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भोपाल सीबीआई कोर्ट का फैसला: बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी में पूर्व मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी समेत दो को 7 साल की सजा

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भोपाल सीबीआई कोर्ट का फैसला: बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी में पूर्व मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी समेत दो को 7 साल की सजा

सारांश

भोपाल की सीबीआई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और निजी व्यक्ति मोहन सिंह सोलंकी को 7 साल की कठोर कैद सुनाई। दोनों ने मिलकर 2013 में जाली आरटीजीएस दस्तावेजों के ज़रिए ₹22 लाख का गबन किया था — एक दशक बाद आया यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में आंतरिक साजिश पर कड़े न्यायिक रुख का प्रतीक है।

मुख्य बातें

भोपाल की सीबीआई कोर्ट ने 8 जुलाई 2026 को बैंक धोखाधड़ी मामले में दो दोषियों को 7 साल की कठोर कारावास सुनाई।
दोषियों में बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा के पूर्व सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और मोहन सिंह सोलंकी शामिल हैं।
दोनों ने 21 नवंबर 2013 को जाली आरटीजीएस फॉर्म व वाउचर के ज़रिए ₹22 लाख की धोखाधड़ी की थी।
राशि सनी एंटरप्राइजेज के खाते से निकालकर गोल्ड फ्लाई ऐश फर्म के खाते में ट्रांसफर की गई थी।
सीबीआई ने 25 जनवरी 2016 को मामला दर्ज किया था; दोनों पर ₹60,000 का जुर्माना भी लगाया गया है।

भोपाल की सीबीआई कोर्ट ने बुधवार, 8 जुलाई 2026 को बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी मामले में दो दोषियों को सात वर्ष की कठोर कारावास (आरआई) और ₹60,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। दोषियों में बैंक ऑफ इंडिया की मिसरोद शाखा, भोपाल के तत्कालीन सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और निजी व्यक्ति मोहन सिंह सोलंकी शामिल हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 25 जनवरी 2016 को दर्ज किया गया था, जब बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस, भोपाल के तत्कालीन डिप्टी जोनल मैनेजर ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पीयूष चतुर्वेदी ने 21 नवंबर 2013 को धोखाधड़ी और बेईमानी से सनी एंटरप्राइजेज के नाम पर ₹30 लाख का टर्म लोन और कैश क्रेडिट लिमिट स्वीकृत की।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई धोखाधड़ी

लोन स्वीकृति के उसी दिन, जाली और मनगढ़ंत आरटीजीएस फॉर्म और वाउचर के आधार पर सनी एंटरप्राइजेज के खाते से ₹22 लाख की राशि आरटीजीएस ट्रांजेक्शन के ज़रिए निकाली गई। यह रकम सीधे आरोपी मोहन सिंह सोलंकी की फर्म गोल्ड फ्लाई ऐश के खाते में स्थानांतरित कर दी गई। दोनों आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत इस राशि का गबन किया, जिससे बैंक को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।

जांच और चार्जशीट

सीबीआई ने मामले की विस्तृत जांच पूरी करने के बाद पीयूष चतुर्वेदी और मोहन सिंह सोलंकी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की। लंबे ट्रायल के बाद अदालत ने दोनों को दोषी करार दिया। गौरतलब है कि यह मामला लगभग एक दशक पुराना है और इसमें बैंकिंग प्रणाली के भीतर से ही साजिश रची गई थी।

कोर्ट का फैसला

भोपाल की सीबीआई कोर्ट ने दोनों दोषियों को सात वर्ष की कठोर कारावास और ₹60,000 का जुर्माना लगाया। यह फैसला बैंकिंग क्षेत्र में आंतरिक मिलीभगत से होने वाली धोखाधड़ी पर सख्त न्यायिक रुख का संकेत देता है।

आम जनता और बैंकिंग क्षेत्र पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब बैंक धोखाधड़ी के मामलों में बैंककर्मियों की संलिप्तता एक गंभीर चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फैसले बैंकिंग प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। आगे यह देखना होगा कि क्या बैंक ऑफ इंडिया नुकसान की भरपाई के लिए सिविल कार्रवाई भी करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भीतर से होती है। मामला दर्ज होने से सजा तक लगभग एक दशक का समय लगना न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति पर सवाल उठाता है — जो खुद एक बड़ी चुनौती है। सीबीआई की सक्रियता सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि बैंकों के आंतरिक ऑडिट तंत्र ऐसी साजिशों को शुरुआत में ही क्यों नहीं पकड़ पाते। जब तक बैंकिंग निगरानी तंत्र में संरचनात्मक सुधार नहीं होते, ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोपाल सीबीआई कोर्ट ने बैंक धोखाधड़ी मामले में किसे सजा सुनाई?
सीबीआई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया, मिसरोद शाखा के पूर्व सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और निजी व्यक्ति मोहन सिंह सोलंकी को 7 साल की कठोर कारावास और ₹60,000 जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला 8 जुलाई 2026 को आया।
बैंक ऑफ इंडिया धोखाधड़ी में कितनी राशि का गबन किया गया था?
आरोपियों ने जाली आरटीजीएस फॉर्म और वाउचर के ज़रिए सनी एंटरप्राइजेज के खाते से ₹22 लाख निकालकर गोल्ड फ्लाई ऐश फर्म के खाते में ट्रांसफर किए थे। यह धोखाधड़ी 21 नवंबर 2013 को हुई थी।
यह मामला सीबीआई के पास कब और कैसे पहुँचा?
बैंक ऑफ इंडिया के जोनल ऑफिस, भोपाल के तत्कालीन डिप्टी जोनल मैनेजर की लिखित शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 25 जनवरी 2016 को यह मामला दर्ज किया था। जांच पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई।
इस मामले में आपराधिक साजिश कैसे रची गई थी?
पीयूष चतुर्वेदी ने सनी एंटरप्राइजेज के नाम पर ₹30 लाख का टर्म लोन और कैश क्रेडिट लिमिट मंजूर की, फिर उसी दिन जाली दस्तावेजों के ज़रिए ₹22 लाख मोहन सिंह सोलंकी की फर्म में ट्रांसफर कर दिए। दोनों ने मिलकर आपराधिक साजिश के तहत बैंक को नुकसान पहुँचाया।
बैंक धोखाधड़ी में दोषियों को क्या सजा मिली?
भोपाल की सीबीआई कोर्ट ने दोनों दोषियों को 7 साल की कठोर कारावास (रिगरस इम्प्रिजनमेंट) और कुल ₹60,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है। ट्रायल के बाद अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया था।
राष्ट्र प्रेस
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