खड़गे के मोदी पर बयान से बिहार में सियासी तूफान, BJP और HAM ने माँगी सार्वजनिक माफी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पटना में 25 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार को लेकर दिए गए बयान ने बिहार में तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। बिहार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए खड़गे से सार्वजनिक माफी की माँग की है।
मुख्य घटनाक्रम
बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्री बाबू) की जयंती के कार्यक्रम के दौरान पटना में खड़गे ने प्रधानमंत्री मोदी के पिता को लेकर एक बयान दिया, जिसे विपक्षी दलों ने भी अमर्यादित करार दिया। इस बयान के बाद राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के दलों ने तत्काल प्रतिक्रिया व्यक्त की और माफी की माँग को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया।
BJP की प्रतिक्रिया
संजय सरावगी ने खड़गे के बयान को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और संस्कारहीन राजनीतिक संस्कृति का परिचायक है। उनके अनुसार, 'राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है।'
सरावगी ने आरोप लगाया कि खड़गे का यह बयान राहुल गांधी, सोनिया गांधी और गांधी परिवार की राजनीतिक सोच को ही प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के 140 करोड़ नागरिकों के लोकतांत्रिक जनादेश का प्रतिनिधित्व करते हैं और ऐसी भाषा उस जनादेश का भी अपमान है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) ने कांग्रेस के राजनीतिक आधार को कमज़ोर किया है, इसलिए पार्टी को आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए।
HAM की आपत्ति और माफी की माँग
संतोष कुमार सुमन ने कहा कि श्री बाबू की जयंती जैसे पवित्र अवसर पर प्रधानमंत्री के पिता को लेकर की गई टिप्पणी 'भारतीय लोकतंत्र की गरिमा, सार्वजनिक जीवन की मर्यादा और भारतीय संस्कृति की परंपराओं के अनुकूल नहीं है।' उन्होंने खड़गे से सार्वजनिक रूप से माफी माँगने की अपील की।
सुमन ने कार्यक्रम के आयोजकों से भी इस प्रकरण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने और खेद व्यक्त करने को कहा। उन्होंने कहा कि श्री बाबू जैसे महान नेता की जयंती समाज को प्रेरणा देने और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर है, न कि राजनीतिक कटुता बढ़ाने का।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में आकार ले रही हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी दलों के नेताओं के बयान बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए राजनीतिक अवसर में बदले हों। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ऐसे विवाद अक्सर असली मुद्दों से ध्यान हटाने का काम करते हैं, लेकिन भाषाई मर्यादा का प्रश्न लोकतांत्रिक राजनीति में बार-बार सामने आता है।
क्या होगा आगे
कांग्रेस की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। सत्तारूढ़ गठबंधन के दलों की माफी की माँग के बीच यह देखना होगा कि खड़गे या कांग्रेस इस पर कोई स्पष्टीकरण देती है या नहीं। राज्य की राजनीति में यह प्रकरण आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है।