है।
अशोक कुमार ने पीएम मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह योजना हम जैसे युवाओं के लिए बेहद सकारात्मक पहल है। इससे गाँव के युवा भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं और अपने शहर में ही उद्योग स्थापित कर सकते हैं।