फ्रांस में वेतन वृद्धि की मांग पर हजारों कर्मचारी सड़कों पर, 70,000 सुरक्षाकर्मी तैनात
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस की राजधानी पेरिस सहित देशभर में 5 नवंबर 2026 को हजारों कर्मचारियों, ट्रेड यूनियन सदस्यों और छात्रों ने वेतन वृद्धि तथा बेहतर जीवन-यापन की माँग को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। येलो वेस्ट आंदोलन, ट्रेड यूनियनों और विभिन्न क्षेत्रों के कर्मचारियों की संयुक्त सहभागिता से यह प्रदर्शन फ्रांस के हालिया इतिहास के सबसे बड़े जन-विरोधों में से एक बनता जा रहा है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब फ्रांसीसी संसद में 2027 के बजट विधेयक पर गहरा राजनीतिक संकट गहरा गया है।
मुख्य घटनाक्रम
ट्रेड यूनियनों ने उच्च वेतन की माँग के साथ-साथ हाई स्कूल छात्रों के आंदोलन के समर्थन में मार्च निकाले। छात्र सितंबर से ही कक्षाओं में अत्यधिक भीड़, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालय प्रवेश से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। बाद में ट्रेड यूनियनें भी उनके साथ जुड़ गईं और महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत तथा ईंधन की ऊँची कीमतों को लेकर सड़कों पर उतरीं।
गौरतलब है कि 17 और 18 अक्टूबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और लूटपाट की घटनाएँ सामने आई थीं, जिसके बाद अधिकारियों ने पेरिस में ट्रेड यूनियनों के प्रस्तावित मार्ग पर आंशिक प्रतिबंध लगाते हुए वैकल्पिक मार्ग की अनुमति दी।
सुरक्षा व्यवस्था
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहा कि गुरुवार के प्रदर्शनों के मद्देनजर 70,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा बलों की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन शांतिपूर्वक हों और किसी तरह की हिंसा न हो।
नुनेज ने बताया कि खुफिया एजेंसियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि कुछ कट्टर वामपंथी समूह और हिंसक प्रदर्शनकारी संगठन इन प्रदर्शनों में विशेष रुचि दिखा रहे हैं। उनके अनुसार, ऐसे तत्वों का उद्देश्य अशांति फैलाना, बिना अनुमति मार्च निकालना और व्यापारिक प्रतिष्ठानों तथा सरकारी इमारतों को निशाना बनाकर लूटपाट एवं तोड़फोड़ करना हो सकता है।
बजट संकट और राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह प्रदर्शन ऐसे समय में तेज हुए हैं जब फ्रांसीसी नेशनल असेंबली ने 2027 के बजट विधेयक के पहले हिस्से को खारिज कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार का मूल बजट प्रस्ताव अब सीनेट के सामने पेश किया जाएगा, जहाँ 9 दिसंबर को इस पर मतदान होना है। इसके बाद एक संसदीय समिति दोनों सदनों के बीच सहमति बनाने का प्रयास करेगी और विधेयक को पुनः नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा।
यह ऐसे समय में आया है जब फ्रांस की सरकार पर बजट घाटे को नियंत्रित करने और आम नागरिकों की माँगों के बीच संतुलन बनाने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
आलोचना और मानवाधिकार चिंताएँ
ट्रेड यूनियनों और मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर कथित कड़ी पुलिस कार्रवाई और विरोध को सीमित करने के सरकारी उपायों की आलोचना की है। फ्रांसीसी पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग करने के आरोप भी लगाए गए हैं, हालाँकि अधिकारियों ने इन आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
आगे क्या
9 दिसंबर को सीनेट में बजट मतदान और संसदीय समिति की सहमति-प्रक्रिया फ्रांस की राजनीतिक दिशा तय करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बजट पर राजनीतिक सहमति नहीं बनती और वेतन-महंगाई की समस्या का ठोस समाधान नहीं होता, तब तक सड़कों पर आंदोलन जारी रहने की संभावना है।