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लखपति दीदी योजना: सरगुजा के ग्राम पूटा की अनीता और समीरा बनीं स्वरोजगार की मिसाल

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लखपति दीदी योजना: सरगुजा के ग्राम पूटा की अनीता और समीरा बनीं स्वरोजगार की मिसाल

सारांश

सरगुजा के ग्राम पूटा में लखपति दीदी योजना ने दो महिलाओं की ज़िंदगी पलट दी — अनीता शौचालय संचालन से नियमित कमाई कर रही हैं, समीरा की किराना दुकान से ₹10,000 मासिक आय हो रही है। दोनों ने स्कूटी खरीदी, बच्चों को पढ़ा रही हैं — यही है ज़मीनी सशक्तिकरण।

मुख्य बातें

लखपति दीदी योजना के तहत सरगुजा के ग्राम पूटा की अनीता प्रजापति और समीरा सिंह ने 'ज्योति समूह' से जुड़कर स्वरोजगार की शुरुआत की।
अनीता प्रजापति को जिला पंचायत के सहयोग से गांव के सामुदायिक शौचालय के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई।
समीरा सिंह को निःशुल्क दुकान उपलब्ध कराई गई; किराना दुकान से हर माह लगभग ₹10,000 की आय हो रही है।
दोनों महिलाओं ने अपनी कमाई से स्कूटी खरीदी और अब बच्चों की शिक्षा व घर का खर्च खुद उठा रही हैं।
गांव में किराना दुकान न होने की समस्या हल हुई; पर्यटक स्थल के निकट शौचालय सुविधा से स्थानीय स्वच्छता भी सुदृढ़ हुई।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लखपति दीदी योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक स्वावलंबन का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। ग्राम पूटा की अनीता प्रजापति और समीरा सिंह ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार की राह चुनी और आज दोनों अपनी कमाई से परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। यह बदलाव उस योजना की ज़मीनी सफलता की कहानी है जो देश की करोड़ों ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लक्ष्य के साथ शुरू की गई थी।

कैसे मिला स्वरोजगार का रास्ता

अनीता प्रजापति ने बताया कि कुछ समय पहले तक वे पूरी तरह घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं और आर्थिक तंगी के कारण कोई स्वरोजगार शुरू करना संभव नहीं था। जिला पंचायत के माध्यम से उन्हें महिला स्वयं सहायता समूहों की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने साथी समीरा सिंह के साथ मिलकर 'ज्योति समूह' से जुड़कर ऋण लिया और रोजगार की शुरुआत की।

अनीता ने कहा, 'ज्योति समूह' के माध्यम से हमें रोजगार मिला। सामुदायिक शौचालय और दुकान जैसी सुविधाओं से न केवल हमें आय का अवसर मिला, बल्कि लोगों को भी सुविधा मिली है। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

अनीता को मिली शौचालय संचालन की जिम्मेदारी

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के सहयोग से अनीता प्रजापति को गांव के सामुदायिक शौचालय के संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे उन्हें नियमित आय का स्रोत मिला और साथ ही गांव की स्वच्छता व्यवस्था भी सुदृढ़ हुई।

अनीता ने बताया कि गांव के पास दर्शनीय स्थल होने के कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं, जिससे शौचालय सुविधा की मांग बनी रहती है। इससे रोजगार के साथ-साथ पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भी बेहतर सुविधा मिल रही है।

समीरा की किराना दुकान से बदली गांव की तस्वीर

समीरा सिंह को जिला पंचायत की ओर से निःशुल्क दुकान उपलब्ध कराई गई, जहाँ उन्होंने किराना दुकान शुरू की। इससे पहले गांव में बड़ी किराना दुकान न होने के कारण ग्रामीणों को आवश्यक सामान के लिए दूर जाना पड़ता था।

समीरा के अनुसार, दुकान से उन्हें हर महीने लगभग ₹10,000 की आय हो रही है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हुई है। अब ग्रामीणों को ज़रूरी सामान के लिए स्थानीय स्तर पर ही विकल्प मिल रहा है।

आम जनता पर असर

दोनों महिलाओं का कहना है कि पहले हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए उन्हें अपने पति पर निर्भर रहना पड़ता था। अब वे अपनी कमाई से घर का खर्च चलाने, बच्चों की पढ़ाई कराने और भविष्य की योजनाएं बनाने में सक्षम हैं। अपनी आय से दोनों महिलाओं ने स्कूटी भी खरीदी है, जिससे उनका आवागमन सुगम हो गया है।

क्या होगा आगे

सरगुजा में लखपति दीदी योजना की यह सफलता अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है। स्वयं सहायता समूहों के विस्तार और जिला पंचायत के सक्रिय सहयोग से यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में और अधिक महिलाएं इस तरह के स्वरोजगार से जुड़कर आर्थिक स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

शौचालय संचालन की जिम्मेदारी — पर टिकी हैं, जो हर जिले में एकसमान नहीं होता। असली सवाल यह है कि क्या यह मॉडल बिना प्रशासनिक सक्रियता के भी टिकाऊ है, और क्या ₹10,000 मासिक आय वाकई 'लखपति' की परिभाषा पूरी करती है।
RashtraPress
23 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखपति दीदी योजना क्या है?
लखपति दीदी योजना केंद्र सरकार की एक पहल है जिसके तहत ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ऋण, प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जाते हैं, ताकि वे सालाना कम से कम ₹1 लाख की आय अर्जित कर सकें। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
सरगुजा में लखपति दीदी योजना से किन महिलाओं को फायदा हुआ?
सरगुजा जिले के ग्राम पूटा की अनीता प्रजापति और समीरा सिंह ने 'ज्योति समूह' से जुड़कर इस योजना का लाभ उठाया। अनीता को सामुदायिक शौचालय संचालन की जिम्मेदारी मिली और समीरा ने किराना दुकान शुरू की।
समीरा सिंह की दुकान से कितनी आय हो रही है?
समीरा सिंह को अपनी किराना दुकान से हर महीने लगभग ₹10,000 की आय हो रही है। जिला पंचायत ने उन्हें निःशुल्क दुकान उपलब्ध कराई थी।
इन महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने में किसने मदद की?
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) के सहयोग से दोनों महिलाओं को अलग-अलग रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए। 'ज्योति समूह' स्वयं सहायता समूह के माध्यम से उन्हें ऋण भी मिला।
इस योजना से ग्रामीण समुदाय पर क्या असर पड़ा?
समीरा की किराना दुकान खुलने से ग्रामीणों को ज़रूरी सामान के लिए दूर नहीं जाना पड़ता। अनीता द्वारा संचालित सामुदायिक शौचालय से गांव में स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ हुई और पर्यटकों को भी सुविधा मिली।
राष्ट्र प्रेस
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