पीएमईजीपी से बदली शेखपुरा की गौरी कुमारी की तकदीर, सिलाई-हैंडीक्राफ्ट से 20 लोगों को दे रहीं रोज़गार
सारांश
मुख्य बातें
शेखपुरा जिले की महिला उद्यमी गौरी कुमारी और उनके पति ललन पांडे केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) योजना की बदौलत आज आत्मनिर्भर हैं और गाँव के 20 लोगों को रोज़गार दे रहे हैं। सिलाई और हैंडीक्राफ्ट की छोटी शुरुआत अब एक सफल लघु उद्यम का रूप ले चुकी है, जो बिहार के ग्रामीण इलाकों में स्वरोज़गार की एक प्रेरक मिसाल बन गई है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
गौरी कुमारी पहले मार्केटिंग का काम करती थीं, लेकिन आमदनी अनिश्चित थी। उन्होंने बताया, 'मैं मार्केटिंग करती थी, लेकिन उससे घर चलाना मुश्किल था। फिर पीएमईजीपी योजना के बारे में पता चला। मैंने तुरंत आवेदन किया और सिलाई मशीन व हैंडीक्राफ्ट मशीन लेकर काम शुरू किया।'
उनके पति ललन पांडे की कहानी भी उतनी ही चुनौतीपूर्ण रही। वे दिल्ली और गाज़ियाबाद में सिलाई मशीन चलाते थे। 2020 में कोविड महामारी के दौरान काम पूरी तरह ठप हो गया और दोनों गाँव लौट आए। ललन के शब्दों में, 'यहाँ भुखमरी जैसी स्थिति थी। उसी समय पीएमईजीपी की जानकारी मिली। पत्नी के नाम पर लोन लेकर हमने सिलाई और हैंडीक्राफ्ट का काम शुरू किया। आज हम आत्मनिर्भर हैं।'
पीएमईजीपी की भूमिका और योजना की ताकत
ललन पांडे के अनुसार, इस योजना की सबसे बड़ी ताकत सब्सिडी और आसान ऋण है, जिसने उन्हें बिना किसी बड़े जोखिम के उद्यम शुरू करने का हौसला दिया। बैंक और जिला उद्योग केंद्र (डीआईसी) के सहयोग से मशीनें खरीदी गईं और धीरे-धीरे काम खड़ा हुआ। शुरुआत में कच्चे माल, ग्राहकों और पूँजी की दिक्कतें आईं, लेकिन मेहनत से ये सब बाधाएँ पार हो गईं।
यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण बेरोज़गारी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है और केंद्र सरकार की योजनाएँ जमीनी स्तर पर असर दिखाने की कोशिश में हैं।
20 लोगों को रोज़गार, 200 की है योजना
आज गौरी कुमारी की इकाई में करीब 20 महिलाएँ और पुरुष काम कर रहे हैं। उनके यहाँ काम करने वाली माधुरी देवी कहती हैं, 'पहले घर में आमदनी नहीं थी। अब यहाँ सिलाई सीखकर महीने की तनख्वाह मिलती है। गौरी दीदी ने हमें हुनर भी सिखाया और काम भी दिया।'
गौरी कुमारी की आगे की योजनाएँ और भी बड़ी हैं। उन्होंने कहा, 'अगर सरकार से और ऋण सहायता मिले तो हम 200 सिलाई मशीनें लगा सकते हैं। इससे करीब 200 लोगों को रोज़गार मिलेगा। मैं सरकार और प्रशासन से मदद की माँग करती हूँ।'
जिले में बढ़ रही महिला उद्यमिता
जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, शेखपुरा में पीएमईजीपी के तहत पिछले कुछ वर्षों में कई इकाइयाँ स्थापित हुई हैं। सिलाई, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण और हैंडीक्राफ्ट क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। गौरतलब है कि यह योजना विशेष रूप से उन परिवारों के लिए लाभकारी साबित हो रही है जो महामारी के बाद शहरों से लौटे हैं।
युवाओं और महिलाओं से अपील
गौरी और ललन दोनों ने महिलाओं और युवाओं से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं की जानकारी लें। उनका संदेश स्पष्ट है: 'बैंक जाएँ, डीआईसी से मिलें, ट्रेनिंग लें। खुद का काम शुरू करें। नौकरी के पीछे भागने से बेहतर है कि हम खुद 10 लोगों को रोज़गार दें।' दोनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया और कहा कि पीएमईजीपी जैसी योजनाएँ गरीब और बेरोज़गार परिवारों के लिए वरदान हैं।
शेखपुरा की यह कहानी दर्शाती है कि सही योजना, सही सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर किस तरह एक परिवार की तकदीर बदल सकती है — और साथ में पूरे गाँव को भी रोशनी दे सकती है।