कृष्णा आशीष: पीएमईजीपी योजना से संघर्ष की कहानी से स्वरोजगार की नई दिशा
सारांश
Key Takeaways
- कृष्णा आशीष ने पीएमईजीपी योजना से अपने व्यवसाय को बढ़ाया।
- उन्होंने आर्थिक संकट का सामना कर संघर्ष किया।
- उनके उत्पादों की मांग विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ रही है।
- योजना ने रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं।
- कृष्णा आशीष का अनुभव अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा है।
भागलपुर, 15 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना ने युवाओं के लिए एक वरदान साबित होकर उनके जीवन में नई दिशा दी है। इसी कड़ी में, बिहार के कृष्णा आशीष ने न केवल अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाया है, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार देने में सफल रहे हैं।
भागलपुर जिले के मोजाहिदपुर थाना क्षेत्र के काजीचक के निवासी, कृष्णा आशीष ने संघर्ष और आत्मविश्वास के माध्यम से अपने व्यवसाय को एक नई पहचान प्रदान की है। वर्ष 2017 में उन्होंने फाइबर और फ्लावर से सजावटी सामान बनाने का व्यवसाय प्रारंभ किया था।
शुरुआत में उनका काम क्रमिक गति से बढ़ रहा था, लेकिन कोरोना काल के दौरान एक दुर्घटना और आर्थिक संकट ने उनके व्यवसाय को गंभीरता से प्रभावित किया। इस कठिन समय में भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने व्यवसाय को फिर से खड़ा करने के लिए संघर्ष किया।
कोरोना के बाद उन्हें यह जानकारी मिली कि पीएमईजीपी योजना के तहत लोन लेकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग आयोग के माध्यम से आवेदन किया।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद, उनका रजिस्ट्रेशन स्वीकृत हुआ और बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा उन्हें ₹9,45,000 का ऋण प्राप्त हुआ। इस वित्तीय सहायता ने उनके व्यवसाय को फिर से गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
लोन मिलने के बाद, कृष्णा आशीष ने अपने फाइबर और फ्लावर से बने डेकोरेशन आइटम के उत्पादन को बढ़ाया। उनके द्वारा तैयार किए जाने वाले सजावटी सामान का उपयोग टेंट, रिसॉर्ट, होटल और बैंक्वेट हॉल में बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
अब उनके उत्पादों की मांग केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह झारखंड के कई जिलों में भी बढ़ चुकी है। झारखंड के गिरिडीह, तीनपहाड़, देवघर, बासुकीनाथ और दुमका के साथ-साथ बिहार के नवगछिया, कटिहार, पूर्णिया, मुंगेर और सीमांचल के अन्य क्षेत्रों में भी उनके उत्पादों की अच्छी मांग है।
कृष्णा आशीष के इस उद्यम ने स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। वर्तमान में, उनके फाइबर और फ्लावर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट में लगभग 12 से 15 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। उन्होंने कहा कि वह अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ-साथ दूसरों को भी रोजगार देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
बिहार में फाइबर से डेकोरेशन आइटम बनाने वाले प्लांटों की संख्या सीमित है। भागलपुर के अलावा पटना, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में भी इस तरह के प्लांट संचालित हो रहे हैं। इस प्रकार, भागलपुर में यह उद्योग स्थानीय स्तर पर सजावटी सामग्री की मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
पीएमईजीपी योजना के लाभार्थी और कृष्णा फाइबर के ऑनर कृष्णा आशीष ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में बताया कि उनका व्यवसाय फाइबर और फ्लावर से सजावटी सामग्री बनाने से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि 2024 में उन्हें एक दुर्घटना का सामना करना पड़ा था, जिससे उनका काम प्रभावित हुआ। इसके बाद कई लोगों ने उन्हें पीएमईजीपी योजना के बारे में बताया। उन्होंने पंजीकरण कराया और बैंक ऑफ इंडिया में खाता खुलवाया। सभी कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें ₹9,45,000 का लोन मिला।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ मिलने के बाद उनके कारोबार में काफी वृद्धि हुई है। अब वह टेंट सजावट से जुड़े सामान, रिसॉर्ट और बैंक्वेट हॉल में उपयोग होने वाले कई प्रकार के डेकोरेशन आइटम तैयार कर रहे हैं। कृष्णा आशीष का कहना है कि पीएमईजीपी योजना बेरोजगार युवाओं के लिए अत्यंत लाभकारी है। इस योजना ने उनके जीवन में नई आशा जगाई है और इसके लिए वह प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हैं।