फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन: 997 पुलिसकर्मी घायल, 2,397 गिरफ्तार; PM लेकोर्नू ने लगाया आंशिक कर्फ्यू
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि सप्ताहांत में हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान लूटपाट की घटनाओं के बाद फ्रांस के कई शहरी इलाकों में सोमवार शाम से आंशिक कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, हिंसा प्रभावित इन प्रदर्शनों में 997 पुलिसकर्मी घायल हुए और 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
शनिवार को फ्रांस भर में करीब 5,50,000 लोगों ने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया, जो बढ़ती जीवन-यापन लागत, आवास की कमी और सार्वजनिक सेवाओं पर बढ़ते दबाव के खिलाफ आक्रोश का इज़हार करने निकले थे। प्रदर्शन आगे चलकर हिंसक हो गए — लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आईं। रविवार को जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, घायल 997 पुलिस अधिकारियों और जवानों में से सात गंभीर रूप से घायल हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने कहा कि उन्होंने फ्रांस के प्रीफेक्ट्स को कई स्थानों पर आंशिक कर्फ्यू लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अव्यवस्था 'शहरी केंद्रों के बहुत सीमित इलाकों' तक ही सीमित है। लेकोर्नू ने यह भी कहा कि ज़रूरत पड़ने पर आपातकाल की स्थिति घोषित की जाएगी, लेकिन उनके अनुसार फिलहाल 'कर्फ्यू अधिक उचित उपाय' प्रतीत होता है।
दक्षिणी फ्रांस के बूश-दु-रोन के पुलिस प्रीफेक्चर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मार्सिले शहर में दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे तक) सभी सभाओं और प्रदर्शनों पर प्रतिबंध की घोषणा की। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शनिवार को हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का संकेत दिया।
आम जनता और कारोबार पर असर
फ्रांस के व्यापार मंत्री सर्ज पापिन ने अनुमान लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 3,000 कारोबार प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने घोषणा की कि नुकसान और लूटपाट से प्रभावित दुकानदारों के लिए मंगलवार से आंशिक बेरोज़गारी के उपाय लागू किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार प्रभावित कारोबारों की मदद के लिए सार्वजनिक फंडिंग मुहैया कराएगी, लेकिन इस पर ज़ोर दिया कि जब तक व्यवस्था शीघ्र बहाल नहीं होती, ऐसी सहायता का सीमित असर होगा।
गौरतलब है कि यह संकट ऐसे समय में उभरा है जब यूरोप के बड़े शहरों में आर्थिक दबाव चरम पर है — सप्ताहांत में कई यूरोपीय शहरों की सड़कों पर हज़ारों लोग उमड़े, जो आवास की किल्लत, महँगाई और सार्वजनिक सेवाओं की बदहाली के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे।
प्रशासनिक कदम
गृह मंत्रालय ने सोमवार दोपहर तक प्रभावित इलाकों का विस्तृत नक्शा जारी करने का आश्वासन दिया। कर्फ्यू प्रभावित क्षेत्रों की सटीक सूची सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
फ्रांस सरकार अब त्वरित व्यवस्था-बहाली और आर्थिक राहत उपायों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है। प्रदर्शनकारियों की मूल माँगें — जीवन-यापन लागत में कमी, किफायती आवास और बेहतर सार्वजनिक सेवाएँ — अभी भी अनसुलझी हैं, जिससे आने वाले दिनों में तनाव बने रहने की आशंका है।