खड़गे की टिप्पणी पर सियासी घमासान: भाजपा ने की कड़ी निंदा, कांग्रेस-विपक्ष ने बताया अनावश्यक विवाद
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता के संदर्भ में की गई टिप्पणी को लेकर 26 अक्टूबर 2026 को देशभर में राजनीतिक विवाद गहरा गया। महाराष्ट्र, बिहार और दिल्ली सहित कई राज्यों के नेताओं ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएँ दीं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे अशोभनीय करार दिया, जबकि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक भाषण का सामान्य हिस्सा बताते हुए विवाद को अनावश्यक कहा।
भाजपा नेताओं की कड़ी निंदा
महाराष्ट्र के नासिक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खड़गे की टिप्पणी की कड़ी भर्त्सना की। उन्होंने कहा कि किसी के माता-पिता के बारे में इस प्रकार बोलना 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' है। शिंदे ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक भी दिन की छुट्टी लिए बिना देश के लिए काम करते हैं, और विपक्ष को उनकी कार्यशैली से ईर्ष्या है।
दिल्ली में भाजपा नेता के. लक्ष्मण ने कहा कि पार्टी खड़गे की इस टिप्पणी की पुरज़ोर निंदा करती है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि खड़गे स्वयं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं — ऐसे में प्रधानमंत्री के पिता के संदर्भ में इस तरह की टिप्पणी उनके पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है। लक्ष्मण ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास जनता से जुड़े ठोस मुद्दों का अभाव है।
महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग में मंत्री नीतेश राणे ने खड़गे के बयान को 'कांग्रेस की खराब मानसिकता का उदाहरण' बताया और कहा कि इस टिप्पणी से पार्टी की 'असली पहचान' सामने आई है।
कांग्रेस और विपक्ष का बचाव
नागपुर में कांग्रेस नेता विजय नामदेवराव वडेट्टीवार ने खड़गे का बचाव करते हुए कहा कि राजनीतिक भाषणों में कही गई हर बात को अपमान नहीं माना जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि खड़गे ने किसी के चरित्र पर टिप्पणी नहीं की और भाजपा इस विवाद को हवा देकर मुख्य मुद्दों से जनता का ध्यान भटका रही है। वडेट्टीवार ने यह भी कहा कि अतीत में भाजपा नेताओं द्वारा महिलाओं के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों पर पार्टी की ओर से ऐसी प्रतिक्रिया नहीं आई थी।
पटना में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक भाई वीरेंद्र ने खड़गे को देश के वरिष्ठ नेता बताते हुए इस घटना को 'जुबान फिसलने' का मामला करार दिया और कहा कि इसे ज़रूरत से ज़्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।
मुंबई में शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि भाजपा ऐसे बयानों पर विवाद खड़ा करने में माहिर है। उन्होंने सवाल किया कि खड़गे ने ऐसा क्या गलत कहा, जिस पर इतनी राजनीति हो रही है।
सावंत ने उठाए अतिरिक्त सवाल
सावंत ने इस विवाद के साथ-साथ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप से पहले प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। सावंत ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान भाजपा से कथित तौर पर जुड़े हरियाणा के एक व्यक्ति ने एक महिला के साथ मारपीट की — हालाँकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे का रुख
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन तथा विपक्ष दोनों आक्रामक रणनीति अपना रहे हैं। गौरतलब है कि इस प्रकार के वाक्-युद्ध मतदान से पहले के हफ्तों में तीव्र होते देखे गए हैं। दोनों पक्षों की बयानबाज़ी से संकेत मिलता है कि यह विवाद आगामी दिनों में और तूल पकड़ सकता है।