300 से अधिक फिल्मों के लिए एक हजार से ज्यादा गीत, संघर्ष से शुरू हुआ इंदीवर का अद्भुत सफर
सारांश
Key Takeaways
- इंदीवर ने 300 से अधिक फिल्मों के लिए एक हजार से ज्यादा गीत लिखे।
- उनके गीतों में सरलता और भावनाओं की गहराई होती है।
- उन्होंने कई देशभक्ति गीत भी लिखे हैं।
- इंदीवर की सबसे प्रभावशाली जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के साथ बनी।
- उनकी पुण्यतिथि 27 फरवरी को होती है।
नई दिल्ली, 26 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। श्यामलाल बाबू राय हिंदी सिनेमा के सबसे प्रतिभाशाली गीतकारों में से एक माने जाते हैं, जिनके अद्भुत गीत आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं। उनके शानदार गीतों ने लाखों लोगों को छुआ है और उन्हें इंदीवर के नाम से सम्मानित किया जाता है। चार दशकों के इस लंबे सफर में, इंदीवर ने 300 से अधिक फिल्मों के लिए एक हजार से ज्यादा अमर गीत लिखे।
इंदीवर के शब्दों में सरलता, भावनाओं की गहराई, और जीवन की सच्चाई की झलक है, जो आज भी ताजगी से गूंजते हैं। उनके गीत केवल संगीत नहीं, बल्कि भावनाओं का एक अमर संग्रह हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के साथ रहेंगे। हिंदी सिनेमा के इस अद्वितीय गीतकार की पुण्यतिथि 27 फरवरी को मनाई जाती है।
इंदीवर का जन्म उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बरुआ सागर कस्बे में हुआ था। बचपन से ही उन्हें कविता और गीत लेखन का शौक था। स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में उन्होंने आजाद के नाम से कई देशभक्ति गीत लिखे। विवाह के बाद, उन्होंने मुंबई में अपना सफर शुरू किया और कठिनाईयों का सामना किया। 1946 में फिल्म ‘डबल फेस’ के लिए उनका पहला गीत था, लेकिन फिल्म ज्यादा सफल नहीं रही। असली पहचान उन्हें 1951 में फिल्म ‘मल्हार’ से मिली, जहाँ उनका गीत 'बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी कसम' हिट हुआ। 1963 में बाबूभाई मिस्त्री की फिल्म ‘पारस मणि’ में उनका गीत 'ओ नाजुक हो, नाज से भी तुम प्यार से भी प्यारी' जबरदस्त लोकप्रिय हुआ। इसके बाद उनका सफर थमा नहीं।
इंदीवर की सबसे प्रभावशाली जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के साथ बनी। मनोज कुमार की फिल्मों 'उपकार' और ‘पूरब और पश्चिम’ में उनके गीतों ने देशभक्ति और सामाजिक संदेश को खूबसूरती से पिरोया। 'अभी तुमको मेरी जरूरत नहीं' जैसे गीत आज भी सुनने वालों को भावुक कर देते हैं। राकेश रोशन की फिल्मों में भी इंदीवर ने कमाल किया। ‘कामचोर’, ‘खुदगर्ज’, ‘खून भरी मांग’, ‘काला बाजार’, ‘किशन कन्हैया’, ‘करण अर्जुन', और ‘कोयला’ जैसी फिल्मों के गीतों ने दर्शकों के दिल जीते।
उत्तम कुमार और शर्मिला टैगोर की फिल्म ‘अमानुष’ में 'दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा' गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। इंदीवर केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहे; उन्होंने पॉप सिंगर नाजिया हसन और जोहैब हसन के लिए भी गीत लिखे। नाजिया के 'आप जैसा कोई', 'बूम बूम', और 'चंदन सा बदन' जैसे गीतों ने युवाओं पर गहरा असर छोड़ा।
इंदीवर ने ‘दिल ने पुकारा’, ‘सरस्वती चंद्र’, ‘यादगार’, ‘सफर’, ‘सच्चा झूठा’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘धर्मात्मा’, ‘हेरा फेरी’, ‘डॉन’, ‘कुर्बानी’, ‘कलाकार’ जैसी दर्जनों फिल्मों में अमर गीत दिए। उनके शब्दों में सरलता और गहराई का अनोखा मेल था।
27 फरवरी 1997 को इंदीवर इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनके गीत आज भी जीवित हैं।