क्या होम लोन धोखाधड़ी के मामले में पुणे बैंक के पूर्व अधिकारियों को मिली सजा?
सारांश
Key Takeaways
- सीबीआई ने दो पूर्व बैंक अधिकारियों को दोषी ठहराया।
- धोखाधड़ी में जाली दस्तावेजों का उपयोग हुआ।
- कुल नुकसान 24.54 लाख रुपए का हुआ।
- सजा की अवधि तीन से दो वर्ष रही।
- इस मामले ने वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा को फिर से जांचने की आवश्यकता को उजागर किया।
पुणे, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। होम लोन धोखाधड़ी के मामले में पुणे की एक विशेष सीबीआई अदालत ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के दो पूर्व अधिकारियों और एक सह-ऋणदाता को तीन से दो वर्ष की सजा सुनाई है। यह जानकारी एक अधिकारी ने रविवार को दी।
सीबीआई ने अपने बयान में कहा कि विशेष अदालत ने शनिवार को पुणे की पिंपरी शाखा के तत्कालीन सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंधक नंदकिशोर खैरनार और सहायक प्रबंधक रवि भूषण प्रसाद को तीन वर्ष की कठोर जेल और 75,000 रुपए का जुर्माना लगाया।
इसके साथ ही, अदालत ने अपने पति के साथ 18.75 लाख रुपए के होम लोन के लिए आवेदन करने वाली प्रियंका प्रशांत विस्पुते को दो वर्ष की कठोर जेल और 25,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
विशेष न्यायालय ने तीनों दोषियों को जाली दस्तावेजों का उपयोग कर लोन स्वीकृत कराने के लिए दोषी ठहराया, जिससे सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की पिंपरी शाखा को 24.54 लाख रुपए का नुकसान हुआ।
सीबीआई ने 17 फरवरी, 2016 को सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व सहायक महाप्रबंधक राकेश जायसवाल और अन्य ऋणकर्ताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया।
जांच के बाद, विभिन्न साजिशों के लिए छह आरोपपत्र दायर किए गए हैं।
एक विशेष मामले में आरोप था कि राकेश जायसवाल, प्रशांत लक्ष्मण विस्पुते (ऋण लेने वाला), प्रियंका प्रशांत विस्पुते (सह-ऋण लेने वाली), नंदकिशोर खैरनार, और रवि भूषण प्रसाद ने जाली दस्तावेजों के आधार पर आवास ऋण स्वीकृत करने के मामले में आपराधिक साजिश रची थी।
मुकदमे के दौरान दो आरोपियों, सहायक प्रबंधक राकेश जायसवाल और प्रशांत लक्ष्मण विस्पुते की मृत्यु हो गई और उनके खिलाफ आरोप समाप्त कर दिए गए।