खड़गे की PM मोदी के पिता पर टिप्पणी से सियासी बवाल, NDA नेताओं ने कहा — देश का अपमान
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिता को लेकर की गई कथित अशोभनीय टिप्पणी पर 26 अक्टूबर 2026 को राजनीतिक विवाद तेज़ हो गया। बिहार और उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्षों, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसदों और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद सहित एनडीए के कई नेताओं ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए खड़गे से सार्वजनिक माफी की माँग की। आलोचकों का कहना है कि यह टिप्पणी केवल प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि 144 करोड़ भारतीयों का अपमान है।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष की कड़ी प्रतिक्रिया
बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने खड़गे की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बयान में इस्तेमाल की गई भाषा 'अमर्यादित और अत्यंत आपत्तिजनक' है। उनके अनुसार खड़गे को देशवासियों और प्रधानमंत्री से तत्काल क्षमा माँगनी चाहिए।
प्रेम कुमार ने यह भी कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता खड़गे और राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री के प्रति अमर्यादित टिप्पणियाँ करते आए हैं। उनके मुताबिक इस प्रकार की बयानबाज़ी से देशभर में नाराज़गी व्याप्त है।
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष की आलोचना
उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी खड़गे के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस की ओर से 'अनर्गल भाषा' का लगातार प्रयोग किया जा रहा है, जो संसदीय मर्यादा के विरुद्ध है।
महाना ने कहा कि जिन लोगों ने लंबे समय तक देश की सत्ता को अपनी 'बपौती' समझा, जनता अब उन्हें भलीभाँति समझ चुकी है और नकार चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसी बयानबाज़ी विपक्षी नेताओं की 'मानसिक थकान' को दर्शाती है।
NCP सांसद और BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सांसद सुनील दत्तात्रेय तटकरे ने भी खड़गे के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि भारत की संसदीय लोकतांत्रिक प्रणाली मज़बूत सिद्धांतों पर टिकी है और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक संवाद में संयम और मर्यादा अनिवार्य है।
BJP सांसद संजय जायसवाल ने खड़गे पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें कांग्रेस नेतृत्व में महज़ एक 'माध्यम' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अध्यक्ष स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के बजाय निर्देशों के अनुसार बयान देते हैं। जायसवाल ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सीताराम केसरी का उल्लेख करते हुए दावा किया कि कांग्रेस में अध्यक्ष पद पर रहने वालों के साथ भी सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया गया।
BJP सांसद संध्या राय ने कहा कि खड़गे वरिष्ठ नेता हैं और उनके प्रति सम्मान है, किंतु प्रधानमंत्री के बारे में ऐसी टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री देश की 144 करोड़ जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं — उनका अपमान पूरे देश का अपमान है।'
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष की अलग चिंता
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवां ने इस विवाद के बीच 1 नवंबर को प्रस्तावित SIR विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए मतदान के अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि किसी लोकसेवक या संवैधानिक संस्था द्वारा गैरकानूनी काम किया जाए, तो उसे FIR से संरक्षण देना गंभीर सवाल खड़े करता है।
संधवां ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए पंजाब के लोगों द्वारा दिए गए बलिदानों का स्मरण कराते हुए कहा कि मतदान के अधिकार से खिलवाड़ निंदनीय है और ज़िम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीतिक मर्यादा का सवाल
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देश में चुनावी सरगर्मी और विपक्ष-सत्तापक्ष के बीच वाक्युद्ध तेज़ है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी नेताओं के बयानों पर इस तरह की सियासी तकरार छिड़ी हो। NDA के नेताओं ने एकजुट होकर माँग की है कि कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करें और भविष्य में व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचें। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस दबाव के बीच क्या रुख अपनाती है।