फ्रांस में छात्र आंदोलन: 500 माध्यमिक स्कूल बंद, 78 शिक्षा कर्मचारी घायल
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस में भड़के छात्र आंदोलन के चलते सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को देशभर में करीब 500 माध्यमिक विद्यालय पूरी तरह या आंशिक रूप से बंद रहे। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार जिन स्कूलों में सुरक्षा की स्थिति 'ठीक नहीं' थी, वहाँ कक्षाएँ निलंबित की गईं। मंगलवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
फ्रांस के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शनकारियों ने कूड़ेदानों और अन्य वस्तुओं में आग लगाई, सुरक्षाकर्मियों पर चीज़ें फेंकी तथा स्कूल भवनों और सड़क पर लगे सामान को क्षति पहुँचाई। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस, रबर की गोलियाँ, डिफेंसिव बॉल लॉन्चर (LBD) और लाठियों का इस्तेमाल किया।
शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने टीवी चैनल फ्रांस 2 और रेडियो स्टेशन फ्रांस इंटर को दिए इंटरव्यू में बताया कि शुक्रवार को '400 से 500 कक्षाएँ बंद थीं' और सोमवार को भी यही स्थिति रहेगी। उन्होंने आगे बताया कि प्रभावित 735 स्कूलों में से 24 में 'आग लगाई गई या तोड़-फोड़ की गई', और आंदोलन शुरू होने के बाद से शिक्षा मंत्रालय के 78 कर्मचारी घायल हो चुके हैं।
आंदोलन की जड़ें कहाँ हैं
रिपोर्टों के अनुसार, यह विरोध करीब दो सप्ताह पहले क्रेतेइल स्थित सेंट-एक्सुपरी माध्यमिक विद्यालय से शुरू हुआ था। वहाँ के शिक्षकों ने स्टाफ और संसाधनों की कमी के विरोध में हड़ताल की थी, जिसे देखकर छात्र भी उनके समर्थन में उतर आए। पिछले एक सप्ताह में यह लहर पूरे फ्रांस में फैल गई।
छात्रों की माँगें विशिष्ट और ठोस हैं — असुरक्षित व जर्जर इमारतें, कक्षाओं में अत्यधिक संख्या, शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण बाधित पढ़ाई और ऐसे समय-सारिणी जो स्टाफ की कमी से निपटने में सक्षम नहीं। कुछ छात्रों ने स्कूलों में मोबाइल फोन पर लगी पाबंदी का भी विरोध किया है।
सरकार की प्रतिक्रिया
रविवार को गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'देश की सुरक्षा एजेंसियाँ युवाओं को दबाती नहीं हैं, बल्कि उन छात्रों की सुरक्षा और देखरेख करती हैं जो शांतिपूर्ण तरीके से अपनी माँगें रखना चाहते हैं। दूसरी ओर, वे उपद्रवियों द्वारा की जाने वाली तोड़-फोड़, हिंसा और बदसलूकी को रोकने के लिए सख्ती और बिना देरी के कार्रवाई करती हैं।'
नुनेज ने उन आरोपों को 'गंभीर और बेबुनियाद' बताते हुए खारिज किया जिनमें कहा गया था कि सुरक्षाबल 'मजदूर वर्ग के इलाकों के नस्लीय युवाओं' पर बेरहमी से कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने सुरक्षाबलों के प्रति अपनी 'अटूट' समर्थन दोहराया।
वार्ता का नतीजा
शुक्रवार को शिक्षा मंत्री गेफ्रे ने छात्र प्रतिनिधियों से मुलाकात की। हालाँकि, बैठक के बाद प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें कोई 'ठोस उपाय' नहीं मिला और उन्होंने अगले सप्ताह भी आंदोलन जारी रखने का आह्वान किया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब फ्रांस में शिक्षा बजट में कटौती को लेकर पहले से ही असंतोष था। गौरतलब है कि छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन फ्रांस में ऐतिहासिक रूप से नीतिगत बदलाव को मजबूर करने में सक्षम रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय पर अब दबाव है कि वह ठोस घोषणाएँ करे; अन्यथा आने वाले दिनों में बंद और हिंसा का सिलसिला बढ़ सकता है।