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फ्रांस में छात्र आंदोलन हिंसक: 400 से अधिक हिरासत में, पुलिस से भिड़ंत में दर्जनों घायल

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फ्रांस में छात्र आंदोलन हिंसक: 400 से अधिक हिरासत में, पुलिस से भिड़ंत में दर्जनों घायल

सारांश

फ्रांस में स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की कमी के खिलाफ भड़का छात्र आंदोलन 30 सितंबर को देशव्यापी हिंसा में बदल गया — 400 से अधिक हिरासत में, 400 स्कूल प्रभावित। सरकारी बजट कटौती के खिलाफ शिक्षकों की हड़ताल से संकट और गहरा हो गया है।

मुख्य बातें

फ्रांस में 30 सितंबर को छात्र आंदोलन हिंसक हुआ; 400 से अधिक लोग हिरासत में, जिनमें बड़ी संख्या में नाबालिग शामिल।
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार मंगलवार को 400 स्कूलों में व्यवधान, 40 स्कूलों में पूरी तरह नाकाबंदी।
सोमवार को ही 164 लोगों की गिरफ्तारी और 180 स्कूल प्रभावित हो चुके थे।
लील में आगजनी और पथराव; पुलिस ने आँसू गैस का इस्तेमाल किया।
छात्र संगठन अध्यक्ष रियाद रानी ने बताया कक्षाओं में 32-35 छात्र और स्टाफ की भारी कमी।
प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने हिंसा की निंदा की; वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेंशों से सार्वजनिक मतभेद सामने आए।

फ्रांस में स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों की भारी कमी और घटती सुविधाओं के विरोध में उठा छात्र आंदोलन 30 सितंबर को देशभर के कई शहरों में हिंसक रूप ले चुका है। गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में नाबालिग शामिल हैं। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में दर्जनों सुरक्षाकर्मी और छात्र घायल बताए जा रहे हैं।

आंदोलन की पृष्ठभूमि और विस्तार

यह आंदोलन पिछले सप्ताह पेरिस से शुरू हुआ था और अब बोर्डो, रेन्न, नांते, मार्सेय और लील सहित देश के अनेक हिस्सों में फैल चुका है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को लगभग 400 स्कूलों में प्रदर्शन या व्यवधान दर्ज किया गया, जबकि करीब 40 स्कूलों में पूरी तरह नाकाबंदी की गई। छात्रों ने सैकड़ों हाई स्कूलों के प्रवेश द्वार बंद कर दिए।

गौरतलब है कि सोमवार को ही 164 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था और लगभग 180 स्कूल प्रभावित हुए थे। मंगलवार को आंदोलन और अधिक व्यापक हो गया, जो इस बात का संकेत है कि सरकार की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया न मिलने पर छात्रों का आक्रोश और गहरा हो रहा है।

हिंसा और झड़पें

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उत्तरी शहर लील में प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदानों में आग लगा दी और पुलिस पर बोतलें, पत्थर तथा अन्य वस्तुएँ फेंकीं। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया। बोर्डो, रेन्न, नांते और मार्सेय में भी छात्रों और पुलिस के बीच टकराव की खबरें सामने आई हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब फ्रांस में सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी भी सरकार की बजट कटौती योजनाओं के खिलाफ हड़ताल और प्रदर्शन कर रहे हैं। शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग भी इस हड़ताल में शामिल हो चुका है, जिससे सरकार पर दोहरा दबाव बन गया है।

छात्रों की प्रमुख माँगें

छात्र संगठन के अध्यक्ष रियाद रानी ने बताया कि कई कक्षाओं में 32 से 35 तक छात्र हैं और शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों की कमी लगातार बनी हुई है। उनके अनुसार, छात्रों का उद्देश्य बेहतर और अधिक समान शैक्षणिक परिस्थितियों की माँग करना है।

प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख माँगों में कक्षाओं में छात्रों की संख्या कम करना, शिक्षकों और अन्य स्टाफ की कमी दूर करना तथा स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराना शामिल है। इसके अलावा, छात्रों ने लंबे और थकाऊ टाइमटेबल तथा हालिया गर्मी के दौरान कक्षाओं में असहनीय तापमान को लेकर भी नाराज़गी जताई है।

सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया

फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने स्कूलों के आसपास आगजनी और हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि छात्रों, शिक्षकों और पुलिस को खतरे में डालने वाली गतिविधियों को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। दूसरी ओर, छात्र संगठनों और कुछ शिक्षकों का कहना है कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेंशों और प्रधानमंत्री लेकोर्नू के बीच प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीके को लेकर सार्वजनिक रूप से तीखे मतभेद सामने आए हैं, जो इस संकट के राजनीतिक आयाम को और गहरा करते हैं।

आगे की स्थिति

आलोचकों का कहना है कि सरकार की प्रस्तावित बजट योजना में सार्वजनिक खर्च में कटौती शामिल होने से शिक्षा क्षेत्र की समस्याएँ और बढ़ सकती हैं। यदि सरकार छात्रों और शिक्षकों की माँगों पर शीघ्र संवाद नहीं करती, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो लेकोर्नू सरकार दोहरे मोर्चे पर घिरी नज़र आती है। आलोचकों का यह सवाल वाजिब है कि जब कक्षाओं में 35 छात्र बैठते हों और शिक्षकों की कमी बनी हो, तो बजट कटौती किस तर्क से उचित है। मुख्यधारा की कवरेज हिंसा पर केंद्रित है, लेकिन असली कहानी यह है कि सरकार के पास अभी तक कोई ठोस संवाद योजना नहीं है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ्रांस में छात्र आंदोलन क्यों शुरू हुआ?
फ्रांस में छात्र स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों और स्टाफ की कमी, कक्षाओं में अत्यधिक भीड़ (32-35 छात्र प्रति कक्षा) और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की माँग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं। इसके अलावा, लंबे टाइमटेबल और गर्मी में कक्षाओं के असहनीय तापमान को लेकर भी नाराज़गी है।
30 सितंबर को फ्रांस में कितने लोग हिरासत में लिए गए?
गृह मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर तक देशभर में 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें बड़ी संख्या में नाबालिग शामिल हैं। इससे पहले सोमवार को ही 164 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था।
फ्रांस के प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने आंदोलन पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री सेबास्तियन लेकोर्नू ने स्कूलों के आसपास आगजनी और हिंसा की कड़ी निंदा की और कहा कि छात्रों, शिक्षकों और पुलिस को खतरे में डालने वाली गतिविधियों को उचित नहीं ठहराया जा सकता। वहीं, छात्र संगठन और कुछ शिक्षक माँग कर रहे हैं कि छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए।
फ्रांस में कितने स्कूल प्रभावित हुए?
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार 30 सितंबर को लगभग 400 स्कूलों में प्रदर्शन या व्यवधान हुआ, जबकि करीब 40 स्कूलों में पूरी तरह नाकाबंदी की गई। इससे पहले सोमवार को लगभग 180 स्कूल प्रभावित हुए थे।
फ्रांस के छात्र आंदोलन और सरकारी हड़ताल में क्या संबंध है?
फ्रांस में एक ओर छात्र शिक्षा सुविधाओं के लिए आंदोलन कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी सरकार की बजट कटौती योजनाओं के खिलाफ हड़ताल पर हैं। शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग भी इस हड़ताल में शामिल है, जिससे सरकार पर दोहरा दबाव बन गया है।
राष्ट्र प्रेस
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