भोपाल बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, पूर्व प्रबंधक और एक अन्य को सजा
सारांश
Key Takeaways
- सीबीआई कोर्ट ने धोखाधड़ी के आरोपियों को 7 साल की सजा दी।
- बैंक को 27 लाख रुपये का नुकसान हुआ।
- आरोपियों पर 60,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।
- यह मामला 2016 में शुरू हुआ था।
- कोर्ट ने आम जनता के विश्वास को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भोपाल, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हाल ही में सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इस निर्णय में बैंक ऑफ इंडिया की मिसरौद शाखा के पूर्व सीनियर ब्रांच मैनेजर और एक निजी व्यक्ति को जेल भेजा गया है। इसके साथ ही उन पर जुर्माना भी लगाया गया है।
जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल को कोर्ट ने पूर्व सीनियर ब्रांच मैनेजर पीयूष चतुर्वेदी और मोहन सिंह सोलंकी को दोषी ठहराते हुए सात साल की कड़ी सजा सुनाई। इसके अलावा, दोनों पर 60,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला 2016 में दर्ज हुआ था, जब बैंक के तत्कालीन डिप्टी जोनल मैनेजर ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पीयूष चतुर्वेदी ने जानबूझकर और धोखाधड़ी से मेसर्स विजन कंप्यूटर के नाम पर 27 लाख रुपए का टर्म लोन मंजूर किया और फिर मोहन सिंह सोलंकी के साथ मिलकर इस पैसे को मेसर्स अजब कुमार इंडस्ट्रीज के खाते में ट्रांसफर कर दिया, जो कि मोहन सिंह की पत्नी के नाम था।
कोर्ट के अनुसार, दोनों आरोपियों ने इस राशि का गलत प्रयोग किया और बैंक को बड़ा नुकसान पहुंचाया। इस दौरान उन्हें व्यक्तिगत लाभ हुआ, जबकि बैंक को वित्तीय हानि हुई। सीबीआई ने इस मामले की गहन जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की और कोर्ट में मामला दायर किया।
कोर्ट ने सबूतों और गवाहों की बातों को ध्यान में रखते हुए फैसला सुनाया और दोनों आरोपियों को 7 साल की जेल की सजा सुनाई। साथ ही, 60,000 रुपए का भारी जुर्माना भी लगाया गया।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकार के बैंक फ्रॉड में शामिल लोग न केवल बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि आम जनता का विश्वास भी तोड़ते हैं। इसी कारण पीयूष चतुर्वेदी और मोहन सिंह सोलंकी को कड़ी सजा दी गई।