क्या छत्तीसगढ़ की ड्रोन दीदी शांति विश्वकर्मा महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बनीं?
सारांश
मुख्य बातें
राजनांदगांव, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित अछोली गांव में महिला सशक्तिकरण और कृषि नवाचार का एक अद्वितीय उदाहरण देखने को मिल रहा है। यहां नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत खेतों में नैनो यूरिया और कीटनाशकों का छिड़काव ड्रोन तकनीक की सहायता से किया जा रहा है। यह योजना न केवल कृषि कार्यों को आधुनिक बना रही है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।
अछोली गांव की शांति विश्वकर्मा ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में किसानों की सहायता कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं। भारत सरकार की इस योजना के तहत महिलाओं को ड्रोन उड़ाने का तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे उन्हें नए रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। ड्रोन के माध्यम से छिड़काव से किसानों का समय, श्रम और लागत में काफी बचत होती है, जबकि फसल पर कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी अधिक प्रभावी ढंग से होता है।
शांति विश्वकर्मा जैसी ड्रोन दीदियों की बदौलत जिले में कृषि कार्यों का तरीका बदल रहा है। शांति एक एकड़ में धान की फसल पर 300 रुपए लेती हैं, जबकि अन्य फसलों के लिए अलग दरें निर्धारित हैं। उनकी बढ़ती आय ने उन्हें ‘लखपति दीदी’ बना दिया है, और अब वह अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी इस योजना से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही हैं।
केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से शांति को लगभग 15 लाख रुपए मूल्य का उपकरण मुफ्त में प्रदान किया गया है, जिसमें 10 लाख रुपए का ड्रोन और 5 लाख रुपए का वाहन शामिल है। इसी वाहन की मदद से वह जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर ड्रोन के जरिए स्प्रे सेवाएं प्रदान कर रही हैं।
ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य कृषि में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और तकनीक के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। अछोली गांव में शांति विश्वकर्मा की सफलता यह दर्शाती है कि सही प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग के साथ ग्रामीण महिलाएं भी आधुनिक तकनीक की अग्रदूत बन सकती हैं और खेती के तरीकों में बदलाव कर सकती हैं।
शांति विश्वकर्मा ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि मुझे महिला समूह से जुड़े हुए लगभग 15 वर्ष हो गए हैं और मैं समूह की अध्यक्ष भी हूं। समूह से पता चला था कि ड्रोन पायलट के प्रशिक्षण के लिए जाना है। समूह में चर्चा के बाद मुझे प्रशिक्षण के लिए चुना गया। इससे पहले भी मेरा अचार-पापड़ का कारोबार था। ग्वालियर में 15 दिनदो साल से काम कर रही हूं। मुझे ऑर्डर भी बहुत मिलते हैं, क्योंकि मेरा यूट्यूब चैनल भी चल रहा है। पूरा परिवार मेरी मदद करता है। रोजाना लगभग 10 से 20 एकड़ खेतों में नैनो यूरिया और कीटनाशकों का छिड़काव कर रही हूं।
शांति विश्वकर्मा ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देना चाहती हैं कि उन्होंने देश की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। हर क्षेत्र में महिलाएं आगे बढ़ रही हैं। हमारी छत्तीसगढ़ सरकार ने भी कई योजनाएं चलाई हैं। सभी महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, चाहे वह घर में बैठकर काम कर रही हों या बाहर जाकर।