फ्रांस विरोध प्रदर्शन: 4 लाख सड़कों पर, पुलिस ने 1,314 को गिरफ्तार किया
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस के प्रमुख शहरों में 25 अक्टूबर 2026 को लाखों लोग सड़कों पर उतरे, जब सरकारी अनुमानों के अनुसार कम से कम 4 लाख प्रदर्शनकारियों ने देशव्यापी मार्च निकाला। गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार 1,314 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 75 जगहों पर आगजनी हुई और 24 दुकानें लूटी गईं। विरोध प्रदर्शन बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण रहा, लेकिन पेरिस और अन्य शहरों में कुछ स्थानों पर हिंसा की छिटपुट घटनाएँ भी हुईं।
विरोध की मुख्य माँगें
यह आंदोलन मूल रूप से स्कूली छात्रों की माँगों के समर्थन में शुरू हुआ था, जिनमें अधिक शिक्षकों की नियुक्ति और जर्जर स्कूल इमारतों की मरम्मत शामिल थीं। लेकिन धीरे-धीरे इसमें बढ़ती महंगाई के खिलाफ नाराज़गी और सरकार की भारी पुलिस तैनाती का विरोध भी जुड़ गया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि सरकार राजनीतिक समाधान निकालने के बजाय पिछले एक महीने से स्कूली प्रदर्शनकारियों को दबाने के लिए दंगा-रोधी पुलिस भेज रही है। कुछ प्रदर्शनकारियों के बैनरों पर लिखा था: 'दमन से विद्रोह जन्म लेता है' और 'विरोध करने का अधिकार'।
पेरिस में मार्च और हिंसा की घटनाएँ
सरकारी अनुमान के अनुसार, अकेले पेरिस में कम से कम 1,10,000 लोगों ने शहर के पूर्वी हिस्से में मार्च निकाला। दोपहर तक माहौल शांतिपूर्ण था — बैंड बज रहे थे और बच्चों समेत परिवार मौजूद थे।
हालाँकि, मार्च के अंत में 'पोर्टे डी विन्सेनेस' के पास काले कपड़े पहने नकाबपोश समूहों ने पुलिस पर कांच की बोतलें और पत्थर फेंके। जवाब में पुलिस ने आँसू गैस, वॉटर कैनन और स्टन ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। एक कूड़ेदान में आग लगाई गई और पुलिस की ओर आतिशबाजी भी की गई।
अन्य शहरों में हालात
ल्योन, लिले, मोंटपेलियर, नैनटेस और टूलूज में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को शहर के केंद्रों तक पहुँचने से रोकने के लिए आँसू गैस का उपयोग किया। मार्सिले में पुलिस के साथ झड़पों के दौरान कुछ जगहों पर कूड़ेदानों में आग लगाई गई।
गंभीर रूप से घायल होने वाले कम से कम दो लोगों की सूचना मिली — एक क्लेरमोंट-फेरंड में और दूसरा टूलूज़ में — जिनकी विस्फोट में उँगलियाँ कट गईं।
नीस में चरम-दक्षिणपंथी समूहों की गिरफ्तारी
दक्षिणी शहर नीस के अभियोजक कार्यालय ने बताया कि 59 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें 11 ऐसे लोग शामिल हैं जिन पर चरम-दक्षिणपंथी (एक्सट्रीम-राइट) समूहों से जुड़े होने का संदेह है और जो कथित तौर पर हिंसा के इरादे से इकट्ठा हुए थे।
अभियोजक कार्यालय के अनुसार, कुछ संदिग्धों को दो वाहनों से पकड़ा गया जिनके पास मास्क, दस्ताने, गैस स्प्रे और डंडे मौजूद थे। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इन समूहों के सदस्यों ने शहर के केंद्र में प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया।
सरकार की प्रतिक्रिया और मैक्रों पर दबाव
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने स्वीकार किया कि मार्चों में कुछ 'हाई-रिस्क ग्रुप' शामिल थे जो मुख्य समूह से अलग हो गए और हिंसा भड़काने की कोशिश की। सरकार ने 70,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए थे, दुकानों को तख्तों से ढका गया था और कई संग्रहालय बंद रखे गए थे।
गौरतलब है कि यह विरोध प्रदर्शन पिछले सप्ताहांत के मुकाबले अपेक्षाकृत कम हिंसक रहा, जब 2,700 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया था और सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुँचा था। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के लिए यह संकट उनके कार्यकाल के अंतिम महीनों में एक गंभीर राजनीतिक और सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है।
ट्रेड यूनियनों ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की वास्तविक संख्या सरकारी अनुमान से दोगुनी थी। आने वाले सप्ताहों में यदि छात्रों और सरकार के बीच बातचीत नहीं होती, तो विरोध का यह सिलसिला और तेज हो सकता है।