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खड़गे की PM मोदी पर विवादित टिप्पणी: कोलकाता के नागरिकों ने बताया 'व्यक्तिगत हमला', जताया कड़ा विरोध

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खड़गे की PM मोदी पर विवादित टिप्पणी: कोलकाता के नागरिकों ने बताया 'व्यक्तिगत हमला', जताया कड़ा विरोध

सारांश

कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे की PM मोदी पर विवादित टिप्पणी ने कोलकाता के आम नागरिकों को नाराज़ किया — रीना दास रॉय से लेकर चंद्रिमा सिंह तक, सभी ने बिना किसी दलीय पक्ष के इसे 'ओछी राजनीति' और प्रधानमंत्री पद की गरिमा के विरुद्ध बताया।

मुख्य बातें

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की PM नरेंद्र मोदी पर की गई विवादास्पद टिप्पणी के खिलाफ कोलकाता में नागरिकों ने नाराजगी जताई।
रीना दास रॉय ने टिप्पणी को गलत बताया और कहा कि किसी के पिता को लेकर ऐसी बात उचित नहीं।
रमेश ने इसे 'ओछी राजनीति' करार देते हुए कहा कि इसी राजनीतिक संस्कृति के कारण कांग्रेस का प्रभाव कम हुआ है।
नागरिकों ने प्रधानमंत्री पद को संवैधानिक पद बताते हुए कहा कि उन पर व्यक्तिगत हमला 'देश का अपमान' है।
चंद्रिमा सिंह और रोहित सिंह समेत कई लोगों ने बिना किसी दलीय आधार के इस टिप्पणी की निंदा की।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदर्भ में की गई विवादास्पद टिप्पणी को लेकर कोलकाता के आम नागरिकों ने 26 अक्टूबर 2026 को तीखी प्रतिक्रिया जताई। कई लोगों ने खड़गे के बयान को व्यक्तिगत हमला और लोकतांत्रिक मर्यादा का उल्लंघन करार दिया। नागरिकों का कहना है कि राजनीतिक विरोध और आलोचना लोकतंत्र का अभिन्न हिस्सा है, परंतु किसी नेता के परिवार को निशाना बनाना राजनीतिक शालीनता की सीमाएँ तोड़ता है।

नागरिकों की प्रतिक्रिया

कोलकाता निवासी रीना दास रॉय ने कहा कि एक आम नागरिक के नाते वह इस तरह की टिप्पणी को पूरी तरह गलत मानती हैं। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री भारत के हैं और लोग उन्हें बहुत सम्मान देते हैं — किसी के पिता को लेकर इस तरह बोलना उचित नहीं है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना सरासर गलत है।

रमेश ने कहा कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं, परंतु प्रधानमंत्री के पिता को लेकर की गई टिप्पणी 'ओछी राजनीति' का उदाहरण है। उन्होंने किसी राजनीतिक दल का पक्ष लिए बिना कहा कि इसी तरह की राजनीतिक संस्कृति के कारण कांग्रेस का देशभर में प्रभाव घटा है।

प्रधानमंत्री पद की गरिमा का सवाल

रमेश ने प्रधानमंत्री पद को संवैधानिक पद बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री किसी एक दल के नहीं, पूरे देश के होते हैं। उनके अनुसार, 'प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत हमला केवल एक व्यक्ति का नहीं, पूरे देश का अपमान है।' एक अन्य युवक ने प्रधानमंत्री को 'देश के लोगों का अभिभावक' बताते हुए कहा कि उनके पिता को लेकर इस तरह की टिप्पणी 'शर्मनाक' है और उनकी यह प्रतिक्रिया किसी दल के समर्थन पर नहीं, बल्कि सामान्य मानवीय मर्यादा पर आधारित है।

सम्मान और असहमति के बीच की रेखा

रोहित सिंह ने कहा कि राजनीतिक दल कोई भी हो, देश के प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान होना चाहिए। उनके मुताबिक, 'प्रधानमंत्री को स्वीकार न करना या उनसे असहमत होना अलग बात है, लेकिन इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी करना गलत है।'

चंद्रिमा सिंह ने भी इस व्यक्तिगत हमले को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियों का आम लोगों पर भी नकारात्मक असर पड़ता है, क्योंकि बहुत से लोग प्रधानमंत्री मोदी को सम्मान देते हैं। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन इस तरह की बातों से जनता में नाराजगी फैलती है।

व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय राजनीति में व्यक्तिगत आरोपों और पारिवारिक मामलों को चुनावी हथियार बनाने की प्रवृत्ति पर बहस तेज है। गौरतलब है कि अतीत में भी विभिन्न दलों के नेताओं के परिवारों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी हुई है, जिसे हर बार जनता ने नकारात्मक रूप से लिया है। नागरिकों की यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि मतदाता नीति-आधारित विरोध और व्यक्तिगत हमले के बीच स्पष्ट अंतर करते हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि खड़गे अपने बयान पर कोई स्पष्टीकरण देते हैं या नहीं, और क्या कांग्रेस इस विवाद से पैदा हुई राजनीतिक क्षति को सीमित कर पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ विपक्ष परंपरागत रूप से मजबूत रहा है, इस तरह की प्रतिक्रिया यह संकेत देती है कि मतदाता 'एंटी-मोदी' और 'एंटी-पर्सनल अटैक' के बीच फर्क करते हैं। कांग्रेस के लिए असली खतरा यह है कि जब वह व्यक्तिगत हमलों पर उतरती है, तो नीतिगत विकल्प की बातें पीछे छूट जाती हैं। जवाबदेही की राजनीति और अपमान की राजनीति के बीच की यह लकीर लोकतांत्रिक संस्कृति की असली परीक्षा है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मल्लिकार्जुन खड़गे ने PM मोदी के बारे में क्या विवादित टिप्पणी की?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार, विशेष रूप से उनके पिता को लेकर एक विवादास्पद टिप्पणी की, जिसे नागरिकों ने व्यक्तिगत हमला बताया। इस टिप्पणी की सटीक भाषा को लेकर सियासी हलकों में तीखी बहस छिड़ गई है।
कोलकाता के लोगों ने खड़गे की टिप्पणी पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कोलकाता के नागरिकों — रीना दास रॉय, रमेश, रोहित सिंह और चंद्रिमा सिंह सहित — ने बिना किसी दलीय पक्ष के इस टिप्पणी की निंदा की। उन्होंने इसे 'ओछी राजनीति', 'प्रधानमंत्री पद का अपमान' और 'देश का अपमान' बताया।
क्या यह विवाद किसी एक राजनीतिक दल के समर्थकों तक सीमित है?
नहीं। प्रतिक्रिया देने वाले नागरिकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी आपत्ति किसी दल के समर्थन या विरोध पर नहीं, बल्कि राजनीतिक मर्यादा पर आधारित है। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री के परिवार पर व्यक्तिगत टिप्पणी हर भारतीय के लिए आपत्तिजनक है।
इस विवाद का कांग्रेस पर क्या असर हो सकता है?
नागरिकों के अनुसार, इस तरह की राजनीतिक संस्कृति के कारण कांग्रेस का देशभर में प्रभाव पहले भी कम हुआ है। आलोचकों का कहना है कि व्यक्तिगत हमलों पर केंद्रित राजनीति नीतिगत विकल्प की चर्चा को पीछे धकेल देती है, जो दीर्घकालिक रूप से पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
भारतीय लोकतंत्र में राजनीतिक आलोचना और व्यक्तिगत हमले में क्या फर्क है?
नागरिकों ने स्पष्ट किया कि नीतियों पर आलोचना और विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार हैं। लेकिन किसी नेता के परिवार को निशाना बनाना या व्यक्तिगत जीवन पर टिप्पणी करना लोकतांत्रिक मर्यादा का उल्लंघन है, जिसे जनता स्वीकार नहीं करती।
राष्ट्र प्रेस
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